कहते हैं- 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में थे शहीद ऊधम सिंह, जबकि सच इससे उल्ट है

सुशील कुमार, अमर उजाला, सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर) Updated Fri, 26 Jul 2019 12:31 PM IST
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माना जाता है कि 13 अप्रैल 1919 को शहीद ऊधम सिंह जलियांवाला बाग में मौजूद थे और वे नरसंहार के चश्मदीद गवाह थे, जबकि सच तो इससे उल्टा ही है। ब्रिटिश रिकार्ड के मुताबिक, शहीद ऊधम सिंह अमृतसर के जलियांवाला बाग में उपस्थित नहीं थे। लंदन के केकस्टन हॉल में माइकल ओडवायर को मौत के घाट उतारने के बाद 5 जून 1940 को अदालत में जज एटकिन्सन के सवाल के उत्तर में ऊधम सिंह ने बयान दिया था कि जब अमृतसर में नरसंहार हुआ था, उस वक्त वह ईस्ट अफ्रीका गए हुए थे।
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कैनन रॉ पुलिस के अनुसार, 13 मार्च 1940 को ऊधम सिंह ने बयान दिया कि 1918 में वह भारत से ईस्ट अफ्रीका चले गए थे। वह नैरोबी में जर्मनी की एक कंपनी में मोटर मैकेनिक के तौर पर 18 माह काम करके जून 1919 में भारत लौटे थे। जबकि 17 जून 1940 को एक ब्रिटिश अधिकारी ने भारत के सचिव को पत्र लिखकर बताया कि माइकल ओडवायर की हत्या के बाद उन्होंने जेल में ऊधम सिंह से मुलाकात की थी। इस दौरान ऊधम सिंह ने बताया कि उनकी बहन व भाई जलियांवाला बाग के नरसंहार में मारे गए थे। नरसंहार के वह चश्मदीद गवाह हैं।
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