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...क्या आप भी जूझ रहें हैं इस परेशानी से
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Tue, 03 Dec 2013 05:27 PM IST
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सेक्टर-15 में पार्किंग की समस्या भी गंभीर है। मार्केट की पार्किंग फुल हो जाती है तो लोग सड़क किनारे भी वाहन पार्क करने लगते हैं।
वहीं, जगह की कमी की वजह से घरों के बाहर भी कार पार्किंग आम हो गई है। कई बार पार्किंग की वजह से कहासुनी भी हो जाती है। इसे देखते हुए सेक्टरवासियों ने अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने की मांग की है।
पांच वर्ष पहले नगर परिषद के पूर्व प्रधान रविन्दर रावल ने अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने के लिए फिजिबलिटी टेस्ट करवाया था और पार्कों को अंडरग्राउंड के लिए उचित माना गया था।
बाद में यह परियोजना अधर में रह गई। अब डिप्टी मेयर भी अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने की मांग का समर्थन किया है।
सेक्टर-15 में बने इंटरनल रोड्स पर रात के वक्त घरों के बाहर वाहनों की लंबी कतार होती है। कारें ऐसी पार्क की होती हैं कि कोई जरूरी काम आ जाए तो अपनी कार निकालने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ती है।
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वहीं, मार्केट में भी कमोबेश यही हाल है। करीब डेढ़ महीने पहले मार्केट के सामने की गली में आग लगने पर फायर ब्रिगेड को भी अंदर पहुंचने के लिए 30 मिनट की मशक्कत करनी पड़ी थी।
अंडरग्राउंड पार्किंग का प्रस्ताव पांच वर्ष पहले आया था। एक एजेंसी से फिजिबलिटी टेस्ट भी कराया गया और शहर के सभी पार्क इसके लिए उपयुक्त पाए गए थे।
यूरोपीय देशों की तर्ज पर यहां भी अंडरग्राउंड पार्किंग बनाए जा सकते हैं, जिससे एक साथ कई समस्याएं दूर हो सकती हैं। इसके लिए 2000 मीटर से अधिक बड़े पार्कों को चुना जाना चाहिए। अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने से लोगों की आधे से अधिक समस्याएं दूर हो जाएंगी।
- रविन्दर रावल, पूर्व प्रधान, नगर परिषद
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वहीं, जगह की कमी की वजह से घरों के बाहर भी कार पार्किंग आम हो गई है। कई बार पार्किंग की वजह से कहासुनी भी हो जाती है। इसे देखते हुए सेक्टरवासियों ने अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने की मांग की है।
पांच वर्ष पहले नगर परिषद के पूर्व प्रधान रविन्दर रावल ने अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने के लिए फिजिबलिटी टेस्ट करवाया था और पार्कों को अंडरग्राउंड के लिए उचित माना गया था।
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बाद में यह परियोजना अधर में रह गई। अब डिप्टी मेयर भी अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने की मांग का समर्थन किया है।
सेक्टर-15 में बने इंटरनल रोड्स पर रात के वक्त घरों के बाहर वाहनों की लंबी कतार होती है। कारें ऐसी पार्क की होती हैं कि कोई जरूरी काम आ जाए तो अपनी कार निकालने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ती है।
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वहीं, मार्केट में भी कमोबेश यही हाल है। करीब डेढ़ महीने पहले मार्केट के सामने की गली में आग लगने पर फायर ब्रिगेड को भी अंदर पहुंचने के लिए 30 मिनट की मशक्कत करनी पड़ी थी।
अंडरग्राउंड पार्किंग का प्रस्ताव पांच वर्ष पहले आया था। एक एजेंसी से फिजिबलिटी टेस्ट भी कराया गया और शहर के सभी पार्क इसके लिए उपयुक्त पाए गए थे।
यूरोपीय देशों की तर्ज पर यहां भी अंडरग्राउंड पार्किंग बनाए जा सकते हैं, जिससे एक साथ कई समस्याएं दूर हो सकती हैं। इसके लिए 2000 मीटर से अधिक बड़े पार्कों को चुना जाना चाहिए। अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने से लोगों की आधे से अधिक समस्याएं दूर हो जाएंगी।
- रविन्दर रावल, पूर्व प्रधान, नगर परिषद