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अधूरा ख्वाब: मुक्केबाज अमित पंघाल के गुरु पर फिल्म बनाना चाहते थे सतीश कौशिक, दोस्त से सुनी थी कहानी

Fri, 10 Mar 2023 01:57 AM IST
ajay kumar भूपेंद्र आट्टा, अमर उजाला डिजिटल, हरियाणा
भूपेंद्र आट्टा, अमर उजाला डिजिटल, हरियाणा Published by: ajay kumar Updated Fri, 10 Mar 2023 01:57 AM IST
सार

सतीश कौशिक को हरियाणा से बहुत प्यार था। उन्होंने कहा था कि  मैं भी हरियाणा का रहने वाला हूं और हरियाणा सरकार ने मुझे हरियाणा फिल्म प्रमोशन बोर्ड का चेयरमैन बनाया है। इसके नाते भी मेरी जिम्मेदारी बनती है कि हरियाणा के टैलेंट को देश-विदेश तक पहुंचाऊं। अनिल ने देश को अमित पंघाल जैसा बॉक्सर दिया है।

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Satish Kaushik wanted to make a film on boxing coach Anil Dhankhar
Satish Kaushik - फोटो : रजा मुराद

विस्तार

मशहूर अभिनेता और निर्देशक सतीश कौशिक के अचानक निधन से हर कोई हैरान है। गुरुवार सुबह उनका एकाएक चले जाना हिंदी फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों के लिए सदमे की तरह रहा। उनके निधन के साथ उनका वह सपना भी चला गया, जिसमें उन्होंने हरियाणा के गांव के टैलेंट को राष्ट्रीय फलक पर ले जानी की सोची थी। 

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सतीश कौशिक हरियाणा के रोहतक के गांव शिमली निवासी मुक्केबाज अमित पंघाल के कोच अनिल धनखड़ के जीवन पर फिल्म बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अनिल धनखड़ से मुलाकात भी की थी और इसके बाद बातचीत भी होती रही। अमर उजाला से एक बातचीत में सतीश कौशिक ने बताया था कि उन्होंने अनिल धनखड़ की कहानी के बारे में एक लेखक दोस्त से सुना था। किस प्रकार अनिल ने विपरीत परिस्थितियों में गांव से टैलेंट को खोज निकाला। अनिल धनखड़ ने मुक्केबाजों की फौज तैयार की है। यही वजह है कि सतीश कौशिक अनिल के जीवन पर फिल्म बनाना चाहते थे।  मगर उनका यह सपना अधूरा रह गया।
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हरियाणा के टैलेंट को देश-विदेश में पहुंचाने की थी तमन्ना
सतीश कौशिक को हरियाणा से बहुत प्यार था। उन्होंने कहा था कि  मैं भी हरियाणा का रहने वाला हूं और हरियाणा सरकार ने मुझे हरियाणा फिल्म प्रमोशन बोर्ड का चेयरमैन बनाया है। इसके नाते भी मेरी जिम्मेदारी बनती है कि हरियाणा के टैलेंट को देश-विदेश तक पहुंचाऊं। अनिल ने देश को अमित पंघाल जैसा बॉक्सर दिया है। उन्होंने निस्वार्थ भाव से टैलेंट को तैयार किया है। ऐसा ही बहुत और भी टैलेंट हरियाणा में है।

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पॉजिटिव एनर्जी से थे भरपूर, हरियाणा से था बहुत प्यार
कोच अनिल धनखड़ ने बताया कि सतीश कौशिक बहुत ही मिलनसार और पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर व्यक्ति थे। 10 दिन पहले फोन पर बात हुई थी, तब भी कह रहे थे कि दिल्ली आकर फोन करेंगे और गांव में घूमने व लोगों से मिलने आएंगे। उन्होंने बताया कि सतीश कौशिक का इतने बड़े स्तर पर पहुंचकर भी जमीन से जुड़ाव था। कभी फोन नहीं भी उठा पाते तो वापस कॉल जरूर करते और बताते कि किसी वजह से फोन नहीं उठा पाया। अनिल कहते हैं कि सतीश हरियाणवियों से भी विशेष स्नेह रखते थे। उनका यूं अचानक चले जाना बेहद दुखद है। यह देश और प्रदेश के लिए बड़ी क्षति है। 

                                                 अनिल धनखड़ और सतीश कौशिक। 

ये हैं अनिल धनखड़
कोच अनिल धनखड़ ने 1999 में पंजाब के पटियाला से प्रशिक्षक का कोर्स कर रोहतक के जाट कॉलेज में मुक्केबाजी केंद्र बनाया। संस्थान ने उनको नौकरी दी तो यहीं पर एमफिल तक की पढ़ाई भी की। अनिल ने बताया कि पिता महावीर सिंह ने बैंक से सेवानिवृत्त होने पर 2003 में मायना में अकादमी बनाई। इसमें बच्चों को फ्री में कोचिंग दी, उनके पास न रिंग था न उस समय क्षेत्र में कोई मुक्केबाजी के प्रति रुझान था। इसके बावजूद उन्होंने क्षेत्र में मुक्केबाजों को तैयार करने का निर्णय लिया। जिन बच्चों ने उनके पास प्रशिक्षण लिया, उनमें से करीब 50 सरकारी नौकरी पा चुके हैं। प्रसिद्ध बॉक्सर अमित पंघाल और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता मनोज मलिक के कोच भी अनिल ही हैं। उनके प्रशिक्षण में बच्चों ने यूनिवर्सिटी लेवल पर लगातार छह बार ट्रॉफी जीती।

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