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Punjab: श्री हजूर साहिब प्रबंधक बोर्ड में संशोधन का विरोध, SGPC ने लिखा पत्र, शिअद ने की फैसले की निंदा

Thu, 08 Feb 2024 05:19 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी/अमर उजाला, अमृतसर/चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी/अमर उजाला, अमृतसर/चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 08 Feb 2024 05:19 PM IST
सार

श्री हजूर साहिब प्रबंधक बोर्ड में संशोधन का विरोध होने लगा है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), श्री अकाल तख्त साहिब और अकाली दल ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले की निंदा की। इन्होंने फैसले को सिखों के धार्मिक मामलों में सीधा हस्ताक्षेप करार दिया। एसजीपीसी प्रधान ने महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे को इस मामले में एक पत्र लिखा है। 

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SAD and SGPC oppose Maharashtra government move to reconstitute Sri Hazur Sahib board
हरजिंदर सिंह धामी, एकनाथ शिंदे व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह। - फोटो : फाइल

विस्तार

तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ गुरुद्वारा मैनेजमेंट बोर्ड में सिख संगठनों के सदस्यों की संख्या कम करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने एतराज जताया। एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार की यह कार्रवाई बहुत दुखद और निंदनीय है। इस मामले को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर आपत्ति जताई है। साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए मुलाकात का समय मांगा है।

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एडवोकेट धामी ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट ने तख्त श्री हजूर साहिब प्रबंधक बोर्ड अधिनियम में मनमाना संशोधन सिख गुरुद्वारा व्यवस्थाओं में सीधा हस्तक्षेप है। नांदेड़ गुरुद्वारा बोर्ड में सिख संगठनों के सदस्यों के प्रतिनिधित्व का उद्देश्य तख्त साहिब और संबंधित सिख गुरुधामों की गरिमा को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी और धार्मिक तरीके से बोर्ड के कामकाज को सुनिश्चित करना है। 
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धामी ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का गुरुद्वारा बोर्ड में सरकार द्वारा मनोनीत सदस्यों की संख्या बढ़ाने और सिख संगठनों के सदस्यों की संख्या कम करने का निर्णय सीधे तौर पर सिख गुरुधामों पर कब्जा करने की कार्रवाई है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। धामी ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से सिख गुरुधामों के प्रबंधन में बढ़ते सरकारी हस्तक्षेप और श्री हजूर साहिब गुरुद्वारा बोर्ड अधिनियम 1956 के उल्लंघन को तुरंत रोकने की अपील की है।

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महाराष्ट्र सरकार की धक्केशाही नहीं करेंगे सहन: ज्ञानी रघबीर सिंह

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ प्रबंधन बोर्ड के अधिनियम में मनमाने ढंग से संशोधन किया गया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के नामित सदस्यों की संख्या कम कर दी गई है। महाराष्ट्र सरकार की इस धक्केशाही को सहन नहीं किया जाएगा। 
ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि सिख पंथ किसी भी कीमत पर अपने पवित्र तीर्थ स्थलों की व्यवस्था में सरकारी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं कर सकता है। उन्होंने शिरोमणि कमेटी को आदेश दिया है कि वह तख्त श्री हजूर साहिब प्रशासनिक बोर्ड के एक्ट में मनमाने ढंग से बदलाव के मामले पर महाराष्ट्र सरकार से बातचीत कर सिख विरोधी फैसले को वापस लेने की व्यवस्था करे।

शिअद ने कहा- यह सिख धार्मिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार के फैसले की निंदा की और आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र सरकार के फैसले से सिखों के हितों को नुकसान पहुंचा है। शिअद के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि यह कदम सिख धार्मिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप है और इसे तत्काल रदद किया जाना चाहिए। डॉ. चीमा ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने बोर्ड के कुल 17 सदस्यों में से 12 को सीधे नामित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। इस फैसले से एसजीपीसी द्वारा भेजे गए सदस्यों की संख्या चार से घटाकर दो कर दी गई है। यहां तक कि प्रमुख खालसा दीवान और हजूरी सचखंड दीवान का नामांकन भी समाप्त कर दिया गया है। 

उन्होंने कहा कि इसी तरह दो सिख सांसद, जो बोर्ड के सदस्य हुआ करते थे, उन्हें भी नए संशोधन में इस अधिकार से वंचित कर दिया गया है। डॉ. चीमा ने कहा कि ऐसा लगता है कि एकनाथ शिंदे सरकार मनमाने ढ़ंग से गुरुद्वारा बोर्ड का नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहती है। इसे सिख संगत कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

सुखदेव ढींडसा ने भी फैसले की निंदा की

शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) ने भी महाराष्ट्र सरकार के फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। पार्टी प्रधान सुखदेव सिंह ढींडसा ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि ऐसा करके महाराष्ट्र सरकार ने सीधे तौर पर सिखों के मामलों में दखलअंदाजी की है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को संशोधन करने से पहले सिख कौम की मिनी पार्लियामेंट एसजीपीसी और अन्य सिख विद्वानों के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए था। ढींडसा ने महाराष्ट्र की शिंदे सरकार से संशोधन तुरंत वापस लेने की अपील और कहा कि इस संशोधन से गुरुद्वारा बोर्ड पर महाराष्ट्र सरकार का पूरा कब्जा हो जाएगा। इससे सिखों में भारी रोष है।

यह है मामला

महाराष्ट्र सरकार ने तख्त श्री हजूर साहिब प्रबंधक बोर्ड (नांदेड) अधिनियम में संशोधन किया है। इसमें मनोनीत सदस्यों की संख्या में इजाफा किया गया है। वहीं प्रबंधकीय बोर्ड में एसजीपीसी के चार सदस्यों से संख्या घटाकर दो कर दी गई है। संशोधित विधेयक के अनुसार मौजूदा बोर्ड में कुल सदस्यों की संख्या 17 होगी। इनमें 12 सदस्य सरकार मनोनीत करेगी। वहीं दो सदस्य एसजीपीसी से मनोनीत होंगे। शेष तीन सदस्यों का चयन चुनाव प्रक्रिया से होगा। पहले सरकार से मनोनीत होने वाले सदस्यों की संख्या सात थी।

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