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Hindi News ›   Chandigarh ›   See Lions in Chhatbir Zoo

छतबीड़ में फिर सुनाई देगी शेरों की दहाड़

Wed, 27 Aug 2014 04:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 27 Aug 2014 04:39 PM IST
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See Lions in Chhatbir Zoo

छतबीड़ में आपको जल्द ही शेरों की दहाड़ सुनाई देगी। शेर के 52 दिन के शावकों की फीडिंग एक सप्ताह के भीतर शुरू होने वाली है और दो महीने बाद उनको बाहर छोड़ दिया जाएगा। छतबीड़ जू में शेर के यह शावक अभी मां हैली का दूध ही पी रहे हैं।

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इन बच्चों को अब तक सिर्फ छतबीड़ जू प्रबंधन द्वारा ऑब्जर्व ही किया जा रहा था। ख्याल इस बात का रखा जा रहा है कि शावकों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। छतबीड़ जू के डाक्टर एमपी सिंह ने बताया कि छतबीड़ जू में हैली अभी बच्चों के साथ ही है।
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हैली को मीट डाला जाता है और उसके साथ ही शावकों के खेलने के लिए मीट डाल दिया जाता है। शावक मीट से खेलते हैं। डाक्टर एमपी सिंह ने बताया कि मीट डालने की वजह शेर के बच्चों को एक अहसास दिलाना है, जिससे कि वह मीट में दिलचस्पी लें। उसके बाद उनको एक खास प्रकार का मीट प्रोवाइड किया जाएगा। इसीलिए रोजाना शेर के शावक पर नजर रखी जा रही है। शेर के शावक अब दिनभर खेलते रहते हैं।
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इसलिए बरत रहे हैं सावधानी
छतबीड़ जू में इस समय एशियाटिक नस्ल के तीन शेर और शेरनी हैं। उम्रदराज शेर रॉकी 24 साल का है। यह तीनों शेर जू की सफारी की शोभा बढ़ा रहे हैं। यह चिड़ियाघर साल 1999 में शेरों के बीमारी के कारण अचानक मरने से सुर्खियों में आया था। इस कारण चिड़ियाघर के ब्रीडिंग प्रोग्रामों पर हुए प्रयोग विवादों में फंस गए।


असल विवाद 80 के दशक में एशियाटिक नस्ल की अफ्रीकी नस्ल के साथ क्रास ब्रीडिंग पर खड़ा हुआ। 90 के दशक में शेरों की संख्या बढ़ी पर उसके बाद बीमारियों से कई शेरों की मौत हो गई थी। 1999 से 2005 के बीच भी शेरों के मरने की घटनाएं हुईं।

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