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वेतन में विसंगतियों से शिक्षकों में हड़कंप
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 03 Jan 2014 06:19 PM IST
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रायपुरानी खंड में तैनात शिक्षकों के वेतन में अजीब विसंगतियां हैं। हाल ही में खंड शिक्षा कार्यालय मोरनी द्वारा अध्यापकों को इनकम टैक्स कटौती से संबंधित वेतन सूची भेजी गई, जिससें पता चला कि एक ही विद्यालय में कई अध्यापकों को पहाड़ी भत्ता दिया जा रहा है, कई को नहीं।
यही हाल अन्य स्कूलों का भी है। हालांकि, अध्यापकों को पहाड़ी भत्ता बंद करने या पुन: लागू करने के लिए विभाग का कोई आदेशपत्र कार्यालय में नहीं है।
वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी मोरनी उर्मिल रोहिला ने बताया कि यह तो क्लरिकल मिस्टेक है। हम इसकी रिकवरी कर लेंगे।
रोहिला ने बताया कि कार्यालय में कोई क्लर्क नियुक्त नहीं है। सारा काम अध्यापकों से करवाना पड़ता है। इसलिए वह एक-एक अध्यापक का वेतन चेक नहीं कर पाती हैं।
वहीं, पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी सुजाता राणा ने भी इस विसंगति पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि वह इस बाबत वर्तमान अधिकारी से बात करेंगी।
पहाड़ी भत्ता में उलझे
मोरनी खंड के सभी सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को सरकार 400 रुपये प्रति माह पहाड़ी भत्ते के रूप में देती रही है, लेकिन मार्च 2011 से कुछ विद्यालयों में पहाड़ी भत्ता देना बंद कर दिया गया था। शिक्षा अधिकारी उर्मिल रोहिला का कहना है कि ये स्कूल मैदानी इलाके में हैं और इनकी पंचायत भी दूसरे खंड में आती है।
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अध्यापक रामरतन, बलराम, राजेश कुमार, कीर्ति वर्मा, वीर बहादुर व जमशीद मुहम्मद ने बताया कि कई वर्ष पहले शिक्षा विभाग द्वारा सी. डी. ब्लाकबनाए गए थे।
उस सूची में कई विद्यालयों का खंड बदला गया था और पहाड़ी भत्ता मिलना शुरू हो गया था। आरोप है कि मार्च 2011 से अधिकारी ने अपनी मनमर्जी से कई अध्यापकों को पहाड़ी भत्ता देना बंद कर दिया था।
उधर, निदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार, सी. डी. ब्लाकविद्यालय शिक्षा सर्वेक्षण में क्षेत्रीय कार्य करने व आंकड़ों के सारणी के लिए बनाए गए थे। इनका खंड विकास कार्यालय से कोई लेनादेना नहीं है।
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यही हाल अन्य स्कूलों का भी है। हालांकि, अध्यापकों को पहाड़ी भत्ता बंद करने या पुन: लागू करने के लिए विभाग का कोई आदेशपत्र कार्यालय में नहीं है।
वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी मोरनी उर्मिल रोहिला ने बताया कि यह तो क्लरिकल मिस्टेक है। हम इसकी रिकवरी कर लेंगे।
रोहिला ने बताया कि कार्यालय में कोई क्लर्क नियुक्त नहीं है। सारा काम अध्यापकों से करवाना पड़ता है। इसलिए वह एक-एक अध्यापक का वेतन चेक नहीं कर पाती हैं।
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वहीं, पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी सुजाता राणा ने भी इस विसंगति पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि वह इस बाबत वर्तमान अधिकारी से बात करेंगी।
पहाड़ी भत्ता में उलझे
मोरनी खंड के सभी सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को सरकार 400 रुपये प्रति माह पहाड़ी भत्ते के रूप में देती रही है, लेकिन मार्च 2011 से कुछ विद्यालयों में पहाड़ी भत्ता देना बंद कर दिया गया था। शिक्षा अधिकारी उर्मिल रोहिला का कहना है कि ये स्कूल मैदानी इलाके में हैं और इनकी पंचायत भी दूसरे खंड में आती है।
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अध्यापक रामरतन, बलराम, राजेश कुमार, कीर्ति वर्मा, वीर बहादुर व जमशीद मुहम्मद ने बताया कि कई वर्ष पहले शिक्षा विभाग द्वारा सी. डी. ब्लाकबनाए गए थे।
उस सूची में कई विद्यालयों का खंड बदला गया था और पहाड़ी भत्ता मिलना शुरू हो गया था। आरोप है कि मार्च 2011 से अधिकारी ने अपनी मनमर्जी से कई अध्यापकों को पहाड़ी भत्ता देना बंद कर दिया था।
उधर, निदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार, सी. डी. ब्लाकविद्यालय शिक्षा सर्वेक्षण में क्षेत्रीय कार्य करने व आंकड़ों के सारणी के लिए बनाए गए थे। इनका खंड विकास कार्यालय से कोई लेनादेना नहीं है।