चंडीगढ़: डेंगू के मरीजों की लगातार बढ़ रही संख्या, सेक्टर-48 का अस्पताल खुलने के बाद भी जीएमसीएच-32 में नहीं घटी भीड़
चंडीगढ़ प्रशासन के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। डेंगू के मरीजों की लगातार तादाद बढ़ती जा रही है, जिसको लेकर सेक्टर-48 का अस्पताल खोल दिया गया था। इसके बाद भी जीएमसीएच-32 में मरीजों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही। डर के मारे इलाज कराने दूसरे अस्पताल में मरीज नहीं जा रहे हैं।
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चंडीगढ़ में डेंगू के मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या को गंभीरता से लेते हुए यूटी प्रशासन ने कोविड आरक्षित सेक्टर-48 के अस्पताल को 18 अक्तूबर को खोल दिया था। लेकिन योजना के अनुसार इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने डेंगू के स्थिर मरीजों को सेक्टर-48 में शिफ्ट करने का आदेश दिया है। जीएमसीएच-32 की इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर भर्ती मरीज वहां जाने से इनकार कर रहे हैं। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि वहां उन्हें उचित इलाज नहीं मिल पाएगा। नतीजतन इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों की संख्या कम होने के बजाय और बढ़ती जा रही है।
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सेक्टर-48 के अस्पताल में सिर्फ 28 मरीज
स्थिति यह है कि इमरजेंसी वार्ड और गैलरी फुल होने के बाद मरीजों को रैंप पर स्ट्रेचर लगाकर भर्ती किया जा रहा है, जबकि सेक्टर-48 के अस्पताल में 100 बेड पर मौजूदा समय में सिर्फ 28 मरीज शिफ्ट किए गए हैं। इस बारे में अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सेक्टर-48 में गंभीर मरीजों के बजाय स्थिर मरीजों को शिफ्ट किया जा रहा है, जिससे इमरजेंसी वाली स्थिति वहां उत्पन्न न हो, लेकिन स्थिर मरीज भी वहां जाने से मना कर रहे हैं।
नहीं तय हो पा रहा किसे शिफ्ट किया जाए
उन्हें स्ट्रेचर पर जीएमसीएच-32 में रहना मंजूर है। वहीं, दूसरी तरफ रेफरल सेंटर होने के कारण जीएमसीएच-32 में 90 प्रतिशत गंभीर मरीज हैं। इससे अस्पताल प्रशासन यह तय नहीं कर पा रहा कि किन मरीजों को सेक्टर-48 अस्पताल में शिफ्ट किया जाए और किसे जीएमसीएच-32 में ही रहने दिया जाए।
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सेक्टर-48 के अस्पताल में 100 बेड संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन जीएमसीएच-32 में भर्ती मरीज वहां शिफ्ट नहीं होना चाह रहे, जबकि वहां 24 घंटे रोटेशन पर डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमसीएच-32