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घोटाला: पंजाब के गोदामों से 12 हजार करोड़ का गेहूं गायब
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 16 Apr 2016 01:29 AM IST
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गेहूं घोटाला
- फोटो : file photo
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से पंजाब के गोदामों से बारह हजार करोड़ का अनाज गायब होने के खुलासे की मार सूबे के किसानों पर पड़ी है। केंद्र सरकार ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने गेहूं की खरीद के लिए कैश क्रेडिट लिमिट मंजूर नहीं की है। इसके चलते मंडियों में किसानों को अदायगी नहीं हो पा रही है।
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आरबीआई ने पंजाब सरकार को लोन देने वाले सभी बैंकों को निर्देश दिए हैं कि पंजाब के गोदामों से बारह हजार करोड़ का अनाज गायब हो गया है। इस अनाज के आधार पर उन्होंने पंजाब सरकार को लोन दिया था। इसलिए वे जरूरी नुकसान का प्रावधान अपनी बैलेंस शीट में कर लें। माहिरों ने आशंका जताई है कि यह आंकड़ा बीस हजार करोड़ रुपये तक हो सकता है। इसे लेकर केंद्र सरकार के तेवर तीखे हो गए हैं।
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डियों में गेहूं की खरीद आधिकारिक तौर पर एक अप्रैल से शुरू हो गई है। बैसाखी के साथ गेहूं की आमद भी तेज हो गई है, लेकिन केंद्र ने अब तक इसकी खरीद के लिए कैश क्रेडिट लिमिट की पहली 22 हजार करोड़ की किस्त जारी नहीं की है। पंजाब की मंडियों में किसान धक्के खा रहे हैं। उन्हें गेहूं की अदायगी नहीं हो पा रही है। पंजाब के फूड सप्लाई विभाग के अधिकारी रोजाना दिल्ली चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनके हाथ कुछ नहीं लगा है। सरकार को उम्मीद है कि अगले बुधवार यानी 20 अप्रैल तक फंड जारी हो जाएंगे।
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घपला नहीं, 15 साल से अंतर जारी
पंजाब मंडी बोर्ड के वाइस चेयरमैन रविंदर चीमा ने कहा कि 12 हजार करोड़ का कोई घपला नहीं है। पंजाब सरकार और एफसीआई के अकाउंट्स में पिछले पंद्रह सालों से अंतर चला आ रहा है। हर साल यह अंतर और बढ़ जाता है। पंजाब सरकार ने केंद्र के समक्ष यह मुद्दा उठाया है कि एफसीआई जितना ट्रांसपोर्टेशन देती है, खर्च उससे कई गुना ज्यादा होता है।
जो अनाज खराब हो जाता है, उसका नुकसान भी एफसीआई पंजाब की खरीद एजेंसियों पर डाल देती है। अनाज सेंट्रल पूल के लिए खरीदा जाता है, इसलिए नुकसान केंद्र सरकार को भुगतना चाहिए। यही सारा पैसा बढ़ कर हजारों करोड़ हो गया है। सरकार केंद्रीय वित्त मंत्रालय के समक्ष पैरवी कर रही है। बुधवार तक फंड जारी हो सकता है।
कैप्टन अमरिंदर, प्रदेश कांग्रेस प्रधान के मुताबिक अकाली-भाजपा सरकार 9 साल से सिर्फ धोखेबाजी कर रही है। सरकार ने न सिर्फ वित्तीय संस्थाओं को झूठ बोलकर धोखा दिया, बल्कि किसानों को भी शिकार बनाया है। राज्य सरकार को बर्खास्त कर मामले की जांच होनी चाहिए।
संजय सिंह, पंजाब प्रभारी, आप ने कहा कि एसआईटी को राज्य व केंद्र सरकार, एफसीआई और बैंकों की भूमिका की जांच करनी चाहिए। जिन्होंने जानकारी होने के बावजूद इस मामले में कदम नहीं उठाया। सीएम प्रकाश सिंह बादल जवाब दें कि इतना भारी-भरकम भंडार कैसे और कहां गायब हुआ।