अनुसूचित जाति आयोग का एतराज: पंजाब के नए सीएम के लिए न हो दलित शब्द का प्रयोग, संविधान का दिया हवाला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 21 Sep 2021 08:30 PM IST

सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के ग्वालियर बेंच की तरफ से जनवरी 2018 को एक मामले में निर्देश दिया था कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और इसके अधिकारी, कर्मचारी अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के लिए दलित शब्द का प्रयोग करने से परहेज करें, क्योंकि यह भारत के संविधान या किसी कानून में मौजूद नहीं है।
नवजोत सिद्धू और राहुल गांधी के साथ सीएम चरणजीत चन्नी।
नवजोत सिद्धू और राहुल गांधी के साथ सीएम चरणजीत चन्नी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को लेकर प्रयोग किए जाने वाले दलित शब्द पर अनुसूचित जाति आयोग ने कड़ा एतराज जताया है। आयोग ने कहा है कि व्यक्ति की पहचान दिखाने के लिए सभी को दलित शब्द से परहेज करना चाहिए। आयोग ने कहा है कि संविधान या किसी विधान में दलित शब्द का जिक्र नहीं मिलता है।
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आयोग की अध्यक्ष तजिंदर कौर ने कहा कि केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा पहले ही राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी मुख्य सचिवों को इस संबंधी निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के ग्वालियर बेंच की तरफ से जनवरी 2018 को एक मामले में निर्देश दिया था कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और इसके अधिकारी, कर्मचारी अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के लिए दलित शब्द का प्रयोग करने से परहेज करें, क्योंकि यह भारत के संविधान या किसी कानून में मौजूद नहीं है।


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उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि अनुसूचित जातियों से संबंधित व्यक्तियों के लिए दलित के बजाय अनुसूचित जाति शब्द का प्रयोग किया जाए। इस संबंधी विभिन्न मीडिया समूहों द्वारा किए जा रहे उल्लंघनों की रिपोर्टों पर कार्रवाई करते हुए सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनलों को नोटिस जारी करके उनको मुंबई हाईकोर्ट द्वारा पहले दिए गए आदेशों का पालन करते हुए रिपोर्टों में दलित शब्द का प्रयोग न करने के लिए कहा है।

आयोग पहले लिख चुका है पत्र
पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने 13 सितंबर, 2021 को मुख्य सचिव विनी महाजन को पत्र लिखकर जाति आधारित नामों वाले गांवों, कस्बों और अन्य स्थानों जिनके नामों में चमार, शिकारी आदि शामिल हैं, को बदलने और ऐसे शब्दों का प्रयोग करने से परहेज करने के लिए कहा था।

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