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सीट का समीकरण: नए दिग्गजों को सिर आंखों पर बिठाता रहा है संगरूर, पंजाब की राजनीति पर लंबे अरसे से है दबदबा

Wed, 08 May 2024 03:35 PM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, संवाद, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब)
सुशील कुमार, संवाद, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 08 May 2024 03:35 PM IST
सार

संगरूर से इस बार आप ने अपने मंत्री गुरमीत मीत हेयर को उतारा है। वहीं कांग्रेस ने अपने फायर ब्रांड नेता सुखपाल खैरा को टिकट दिया है। उनके सामने सांसद सिमरनजीत सिंह मान भी मैदान में हैं। 

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Sangrur dominated Punjab politics for long time seat analysis for loksabha election
गुरमीत मीत हेयर, सिमरनजीत सिंह मान और सुखपाल खैरा। - फोटो : फाइल

विस्तार

बड़े उलटफेर के अलावा संगरूर संसदीय सीट का इतिहास नए चेहरों को सिर आंखों पर बिठाने का रहा है। नए दिग्गजों को संगरूर ने कभी मायूस नहीं किया है और उन्हें संसद भवन में पहुंचाता रहा है। 
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दिलचस्प पहलू यह है कि यहां से सांसद निर्वाचित होने के बाद तीन सियासी धुरंधर तो पंजाब के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हो गए। इसके अलावा संगरूर संसदीय सीट से चुनाव जीतने वाले दो नेता, केंद्र में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। इस बार भी कई नए दिग्गज चेहरे चुनाव मैदान में हैं और देखना होगा कि संगरूर किस नेता को संसद की सीढ़ियां चढ़ाएगा।
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शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज नेता दिवंगत सुरजीत सिंह बरनाला 1977 में संगरूर संसदीय सीट से सांसद निर्वाचित हुए थे और 29 सितंबर 1985 को बरनाला ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि, सुरजीत सिंह बरनाला, मुख्यमंत्री रहने के बाद भी लगातार दो बार सांसद निर्वाचित हुए और केंद्र में मंत्री भी रहे। कुछ ऐसा ही इतिहास वर्तमान मुख्यमंत्री भगवंत मान के नाम पर दर्ज है। लगातार दो बार 2014 और 2019 में संगरूर संसदीय सीट से सांसद निर्वाचित होने के बाद भगवंत मान 16 मार्च 2022 को पंजाब के मुख्यमंत्री बन गए। संगरूर जिले से भगवंत मान तीसरे नेता हैं, जो मुख्यमंत्री बने हैं। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद सुखदेव सिंह ढींडसा, हाई प्रोफाइल पोर्टफोलियो के साथ अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे और 2004 में संगरूर से लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। यहां से चुनाव जीतने वाले बलवंत सिंह रामूवालिया भी केंद्र में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।
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सूबे की राजनीति पर संगरूर का दबदबा
पंजाब की राजनीति पर संगरूर का लंबे अरसे से दबदबा रहा है। संगरूर की बीबी राजिंदर कौर भट्ठल भी पंजाब की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। 21 नवंबर 1996 को बीबी भट्ठल ने मुख्यमंत्री की शपथ ली थी। बीबी भट्ठल संसदीय सीट का हिस्सा लहरागागा विधानसभा सीट से लगातार पांच बार चुनाव जीत चुकी हैं। संगरूर से दो नेता, पंजाब के वित्त मंत्री बने हैं। अकाली भाजपा सरकार में परमिंदर सिंह ढींडसा के बाद आप के हरपाल सिंह चीमा वर्तमान में वित्त मंत्री हैं।


सांसद, कैबिनेट मंत्री, विधायक मैदान में 
संगरूर सीट से वर्तमान सांसद सिमरनजीत सिंह मान के अलावा दो विधायक (बरनाला से आप के मीत हेयर जो कैबिनेट मंत्री भी हैं और भुलत्थ से कांग्रेस के सुखपाल सिंह खैरा) चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं। अकाली दल ने पूर्व विधायक इकबाल सिंह झूंदा पर दांव खेला है और बसपा ने डाॅक्टर मक्खन सिंह को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने फिलहाल अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। वोटरों के अलावा विपक्षी दलों की नजर भी भाजपा के फैसले पर टिकी है। बहरहाल, नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और मतदान में तीन सप्ताह का समय है, लेकिन संगरूर में मुकाबला तिकोना बनता दिखाई दे रहा है। भाजपा के मैदान में आने के बाद स्थिति थोड़ी साफ होने की संभावना है।
 
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