समझौता ब्लास्ट मामलाः 23 लोगों में चार की हुई थी शिनाख्त, 19 कब्रों को आज भी पहचान का इंतजार
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दिल्ली से पाकिस्तान के लाहौर के बीच आवागमन करने वाली अटारी लिंक एक्सप्रेस (समझौता) धमाके में मारे गए 23 लोगों के शवों की शिनाख्त नहीं हुई थी। इसके चलते सभी शवों को पानीपत के गांव महराना के कब्रिस्तान में दफना दिया गया था।
इससे पहले शवों की शिनाख्त के लिए थल सेना के विशेषज्ञों ने हड्डी के सैंपल लिए थे और धमाके में लापता हुए लोगों के परिजनों के खून के सैंपल लेकर डीएनए टेस्ट के लिए हैदराबाद लैब भेजे थे। समय बीतने के साथ मात्र चार मृतकों के शवों की शिनाख्त ही हुई जबकि 19 शवों की शिनाख्त अभी तक नहीं हुई।
गांव सिवाह के सरपंच पहलवान खुशदिल कादियान ने बताया कि गांव सिवाह के ग्रामीणों ने अपनी जान पर खेल कर समझौता ब्लास्ट के घायलों को अपने वाहनों से अस्पताल पहुंचाया था। वहीं तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने गांव सिवाह को रेलवे मंत्रालय की ओर से विकास के लिए दस लाख रुपये की ग्रांट देने की घोषणा की थी और धमाके में मारे गए लोगों की याद में पार्क बनाने का वादा किया था लेकिन रेलवे ने गांव सिवाह से किए गए वादे को नहीं निभाया।
क्या था आतंकियों का मंसूबा
जांच में यह स्थापित हुआ कि समझौता एक्सप्रेस 18 फरवरी 2007 को रात 10 बज कर 50 मिनट पर दिल्ली से अपने गंतव्य अटारी (पंजाब) के लिए निकली। रात 11 बजकर 53 मिनट पर हरियाणा में पानीपत के पास दिवाना स्टेशन से गुजरते हुए इसके दो जनरल डिब्बों (जीएस 03431 और जीएस 14857) में दो बम धमाके हुए जिससे इन डिब्बों में आग लग गई।
इस हादसे में चार अधिकारियों समेत कुल 68 लोगों की मौत हुई और 12 लोग घायल हुए। धमाके के बाद इसी ट्रेन के अन्य डिब्बे से बम से लैस दो सूटकेस बरामद हुए। इनमें से एक को डिफ्यूज कर दिया गया जबकि दूसरे को नष्ट किया गया था।
शुरुआती जांच में यह पता चला कि ये सूटकेस मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित कोठारी मार्केट में अभिनंदन बैग सेंटर के बने थे जिसे अभियुक्त ने 14 फरवरी 2007 को खरीदा था। यानी कि हमले से ठीक चार दिन पहले एनआईए की जांच में यह भी पता चला कि जिन लोगों ने हमला किया वो देश के विभिन्न मंदिरों पर हुए चरमपंथी हमलों से भड़के हुए थे।
कई बार बाधित हुई समझौता एक्सप्रेस ट्रेन सेवा
पहली बार इस ट्रेन का परिचालन 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए चरमपंथी हमले के बाद रोका गया। 1 जनवरी 2002 से लेकर 14 जनवरी 2004 तक दोनों देशों के बीच यह ट्रेन नहीं चली। इसके बाद 27 दिसंबर 2007 को पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के बाद एक बार फिर इस ट्रेन का परिचालन रोक दिया था।
8 अक्तूबर 2012 को पुलिस ने दिल्ली आ रही इस ट्रेन से वाघा बॉर्डर पर 100 किलो प्रतिबंधित हेरोइन और 500 राउंड कारतूस बरामद किया था। 28 फरवरी 2019 को एक बार फिर दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए इसे रोक दिया गया था।