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मां-बेटी और उसका प्रेमी दरबार में पहुंचे तो खुली साधु की 'पोल', जानिए कैसे?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 08 Nov 2016 11:47 PM IST
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टैगोर थिएटर में संस्कृत नाटक हास्य चूड़ामणि का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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टैगोर थिएटर में सात्विक आर्ट सोसाइटी द्वारा आयोजित रंग संचार 2016 थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन मंगलवार को नाटक हास्य चूड़ामणि का मंचन किया गया। इसे भोपाल के विहान ड्रामा वर्क्स ग्रुप के कलाकारों ने पेश किया।
डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस नाटक में लोगों को पाखंडी साधुओं से बचने का संदेश दिया गया। नाटक में दिखाया गया कि ज्ञानराशि नाम का एक साधु अपनी जादू टोने की विद्या से आम लोगों को मूर्ख बनाता है। एक बार ज्ञानराशि साधु अपने चेलों के साथ एक नगरी में आता है जहां उसे मदन सुंदरी नाम की एक लड़की से प्यार हो जाता है। उसे पाने के लिए साधु जादू टोना करता है, लेकिन उसके चेले ताबीज में मदन सुंदरी का नाम लिखने की बजाए उसकी मां का नाम लिख देते हैं।
जिस कारण मदन सुंदरी की जगह उसकी मां साधु की ओर आकर्षित हो जाती है और यहीं से ही कॉमेडी नाटक नया मोड़ ले लेता है। अंत में जब मदन सुंदरी, उसकी मां और उसका प्रेमी साधु के दरबार में एक साथ जाते हैं तो साधु की पोल खुल जाती है। नाटक में हिंदी भाषा के साथ-साथ बुंदेली टच भी मिलता है।
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12वीं शताब्दी में लिखा था नाटक
हास्य चूड़ामणि नाटक 12वीं शताब्दी में महामात्य वत्सराज ने संस्कृत भाषा में लिखा था। हिंदी भाषा में नाटक का अनुवाद संगीता गुंदेचा ने किया था। सौरभ अनंत के निर्देशन में मंगलवार को इस नाटक का 13वीं बार मंचन किया गया। नाटक की विशेषता इसके लाइव म्यूजिक में थी, जिसका निर्देशन हेमंत देवलेकर ने किया।
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डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस नाटक में लोगों को पाखंडी साधुओं से बचने का संदेश दिया गया। नाटक में दिखाया गया कि ज्ञानराशि नाम का एक साधु अपनी जादू टोने की विद्या से आम लोगों को मूर्ख बनाता है। एक बार ज्ञानराशि साधु अपने चेलों के साथ एक नगरी में आता है जहां उसे मदन सुंदरी नाम की एक लड़की से प्यार हो जाता है। उसे पाने के लिए साधु जादू टोना करता है, लेकिन उसके चेले ताबीज में मदन सुंदरी का नाम लिखने की बजाए उसकी मां का नाम लिख देते हैं।
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जिस कारण मदन सुंदरी की जगह उसकी मां साधु की ओर आकर्षित हो जाती है और यहीं से ही कॉमेडी नाटक नया मोड़ ले लेता है। अंत में जब मदन सुंदरी, उसकी मां और उसका प्रेमी साधु के दरबार में एक साथ जाते हैं तो साधु की पोल खुल जाती है। नाटक में हिंदी भाषा के साथ-साथ बुंदेली टच भी मिलता है।
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12वीं शताब्दी में लिखा था नाटक
हास्य चूड़ामणि नाटक 12वीं शताब्दी में महामात्य वत्सराज ने संस्कृत भाषा में लिखा था। हिंदी भाषा में नाटक का अनुवाद संगीता गुंदेचा ने किया था। सौरभ अनंत के निर्देशन में मंगलवार को इस नाटक का 13वीं बार मंचन किया गया। नाटक की विशेषता इसके लाइव म्यूजिक में थी, जिसका निर्देशन हेमंत देवलेकर ने किया।