यहां आमरण अनशन पर बैठा द्वितीय विश्व युद्ध का योद्धा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
द्वितीय विश्व युद्ध का योद्धा अमर सिंह चंडीगढ़ में हाईकोर्ट के बाहर आमरण अनशन पर बैठा है। मामला जानकर आप चौंक जाएंगे। दरअसल, वे कानूनी दांव पेंचों से परेशान होकर हड़ताल पर बैठे हैं। अमर सिंह पिछले 26 साल से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन हाईकोर्ट से मिलने वाली लंबी-लंबी तारीखों ने उन्हें परेशान कर दिया है।
द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लेने के बाद अमर सिंह ने पंजाब सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी में ज्वाइन कर लिया था। साल 1989 में रिटायरमेंट के दौरान उन्हें मिलने वाले दस लाख रुपये की राशि डिपार्टमेंट ने रोक ली थी। उस राशि को प्राप्त करने के लिए अमर सिंह पिछले 26 सालों से डिस्ट्रिक कोर्ट से लेकर सुप्रीमकोर्ट तक लड़ाई लड़ रहे हैं।
जब राशि नहीं मिली तो उन्होंने पंजाब प्रिंटिंग प्रेस के अधिकारियों के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करने के लिए याचिका डाल दी। इस मामले की तारीख पर तारीख पड़ रही थी। मामले की अगली सुनवाई नवंबर की तारीख सुनिश्चित की गई।
हाईकोर्ट से तारीख जल्दी करने की गुहार
अमर सिंह ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई कि वे उनकी जिंदगी पता नहीं कब खत्म हो जाए, इसलिए तारीख जल्दी रखी जाए। इस पर उन्हें कोई रियायत नहीं मिली तो वे हाईकोर्ट के बाहर भूख हड़ताल पर बैठ गए।
जब इसकी भनक चंडीगढ़ पुलिस को लगी थी तो उन्होंने अमर सिंह को उठाया और उनके सेक्टर 36 स्थित चंडीगढ़ घर में छुड़वा दिया। उनका कहना है कि जब तक उनकी सांसे चल रही हैं, तब तक वे हक की लड़ाई जारी रखेंगे।
अमर सिंह का दावा है कि दस लाख रुपये की राशि पर ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज लगते-लगते बकाया राशि करीब सवा करोड़ पहुंच गई है। अमर सिंह को दूसरे विश्व युद्ध में जौहर दिखाने पर सेना की ओर से मेडल भी मिल चुका है।
यह था मामला
साल 1989 में जब अमर सिंह रिटायर हुए तो उनके पेंशन बेनिफिट के करीब दस लाख रुपये डिपार्टमेंट ने रोक लिए। डिपार्टमेंट के खिलाफ पहले डिस्ट्रिक कोर्ट, फिर हाईकोर्ट में केस जीते। इस केस के खिलाफ पंजाब प्रिंटिंग प्रेस व सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर कर दी, लेकिन सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई के दौरान एसएलपी खारिज कर दी।
सुप्रीमकोर्ट के आर्डर के बावजूद जब उनकी सुनवाई नहीं हुई तो एग्जीक्यूशन पिटीशन दायर कर दी। पटीशन दायर होने के बाद अमर सिंह को करीब सवा चार लाख रुपये दिया गया, लेकिन बाकी रुपया रोक लिया गया। इस पर उन्होंने रि-एग्जीक्यूशन अप्लीकेशन फाइल कर दी। उधर, पंजाब की ओर रिवीजन पिटीशन फाइल कर दी गई। सुनवाई चलती रही।
एक के बाद एक तीसरी रिवीजन पिटीशन डाली गई और उसे मंजूर कर दिया गया। अमर सिंह की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीमकोर्ट की ओर से उन्हें डिक्री मिली हुई ऐसे में कैसे रिवीजन पिटीशन मंजूर की जा सकती है। इसके खिलाफ अमर सिंह ने सुप्रीमकोर्ट ने एसएलपी दायर की, लेकिन उसे कैंसिल कर दी गई।
उसके बाद उन्होंने अवमानना व क्यूरेटिव रिव्यू पिटीशन भी दायर की, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने इस मामले में दखल देने के राष्ट्रपति तक गुहार लगाई। इतने चक्कर लगाने के बाद वे सिस्टम से परेशान हो गए और उन्होंने पंजाब सरकार के अधिकारियों के खिलाफ क्रिमिनल केस दायर करने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में साल 2014 को एक पिटीशन दायर कर दी। इस मामले की सुनवाई चल रही है।