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SAD BJP Alliance: छह चुनाव गठबंधन के साथ लड़ी शिअद, तीन बार सरकार बनाई, इस बार BJP से अलायंस का गणित गड़बड़ाया
Fri, 20 Mar 2026 12:27 PM IST
Sharukh Khan
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Sharukh Khan
Updated Fri, 20 Mar 2026 12:27 PM IST
सार
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) छह चुनाव गठबंधन के साथ लड़ी। इस दौरान तीन बार सरकार भी बनाई। इस बार केंद्रीय मंत्री अमित शाह के संकेत के बाद भाजपा से गठबंधन का गणित गड़बड़ा गया है।
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सुखबीर बादल और पीएम नरेंद्र मोदी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
साल 1997 से 2022 तक के विधानसभा चुनाव में पंजाब की सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) गठबंधन के साथ ही चुनाव लड़ती आई है। इस दौरान शिअद गठबंधन ने तीन बार सूबे में सरकार भी बनाई।
अब साल 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी गठबंधन चाहती है मगर मोगा रैली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अकेले चुनाव लड़ने के संकेत के बाद शिअद का भाजपा से गठबंधन का गणित गड़बड़ा गया है। इसके चलते पार्टी के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार शिअद इस बार अपने पुराने सहयोगी दल भाजपा से गठबंधन करना चाहती थी। इसके लिए शिअद ने प्रयास भी किए थे। शिअद के वरिष्ठ नेता भी 2027 में जीत के लिए इस गठबंधन को दबी जुबान से जरूरी बता रहे थे मगर सूत्र बताते हैं कि मामला सीटों के बंटवारे और सीएम व डिप्टी सीएम के पद पर अटका हुआ है।
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अब साल 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी गठबंधन चाहती है मगर मोगा रैली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अकेले चुनाव लड़ने के संकेत के बाद शिअद का भाजपा से गठबंधन का गणित गड़बड़ा गया है। इसके चलते पार्टी के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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पार्टी सूत्रों के अनुसार शिअद इस बार अपने पुराने सहयोगी दल भाजपा से गठबंधन करना चाहती थी। इसके लिए शिअद ने प्रयास भी किए थे। शिअद के वरिष्ठ नेता भी 2027 में जीत के लिए इस गठबंधन को दबी जुबान से जरूरी बता रहे थे मगर सूत्र बताते हैं कि मामला सीटों के बंटवारे और सीएम व डिप्टी सीएम के पद पर अटका हुआ है।
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शिअद भी फिलहाल झुकने को तैयार नहीं था और भाजपा भी। इसी बीच अमित शाह के अकेले चुनाव लड़ने के संकेतों के बाद शिअद अब नए समीकरणों की संभावनाओं को खंगालने में जुट गया है।
वहीं शिअद से गठबंधन के मुद्दे पर भाजपा में भी दो धड़े हैं। वरिष्ठ नेताओं का एक धड़ा गठबंधन की पैरवी करता है तो दूसरा अकेले दम पर चुनाव लड़ने का दम भरता है। शिअद को इस बात का आभास है कि पिछले कुछ समय से गिरते जा रहे पार्टी के ग्राफ को उठाने के लिए उन्हें एक मजबूत सहयोगी सियासी दल की जरूरत है।
दलित वोट बैंक पर भी शिअद की नजर
शिरोमणि अकाली दल पंथक मतदाताओं को अपना कोर वोट बैंक मानता है, इसके लिए वे पूरा जोर भी लगा रहा है। ग्रामीण अंचलों के मतदाताओं पर भी शिअद ने अपना फोकस बढ़ाया है।
शिरोमणि अकाली दल पंथक मतदाताओं को अपना कोर वोट बैंक मानता है, इसके लिए वे पूरा जोर भी लगा रहा है। ग्रामीण अंचलों के मतदाताओं पर भी शिअद ने अपना फोकस बढ़ाया है।
इसके अलावा शिअद की नजर दलित वोट बैंक पर भी है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में इसके लिए शिअद ने बहुजन समाज पार्टी से हाथ भी मिलाया था मगर इसका खास सियासी फायदा नहीं हुआ। शिअद इस बार भी बसपा को साथ लेकर चल सकता है।
शिअद के लिए फायदेमंद रहा भाजपा से गठजोड़
- साल 2022 के विधानसभा चुनाव में शिअद ने बसपा से गठबंधन किया। शिअद को 3 व बसपा को 1 सीट मिली।
- साल 2017 में शिअद ने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। शिअद को 15 व भाजपा को 3 सीटें मिलीं।
- साल 2012 का चुनाव शिअद ने भाजपा के साथ मिलकर लड़ा। शिअद ने 56 और भाजपा ने 12 सीटें जीतकर सरकार बनाई।
- साल 2007 में भाजपा ही शिअद की सियासी साथ बनी। शिअद ने 48 और भाजपा ने 19 सीटों पर कब्जा जमाकर सत्ता पाई।
- साल 2002 के विधानसभा चुनाव के दौरान शिअद ने भाजपा के साथ-साथ डेमोक्रेटिक बहुजन समाज मोर्चा के साथ गठबंधन किया। शिअद को 41 व भाजपा को 3 सीटें मिलीं। मोर्चा का खाता तक नहीं खुला।
- साल 1997 के चुनाव में शिअद ने 75 सीटें और सहयोगी दल भाजपा ने 18 सीटें जीती और सरकार बनाई।