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12 साल तक सरकारी नौकरी के लिए भटका, अब दुबई में तिरंगा पकड़ दौड़ता है ये शख्स

Wed, 12 Apr 2017 09:31 AM IST
जितेंद्र शर्मा /अमर उजाला, पठानकोट
जितेंद्र शर्मा /अमर उजाला, पठानकोट Updated Wed, 12 Apr 2017 09:31 AM IST
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Sarabjit from Punjab, running with tricoloured in Dubai
विदेश में ड्राइवर है गोल्ड मेडलिस्ट
12 साल तक एक सरकारी नौकरी के लिए एक शख्स सड़कों पर भटकता रहा, लेकिन अब वो दुबई की सड़कों पर तिरंगा पकड़ दौड़ता दिखाई पड़ता है। विदेश में रहने के बावजूद नेशनल स्कूल गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुके पंजाब के सरबजीत सिंह के अंदर देशप्रेम का जज्बा अब भी बरकरार है। आज वे भले ही दुबई में ड्राइवर के तौर पर नौकरी करते हों, लेकिन वहां अक्सर होनी वली मैराथन सरीखी दौड़ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना नहीं भूलते।
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सरबजीत कहते हैं कि वह भले ही विदेश में रहें, लेकिन उनका दिल भारत में बसता है। इसी वजह से वे जब भी किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं, हाथ में तिरंगा पकड़ना नहीं भूलते। सरबजीत सिंह को इसी बात का मलाल है कि भारत में रहते हुए वे 12 साल तक सरकारी नौकरी पाने को तरसते रहे।
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मजबूर होकर उन्हें विदेश में ड्राइवर की नौकरी करनी पड़ी। हालांकि इससे पूर्व नौकरी पाने के लिए उन्होंने सीएम के अलावा दो मंत्रियों और खेल विभाग से जुड़े अफसरों से भी गुहार लगाई, मगर हर बार उन्हें आश्वासन के सिवाय और कुछ नहीं मिला।
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Sarabjit from Punjab, running with tricoloured in Dubai
विदेश में ड्राइवर है गोल्ड मेडलिस्ट - फोटो : अमर उजाला
सरबजीत साल 1989 में नेशनल स्कूल गेम्स में हैंड बॉल के गोल्ड मेडलिस्ट हुए। वे पठानकोट में पला बढ़ा है, लेकिन अब उसका परिवार गुरदासपुर के आदर्श नगर में शिफ्ट हो चुका है। सरबजीत सिंह ने बताया कि वह हैंडबॉल के खिलाड़ी थे। 

कभी करनी पड़ी थी चौकीदार की नौकरी 
साल 1989 में दिल्ली में हुईं नेशनल स्कूल गेम्स के दौरान दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल अर्जन सिंह ने उन्हें गोल्ड मेडल से नवाजा था। बाद में नौकरी न मिलने की वजह से उन्हें पेट्रोल पंप पर काम करना पड़ा।

साल 1990 से लेकर 2002 के दौरान वह पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह, शिक्षा मंत्री पंजाब खुशहाल बहल, खेल मंत्री पंजाब मोहिंदर केपी सिंह तथा डायरेक्टर स्पोर्ट्स पंजाब से भी मिले, पर नौकरी नहीं मिली। ऐसे हालात में उन्हें गुरदासपुर में चौकीदार और माली के तौर पर भी नौकरी करनी पड़ी। आखिरकार 2002 में वह दुबई चले गये।
 

दुबई में जीत चुके हैं 25 मेडल

Sarabjit from Punjab, running with tricoloured in Dubai
विदेश में ड्राइवर है गोल्ड मेडलिस्ट
सरबजीत ने कहा कि दुबई में हर साल होने वाली मैराथन में वह हाथ में तिरंगा पकड़ कर ही दौड़ते हैं। वह अब तक 25 मेडल जीत चुके हैं। सरबजीत का मानना है कि भारत में क्रिकेट की ही तरह दूसरे खेलों को भी तवज्जो मिलनी चाहिए। 
 
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