{"_id":"5b221e514f1c1baa6e8b7ad8","slug":"sanjeev-chaturvedi-related-documents-missed-government-transfered-complainant","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"संजीव चतुर्वेदी से जुड़े दस्तावेज गायब होने की शिकायतकर्ता पर गिरी गाज...तबादला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संजीव चतुर्वेदी से जुड़े दस्तावेज गायब होने की शिकायतकर्ता पर गिरी गाज...तबादला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 14 Jun 2018 01:21 PM IST
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आईएफएस संजीव चतुर्वेदी और वन घोटाले से जुड़े दस्तावेज गायब होने के मामले में शिकायतकर्ता अधीक्षक राजेंद्र सिंह पर ही गाज गिर गई है। उनका तबादला कर दिया गया है और इसका कोई कारण नहीं बताया गया है। हालांकि, इसे पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में सीएम कार्यालय को जिम्मेदार ठहराने से जोड़कर देखा जा रहा है।
दस्तावेज गायब होने के मामले में वन ब्रांच के अधीक्षक राजेंद्र सिंह छिल्लर ने ही चंडीगढ़ पुलिस के पास डीडीआर दर्ज कराई थी। मंगलवार को ही यह सार्वजनिक हुआ था और बुधवार को राजेंद्र सिंह का तबादला तुरंत प्रभाव से प्रधान सचिव कार्यालय की वन ब्रांच से पशुपालन शाखा में कर दिया गया। उनकी जगह पशु पालन ब्रांच के उप अधीक्षक अजय कुमार कुकरेजा वन ब्रांच का जिम्मा संभालेंगे।
पूर्व हुड्डा सरकार में वन विभाग में घोटाले को उजागर करने वाले आईएफएस संजीव चतुर्वेदी के मामले की फाइल की कुछ नोटिंग गायब हो चुकी हैं। आरटीआई में इसका खुलासा होने के बाद अधीक्षक राजेंद्र सिंह ने पुलिस में फाइल गायब होने की शिकायत दी थी। शिकायत में वन विभाग ने नोटिंग गायब होने के लिए सीएमओ को जिम्मेदार ठहराया था। जिससे नाराज सरकार ने शिकायतकर्ता अधीक्षक को उनके पद से हटा दिया है।
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दस्तावेज गायब होने के मामले में वन ब्रांच के अधीक्षक राजेंद्र सिंह छिल्लर ने ही चंडीगढ़ पुलिस के पास डीडीआर दर्ज कराई थी। मंगलवार को ही यह सार्वजनिक हुआ था और बुधवार को राजेंद्र सिंह का तबादला तुरंत प्रभाव से प्रधान सचिव कार्यालय की वन ब्रांच से पशुपालन शाखा में कर दिया गया। उनकी जगह पशु पालन ब्रांच के उप अधीक्षक अजय कुमार कुकरेजा वन ब्रांच का जिम्मा संभालेंगे।
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पूर्व हुड्डा सरकार में वन विभाग में घोटाले को उजागर करने वाले आईएफएस संजीव चतुर्वेदी के मामले की फाइल की कुछ नोटिंग गायब हो चुकी हैं। आरटीआई में इसका खुलासा होने के बाद अधीक्षक राजेंद्र सिंह ने पुलिस में फाइल गायब होने की शिकायत दी थी। शिकायत में वन विभाग ने नोटिंग गायब होने के लिए सीएमओ को जिम्मेदार ठहराया था। जिससे नाराज सरकार ने शिकायतकर्ता अधीक्षक को उनके पद से हटा दिया है।
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याचिका वापस लेने की सिफारिश की, फिर लड़ते रहे केस
आईएफएस संजीव चतुर्वेदी मामले में हरियाणा सरकार द्वारा केंद्र के खिलाफ याचिका वापस लेने की सिफारिश के बावजूद एजी ऑफिस को दो साल केस के पक्ष में हाईकोर्ट में लड़ना पड़ा। सिफारिश सीएम के निर्णय के लिए भेजी गई थी लेकिन फैसला तो नहीं हुआ परंतु फाइल के कई हिस्से सीएमओ से गायब हो गए। जब संजीव चतुर्वेदी के आरटीआई में जानकारी मांगी तो दस्तावेजों के खो जाने की शिकायत पुलिस को दी गई है।
एजी आफिस ने अपनी सिफारिशों में कहा था कि संजीव चतुर्वेदी के खिलाफ चार्जशीट रद्द करने के राष्ट्रपति के आदेशों को हरियाणा सरकार स्वीकार कर चुकी है। लेकिन घोटाले की सीबीआई जांच की सिफारिश से इनकार कर दिया है। सीबीआई जांच का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए हाईकोर्ट में याचिका को आगे बढ़ाना गैरजरूरी है।
दरअसल, हरियाणा कैडर के आईएफएस संजीव चतुर्वेदी ने विभाग में कुछ धांधली उजागर की थी। इसके बाद उनके खिलाफ शिकायतें दी गईं। जिनके आधार पर संजीव को चार्जशीट कर दिया गया। इसके खिलाफ आईएफएस ने केंद्र सरकार से शिकायत की और वहां से जांच के लिए दो सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई थी। इसी दौरान राष्ट्रपति ने उनके खिलाफ कार्रवाई रद्द करने के आदेश जारी कर दिए थे।
केंद्र सरकार की दो सदस्यीय कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मंत्री किरण चौधरी और आईएएस केशनी आनंद आरोड़ा के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद चतुर्वेदी के खिलाफ चार्जशीट खारिज करने के आदेशों, कमेटी के गठन और सीबीआई जांच की केंद्र सरकार की सिफारिश को चुनौती देते हुए हरियाणा सरकार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी थी।
एजी आफिस ने अपनी सिफारिशों में कहा था कि संजीव चतुर्वेदी के खिलाफ चार्जशीट रद्द करने के राष्ट्रपति के आदेशों को हरियाणा सरकार स्वीकार कर चुकी है। लेकिन घोटाले की सीबीआई जांच की सिफारिश से इनकार कर दिया है। सीबीआई जांच का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए हाईकोर्ट में याचिका को आगे बढ़ाना गैरजरूरी है।
दरअसल, हरियाणा कैडर के आईएफएस संजीव चतुर्वेदी ने विभाग में कुछ धांधली उजागर की थी। इसके बाद उनके खिलाफ शिकायतें दी गईं। जिनके आधार पर संजीव को चार्जशीट कर दिया गया। इसके खिलाफ आईएफएस ने केंद्र सरकार से शिकायत की और वहां से जांच के लिए दो सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई थी। इसी दौरान राष्ट्रपति ने उनके खिलाफ कार्रवाई रद्द करने के आदेश जारी कर दिए थे।
केंद्र सरकार की दो सदस्यीय कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मंत्री किरण चौधरी और आईएएस केशनी आनंद आरोड़ा के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद चतुर्वेदी के खिलाफ चार्जशीट खारिज करने के आदेशों, कमेटी के गठन और सीबीआई जांच की केंद्र सरकार की सिफारिश को चुनौती देते हुए हरियाणा सरकार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी थी।
पहले फाइलें दबीं रहीं और दस्तावेज गायब
चतुर्वेदी ने हरियाणा सरकार द्वारा केंद्र के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़े दस्तावेजों की मांग की थी। उन्होंने आरटीआई डालकर याचिका दाखिल करने के लिए हरियाणा सरकार व गवर्नर के बीच संवाद व नोटिंग की प्रति मांगी थी। साथ ही उन्होंने पूछा था कि 2016 में एजी हरियाणा ने केस वापस लेने की सिफारिश की थी उसका क्या हुआ।
गवर्नर ने इस मामले में मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी। इन सभी फाइलों के ट्रेस न हो पाने की बात कही गई थी। अप्रैल में जब यह मामला सुर्खियों में आया तो आनन-फानन में बैठक कर विभाग को फाइलें जल्द से जल्द वापस लाने के निर्देश दिए गए इसके बाद वन विभाग के अधिकारी ने पुलिस को फाइलें खोने की शिकायत सौंप दी।
सीएमओ को लिया घेरे में
शिकायत के अनुसार जो भी फाइलें थीं उन्हें एजी ऑफिस से पूरी नोटिंग के साथ सीएम कार्यालय को सौंपी थी। सीएम को इस बारे में निर्णय लेना था। लेकिन जब फाइल वापस एजी कार्यालय को मिली तो नोटिंग व अन्य पत्राचार गायब मिले। सारा ठीकरा सीएमओ पर फोड दिया गया है।
गवर्नर ने इस मामले में मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी। इन सभी फाइलों के ट्रेस न हो पाने की बात कही गई थी। अप्रैल में जब यह मामला सुर्खियों में आया तो आनन-फानन में बैठक कर विभाग को फाइलें जल्द से जल्द वापस लाने के निर्देश दिए गए इसके बाद वन विभाग के अधिकारी ने पुलिस को फाइलें खोने की शिकायत सौंप दी।
सीएमओ को लिया घेरे में
शिकायत के अनुसार जो भी फाइलें थीं उन्हें एजी ऑफिस से पूरी नोटिंग के साथ सीएम कार्यालय को सौंपी थी। सीएम को इस बारे में निर्णय लेना था। लेकिन जब फाइल वापस एजी कार्यालय को मिली तो नोटिंग व अन्य पत्राचार गायब मिले। सारा ठीकरा सीएमओ पर फोड दिया गया है।