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हादसे में पिता अपंग, परिवार का सहारा बनी बेटी, मंदिर में बजाती है नगाड़ा
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 06 Sep 2016 09:47 AM IST
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बहादुर बेटी नेहा, जो मंदिर में नगाड़ा बजाती है
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इस बहादुर बेटी को सेल्यूट कीजिए। ये अपने परिवार के लिए वो काम कर रही है, जिसके लिए बड़े हौंसले की जरूरत होती है। पढ़िए दिलचस्प कहानी।
ये कहानी है 18 साल की नेहा की। पिता मंदिर में नगाड़ा बजाते थे। एक हादसा हुआ तो उनका उनका चलना-फिरना बंद हो गया। वे बिस्तर पर थे। इलाज में काफी पैसा खर्च हो चुका था। ऐसे में पैसे की कमी हो गई और घर चलाना मुश्किल।
नेहा ने कदम बढ़ाते हुए पिता का काम संभाल लिया और मंदिर में नगाड़ा बजाने लगी। हिमाचल स्थित शक्तिपीठ ज्वाला देवी मंदिर में नेहा ने दो साल तक नगाड़ा बजाया। घर को चलाया, खुद भी पढ़ी और भाई-बहनों को भी पढ़ाया। पिता का इलाज कराया।
नेहा कहती हैं कि मंदिर में पिछली पांच पीढ़ियों से हमारे परिवार में नगाड़ा बजाने का काम किया जा रहा है इसलिए मैंने यही काम चुना। इधर, पैसे की कमी से घर चलाना भी मुश्किल हो रहा था। पापा के अलावा घर में कमाने वाला और कोई नहीं था तो ये काम करना ही था।
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ये कहानी है 18 साल की नेहा की। पिता मंदिर में नगाड़ा बजाते थे। एक हादसा हुआ तो उनका उनका चलना-फिरना बंद हो गया। वे बिस्तर पर थे। इलाज में काफी पैसा खर्च हो चुका था। ऐसे में पैसे की कमी हो गई और घर चलाना मुश्किल।
नेहा ने कदम बढ़ाते हुए पिता का काम संभाल लिया और मंदिर में नगाड़ा बजाने लगी। हिमाचल स्थित शक्तिपीठ ज्वाला देवी मंदिर में नेहा ने दो साल तक नगाड़ा बजाया। घर को चलाया, खुद भी पढ़ी और भाई-बहनों को भी पढ़ाया। पिता का इलाज कराया।
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नेहा कहती हैं कि मंदिर में पिछली पांच पीढ़ियों से हमारे परिवार में नगाड़ा बजाने का काम किया जा रहा है इसलिए मैंने यही काम चुना। इधर, पैसे की कमी से घर चलाना भी मुश्किल हो रहा था। पापा के अलावा घर में कमाने वाला और कोई नहीं था तो ये काम करना ही था।
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