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पहले स्कूल में झाडू़ लगाओ, फिर पांच क्लास को पढ़ाओ
ब्यूरो, अमर उजाला/फिल्लौर (जालंधर)
Updated Tue, 09 Sep 2014 10:14 PM IST
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शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर गांव खानपुर के प्राइमरी स्कूल में शिक्षक ही हेडमास्टर है और खुद ही सफाई सेवक। स्कूल में पद तो पांच शिक्षकों के हैं, लेकिन मास्टर जी पांच क्लासों को एक साथ पढ़ाते हैं।
स्कूल में हेडमास्टर के अलावा चार जेबीटी टीचरों की पोस्ट है लेकिन पिछले लंबे समय से स्कूल में एक ही टीचर मुनीष कपूर हैं। पहली कक्षा से लेकर पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा उन्हीं पर है। स्कूल में पांच कक्षाओं में कुल 34 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल को सुबह मास्टर मुनीष कपूर ही खोलते हैं, फिर अंदर चारों कमरों में झाड़ू लगाते हैं और मेज आदि साफ करते हैं। उसके बाद स्कूल में बच्चों के पीने के लिए पानी का प्रबंध करते हैं। एक पानी की टंकी लगाई हुई है, जिसमें रोजाना पानी भरने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।
इसके बाद वे स्कूल की पांचों कक्षाओं को एक साथ पढ़ाते हैं। वहीं अगर इमरजेंसी में उनको छुट्टी करनी पड़ जाए तो स्कूल कौन खोलेगा, इसका कुछ अता पता नहीं है। बच्चे आते हैं और इंतजार कर लौट जाते हैं। अगर उन्हें प्लान के मुताबिक छुट्टी लेनी है तो वह आस-पास गांव के स्कूल के प्रिंसिपल को निवेदन करते हैं, जिसके बाद वहां पर अस्थायी रूप से मास्टर भेजा जाता है। वहीं जब उनसे पूछा गया कि वे चार कमरों में एक साथ पांच कक्षाओं को कैसे पढ़ाते हैं, तो उनका जवाब था सब मैनेज करना पड़ता है।
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पहले एक कक्षा को कुछ समय पढ़ाता हूं, उनको काम देकर अगली क्लास में चला जाता हूं। इसी तरह दूसरी क्लास में कुछ समय निकालने के बाद उनको काम देकर तीसरी कक्षा में चले जाते हैं और इस तरह छुट्टी तक पांचों कक्षाओं को पढ़ा देते हैं। मास्टर मुनीष कपूर इस स्कूल से पहले नूरेवाल में तैनात थे। 2009 में स्कूल में हेड की पोस्ट खाली हो गई थी। करीब ढाई साल पहले खानपुर का स्कूल बिल्कुल खाली हो गया था, तभी मुनीष कपूर को डेपुटेशन पर इस स्कूल में लगाया गया और पिछले ढाई साल से वह अकेले ही खानपुर स्कूल का कामकाज संभाल रहे हैं।
मामले को देखेंगे : डीईओ प्राइमरी
इस बारे में डीईओ प्राइमरी जसपाल सिंह का कहना है कि शिक्षा विभाग के अनुसार स्कूल को दो से ज्यादा अध्यापक नहीं मिल सकते। वे कोशिश करेंगे कि कुछ दिन में एक अध्यापक की नियुक्ति इस स्कूल में की जा सके। स्कूल में अगर चार पोस्ट खाली हैं तो स्कूल में बच्चों की संख्या भी बढ़ानी होगी। वह इस मामले में देखेंगे।
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स्कूल में हेडमास्टर के अलावा चार जेबीटी टीचरों की पोस्ट है लेकिन पिछले लंबे समय से स्कूल में एक ही टीचर मुनीष कपूर हैं। पहली कक्षा से लेकर पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा उन्हीं पर है। स्कूल में पांच कक्षाओं में कुल 34 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल को सुबह मास्टर मुनीष कपूर ही खोलते हैं, फिर अंदर चारों कमरों में झाड़ू लगाते हैं और मेज आदि साफ करते हैं। उसके बाद स्कूल में बच्चों के पीने के लिए पानी का प्रबंध करते हैं। एक पानी की टंकी लगाई हुई है, जिसमें रोजाना पानी भरने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।
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इसके बाद वे स्कूल की पांचों कक्षाओं को एक साथ पढ़ाते हैं। वहीं अगर इमरजेंसी में उनको छुट्टी करनी पड़ जाए तो स्कूल कौन खोलेगा, इसका कुछ अता पता नहीं है। बच्चे आते हैं और इंतजार कर लौट जाते हैं। अगर उन्हें प्लान के मुताबिक छुट्टी लेनी है तो वह आस-पास गांव के स्कूल के प्रिंसिपल को निवेदन करते हैं, जिसके बाद वहां पर अस्थायी रूप से मास्टर भेजा जाता है। वहीं जब उनसे पूछा गया कि वे चार कमरों में एक साथ पांच कक्षाओं को कैसे पढ़ाते हैं, तो उनका जवाब था सब मैनेज करना पड़ता है।
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पहले एक कक्षा को कुछ समय पढ़ाता हूं, उनको काम देकर अगली क्लास में चला जाता हूं। इसी तरह दूसरी क्लास में कुछ समय निकालने के बाद उनको काम देकर तीसरी कक्षा में चले जाते हैं और इस तरह छुट्टी तक पांचों कक्षाओं को पढ़ा देते हैं। मास्टर मुनीष कपूर इस स्कूल से पहले नूरेवाल में तैनात थे। 2009 में स्कूल में हेड की पोस्ट खाली हो गई थी। करीब ढाई साल पहले खानपुर का स्कूल बिल्कुल खाली हो गया था, तभी मुनीष कपूर को डेपुटेशन पर इस स्कूल में लगाया गया और पिछले ढाई साल से वह अकेले ही खानपुर स्कूल का कामकाज संभाल रहे हैं।
मामले को देखेंगे : डीईओ प्राइमरी
इस बारे में डीईओ प्राइमरी जसपाल सिंह का कहना है कि शिक्षा विभाग के अनुसार स्कूल को दो से ज्यादा अध्यापक नहीं मिल सकते। वे कोशिश करेंगे कि कुछ दिन में एक अध्यापक की नियुक्ति इस स्कूल में की जा सके। स्कूल में अगर चार पोस्ट खाली हैं तो स्कूल में बच्चों की संख्या भी बढ़ानी होगी। वह इस मामले में देखेंगे।