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विश्वयुद्ध का सिपाही पेंशन की लड़ाई हारा
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 16 Nov 2014 03:25 PM IST
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द्वितीय विश्वयुद्ध में दुश्मनों से लड़ते हुए गोली खाने वाला सिपाही पेंशन की लड़ाई हार गया है। सिपाही हरनारायण ने वार इंजरी पेंशन के लिए अप्लाई किया था। उन्होंने रक्षा मंत्रालय के कई बार चक्कर लगाए, लेकिन उन्हें पेंशन नहीं मिली। उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी ने आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) में याचिका दायर की, लेकिन वहां पर भी ट्रिब्यूनल ने उनका केस खारिज कर दिया। अब पीड़ित हाईकोर्ट में एएफटी के खिलाफ अपील दायर करेंगे।
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भिवानी निवासी हरनारायण साल 1942 में फौज में भर्ती हुए थे। ब्रिटिश राज होने के कारण साल 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध में भेज दिया गया। जापान के पास दुश्मनों से लोहा लेते वक्त उनके कंधे में गोली लग गई। इससे उनका कंधा बेकार हो गया। साल 1946 में 30 प्रतिशत विकलांगता पाए जाने पर मेडिकल आधार पर उन्हें फौज से रिटायर कर दिया गया। हालांकि उन्हें फैमिली पेंशन मिलती रही, लेकिन यह बहुत कम थी
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पढ़े-लिखे न होने के कारण उन्हें पेंशन से जुड़ी बारीकियां मालूम नहीं थी। युद्ध के दौरान घायल होने पर वे वार इंजरी पेंशन के हकदार थे, लेकिन वे इसके लिए अप्लाई नहीं कर पाए।
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याचिका में दावा किया गया है कि हरनारायण ने कई बार इस मुद्दे को सेना के संबंधित विभाग के सामने मुद्दा उठाया, लेकिन उनकी नहीं सुनीं गई। आखिरकार लंबे संघर्ष के बाद साल 2001 में उनकी मौत हो गई।
मौत के बाद पत्नी ने लड़ी लड़ाई
हरनारायण की मौत के बाद भी उनका संघर्ष जारी रहा। उनकी पत्नी जीवनी ने मौत के 12 साल बाद 11 मार्च 2013 को इंसाफ के लिए चंडीगढ़ आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल ने याचिका दायर की।
याचिका में उन्होंने मांग की कि साल 1945 से लेकर 2001 तक वॉर इंजरी पेंशन और उसके बाद से उनके परिवार को लिबरालाइज्ड फैमिली पेंशन दी जाए। याचिकाकर्ता की ओर से मेडिकल बोर्ड से संबंधित सभी सर्टिफिकेट, आर्मी की डिस्चार्ज बुक और पेंशन सर्टिफिकेट पेश किए गए।
इसलिए खारिज कर दिया गया केस
सरकारी वकील ने सबसे पहले टाइमिंग पर सवाल उठाया। उनकी तरफ से कहा गया कि सिपाही को 1946 में सेना से डिस्चार्ज कर दिया गया था, लेकिन इतने सालों तक अपील क्यों नहीं की गई। सिपाही की मौत भी साल 2001 में हो गई थी, लेकिन उस दौरान भी अपील नहीं की गई। ट्रिब्यूनल ने फिलहाल देरी से अपील की गई को आधार मानकर केस को डिसमिस कर दिया है।
हाईकोर्ट में करेंगे अपील
याचिकाकर्ता के एडवोकेट समरवीर सिंह का कहना है कि उन्होंने सभी डाक्यूमेंट पेश किए। याचिकाकर्ता के परिवार की हालत खराब है। पढ़े-लिखे न होने के कारण उन्हें फैमिली पेंशन ही मिलती रही, जबकि सिपाही वार इंजरी पेंशन का हकदार था और उनका परिवार लिबरालाइज्ड फैमिली पेंशन का। एएफटी के आर्डर के खिलाफ वे जल्द ही हाईकोर्ट में अपील करेंगे।