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चंडीगढ़ जंगलात विभाग में करोड़ों का फर्जीवाड़ा, 5 अफसरों पर लगे आरोप

Mon, 15 Jan 2018 04:17 PM IST
हरजीत सिंह/अमर उजाला, डेराबस्सी(मोहाली)
हरजीत सिंह/अमर उजाला, डेराबस्सी(मोहाली) Updated Mon, 15 Jan 2018 04:17 PM IST
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scam of billions in chandigarh forest department
करोड़ों का घोटाला
जंगलात विभाग में अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसमें करोड़ों रुपये की सरकारी फंडों का दुरुपयोग करना भी शामिल है। इस बारे में डेराबस्सी निवासी सतपाल सिंह ने विभाग को शिकायत दी थी, जिसकी जांच विभाग के मुख्य वन विभाग अधिकारी (हिल्स) हर्ष कुमार आईएफएस ने की थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में तीन आईएफएस, एक पीएफएस और डेराबस्सी के तत्काल रेंज अफसर सतपाल सिंह को आरोपी बनाया है।
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जांच रिपोर्ट में उक्त पांचों अधिकारियों पर मिलीभगत के साथ कथित तौर पर करोड़ों रुपये के घपले की बात सामने आई है। मुख्य जंगलात अधिकारी हर्ष कुमार (आईएफएस) ने जांच के दौरान विभाग के तीन उच्च अधिकारी और तत्काल वन रेंजर डेराबस्सी सतपाल सिंह पर मिलीभगत से करोड़ों रुपये के सरकारी फंडों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए इनके खिलाफ पुलिस केस दर्ज करने की सिफारिश की है।
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जांच रिपोर्ट में मुख्य जंगलात अधिकारी रतना कुमार (आईएफएस), राजेश चौधरी (आईएफएस) सहायक मुख्य जंगलात अफसर, महावीर सिंह (आईएफएस), तेजिंदर सिंह सैनी रिटायर वन मंडल अधिकारी, सतपाल सिंह तत्काल वन रेंजर डेराबस्सी के नाम शामिल हैं। जांच रिपोर्ट की कॉपी अमर उजाला के पास है। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि कैसे नगर परिषद की ओर से बनवाए जा रहे नेचर पार्कों में मिट्टी की परत डालने के लिए करीब 40 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया,
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जबकि मौके पर ट्रैक्टर से मिट्टी को इधर-उधर करके सिर्फ खानापूर्ति की गई है। गांव इस्सापुर और मेहमदपुर में फर्जी जंगलात समितियां बनाकर करीब 60 लाख रुपये का चूना लगाया गया, जबकि जांच के दौरान कोई समिति सामने नहीं आई। जाली सोलर सिस्टम के नाम पर 24 लाख 20 हजार रुपये की घपलेबाजी की गई, जबकि मौके पर इस तरह का कोई सिस्टम नजर नहीं आया। नियमों की अनदेखी कर राजपुरा की निजी नर्सरी से 4 लाख 35 हजार रुपये के पौधों की खरीद गई, जबकि मौके पर इस तरह के पौधे देखने को नहीं मिले।

अधिकारियों ने बिना मंजूरी के फर्जी चौकीदारों के नाम पर अपने रिश्तेदारों की जाली भर्ती दिखा विभाग को लाखों रुपये का चूना लगाया। इसके अलावा जाली कंपनियां बनाकर बिल करवाए गए। जांच में सामने आया कि गुरमुख सिंह से नेचर पार्कों में बीड़ दंदराला और रहतवाल बाग में काम करवाया गया, जिसमें मिट्टी की खरीद की गई और कुछ काम गुरमुख सिंह एंड कंपनी से करवाया गया। जबकि जांच में सामने आया कि दोनों एक ही हैं और कंपनी जाली है, जिसके बिल फर्जी बनाए गए हैं।

डेराबस्सी क्षेत्र में बनाए गए नेचर पार्कों के लिए ज्यादातर सामान की खरीद क्षेत्र से बाहर से दिखाई गई, जबकि यह सामान डेराबस्सी में भी आसानी से उपलब्ध है। सीमेंट की खरीद मोहाली से और बैंचों की खरीद पटियाला में की गई है। जिनपर ज्यादा खर्च किया गया है। डेराबस्सी जंगलात विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे करवाए गए हैं। इनमें सुखमणी डेंटल कॉलेज के पास, सरस्वती विहार, गांव मेहमदपुर, गांव दंदराला में अवैध रूप से आरा चलाया जा रहा था, ग्रीन इंडिया स्कीम के नाम पर कोई पौधा नहीं लगाया गया।

क्या कहते हैं अधिकारी
विभाग के मुख्य सचिव सतीश चंद्रा ने बताया कि जांच अधिकारी हर्ष कुमार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि उनकी जांच में उक्त अधिकारी शामिल नहीं हुए, इस कारण मामले की जांच विभाग के मुख्य जंगलात अधिकारी जतिंद्र शर्मा को देकर उक्त अधिकारियों का पक्ष सुनने के बाद विस्तार से रिपोर्ट बनाकर भेजने को कहा है। मुख्य जंगलात अधिकारी रतना कुमार (आईएफएस) ने बात करने पर कहा कि उनको ऐसी किसी जांच में बारे में जानकारी नहीं मिली है और न उनको जांच में बुलाया गया है।


जंगली क्षेत्र से अवैध माइनिंग व अवैध कटाई के मिले सबूत
जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि मौके पर जांच के दौरान पाया गया कि डेराबस्सी व जीरकपुर के जंगली क्षेत्र से अधिकारियों ने मिलीभगत कर अवैध रूप से कीमती पौधों की कटाई कर लकड़ी बेची। इसके अलावा जीरकपुर पीरमुछल्ला में अवैध रूप से अधिकारियों ने मिलीभगत कर रेत और मिट्टी की अवैध निकासी करवाई, जिससे विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। डेराबस्सी में उस समय रेंज अफसर रहे सतपाल सिंह ने कहा कि जब जांच अधिकारी मौके पर आए थे तो उनको कोई जानकारी नहीं दी गई।
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