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Hindi News ›   Chandigarh ›   Sector-37, Chandigarh Kothi Case : Inspector Rajdeep will be produced before SIT

सेक्टर-37 में करोड़ों की कोठी कब्जाने पर आया नया मोड़..

Thu, 11 Mar 2021 02:02 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 11 Mar 2021 02:02 AM IST
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Sector-37, Chandigarh Kothi Case : Inspector Rajdeep will be produced before SIT
चंडीगढ़। सेक्टर-37 में करोड़ों की कोठी कब्जाने के मामले में डीएसपी रामगोपाल से पूछताछ के बाद अब बारी है तत्कालीन थाना प्रभारी राजदीप सिंह से सवालों के जवाब लेने की। शुक्रवार को संभावना है कि राजदीप एसआईटी के समक्ष पेश होंगे। एसआईटी उनसे पूछताछ करेगी कि वर्ष 2017 में कोठी बेचने के प्रकरण के बारे में शिकायत मिलने के बावजूद उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की थी। उनके बयान के बाद मामला पूरी तरह से साफ होगा।
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वहीं, बुधवार को हवलदार रामपाल और सिपाही अशोक को पूछताछ के लिए एसआईटी ने बुलाया था। ये दोनों पुलिसकर्मी वर्ष 2017 में सेक्टर-37 के बीट बॉक्स में तैनात थे। इनसे एसआईटी ने पूछा कि पीड़ित ने जब शिकायत की थी तब दोनों कहां थे और मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की। बताया गया है कि दोनों पुलिसकर्मियों ने पूछताछ में सहयोग नहीं किया। ऐसे में इन्हें वीरवार को भी बुलाया गया है।
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असल में राहुल मेहता के किराएदार प्रदीप रतन ने वर्ष 2017 में सेक्टर-39 थाने में शिकायत दी थी कि वह सेक्टर-37 स्थित कोठी नंबर 340 में किराएदार है। उक्त कोठी को कुछ लोग कब्जाने की कोशिश कर रहे हैं। शिकायत में पत्रकार संजीव महाजन समेत कई आरोपियों के नाम भी थे। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उस समय थाना प्रभारी राजदीप सिंह ही थे। इसके बाद दोबारा दिसंबर वर्ष 2020 में शिकायत दी गई। इसके आधार पर एसएसपी कुलदीप सिंह चहल की देखरेख में पत्रकार संजीव महाजन, डीएसपी रामगोपाल के भाई सतपाल डागर, पंजाब-हरियाणा व चंडीगढ़ के शराब कारोबारी अरविंद सिंगला समेत कुल नौ आरोपियों पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई। बता दें कि इस संबंध में मंगलवार को डीएसपी रामगोपाल से भी एसआईटी ने पूछताछ की है। आरोप था कि उनके दफ्तर में कोठी बेचने का सौदा हुआ है लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी से इंकार किया है।
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मनीष की जमानत का पुलिस ने किया विरोध
आरोपी मनीष गुप्ता की जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान पुलिस ने अपनी याचिका में जवाब दिया कि मनीष गुप्ता को उक्त कोठी के बारे में पूरी जानकारी थी। ऐसे में मनीष को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। मनीष की तरफ से वकील राकेश चोपड़ा ने जमानत अर्जी दायर की थी। अर्जी में मनीष ने कहा कि उसका नाम एफआईआर में भी नहीं है। उसे केवल इसलिए गिरफ्तार किया गया कि वह विवादित कोठी खरीदने वाले सौरभ गुप्ता का बड़ा भाई है। सौरभ का नाम एफआईआर में दर्ज है, लेकिन उसे पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया। अब मनीष की जमानत याचिका पर शुक्रवार को जिला अदालत अपना फैसला सुना सकती है।

डीएसपी के भाई आरोपी डागर की आज पेशी
डीएसपी रामगोपाल के भाई आरोपी सतपाल डागर का दो दिन का रिमांड खत्म होने के बाद पुलिस उसे वीरवार को जिला अदालत में पेश करेगी। वहीं, इससे पहले सात दिन के पुलिस रिमांड के बाद पुलिस ने मनीष और संजीव महाजन को अदालत में पेश किया था, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया था। पुलिस अभी तक नकली राहुल मेहता को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
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