फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   saraswati river in yamunanagar special story 3

दुनिया में 5 जगह बहती रही है सरस्वती, चौंक गए न जानकर

Wed, 20 May 2015 07:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर Updated Wed, 20 May 2015 07:54 AM IST
विज्ञापन
saraswati river in yamunanagar special story 3

एक सरस्वती नदी पश्चिमी बंगाल के कोलकाता और इसके आसपास के इलाके में बहती है। गुगल मैप पर इसका पूरा रूट देखा जा सकता है। यह पंचराखी और बेनाभारुई के बीच से बैरकपुर नोवापाड़ा से होते हुए सप्तग्राम के पास जीटीरोड को पार करती है और आगे हुगली नदी में गिरती है। हुगली के पास इसका नाम जत्रासुदी हो जाता है।

विज्ञापन


अफगानिस्तान में भी सरस्वती
सरस्वती शब्द जो देवी के लिए है उसे सरसवंत विशेषण का स्त्रीभेद माना जाता है। सरसवंत का अर्थ है पवित्र जल का रखवाला या धारणकरने वाला। यह प्रोटो-इंडो-इरानी शब्द सरस-वत-ई जो सलस-उंत-इह से बना माना जाता है। इसका अर्थ है तालाबों से भरा और संस्कृत में भी सरस का एक अर्थ तालाब ही है।
विज्ञापन


अवेस्तां में जहां संस्कृत के स का उच्चारण ह है। इसे हरेक्सअती कहा गया। पारसी मिथकों में इसे दुनिया की नदी कहा गया है और भारतीय तथा इरानी में यह मिथक साझा है। अफगानिस्तान की मौजूदा हैरुत नदी का प्राचीन पारसी नाम हराउवती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

ऋग्वेद की सरस्वती, उत्तराखंड में भी सरस्वती

saraswati river in yamunanagar special story 3

ऋग्वेद के नदिस्तुति सूक्त के 10.75 मंत्र में दस नदियों को संबोधित किया गया है- ओ गंगा, यमुना, सरस्वती, शुतुद्री (सतलुज), परुष्णी (रावि) मेरी प्रशंसा करो। ओ असीक्नी (चिनाब), मरुद्वर्धा, वितस्ता (जेहलम), अर्जिकिया (ब्यास) व सुशोमा (सिंधु) के साथ सुनो।

इस मंत्र में सरस्वती को यमुना और सतलुज के बीच में रखा गया है, इसलिए कुछ विद्वान यह मानते हैं कि नदियों के नाम पूर्व से पश्चिम की ओर से पुकारे गए हैं। इससे वे निष्कर्ष निकालते हैं कि सरस्वती नदी यमुना से पश्चिम और सतलुज के पूर्व में इन दोनों के बीच बहती थी, मगर आप पूरे मंत्र को देखें तो सभी नदियों के नाम इसी दिशा क्रम में नहीं हैं। यदि उच्चारण इस क्रम में था तो सतलुज के बाद ब्यास का नाम होना चाहिए था।

उत्तराखंड के एक हिस्से में यह माना जाता है कि सरस्वती नदी बंदरपुंछ (सरस्वती-रूपिन ग्लेशियर) से पश्चिमी गढ़वाल के नैतवार से निकलती है। आज भी यह नदी माना पास के पास से बहती हुई मान गांव से तीन किलोमीटर की दूरी पर अलकनंदा में मिलती है। उससे आगे यह धारा अलकनंदा में ही देवप्रयाग में भागीरथी से मिलती हुई गंगा का रूप ले लेती है।

इलाहाबाद के संगम में भी सरस्वती
हिंदुओं में यह एक मान्य मिथक है कि प्रयागराज के संगम में गंगा और यमुना के साथ सरस्वती की विलुप्त धारा का संगम होता है। इस संगम स्थल पर पूजा का विशेष महत्त्व भी बताया जाता है। हर साल हजारों हिंदू यहां तीनों नदियों की पूजा करते हैं। वहां भी माना जाता है कि सरस्वती यहां विलुप्त धारा में प्रकट होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed