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Punjab: बर्खास्त IPS आशीष कपूर को हाईकोर्ट से मिली जमानत, भ्रष्टाचार मामले में विजिलेंस ने किया था गिरफ्तार

Tue, 30 May 2023 07:51 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 30 May 2023 07:51 PM IST
सार

याची पक्ष की ओर से दलील दी गई कि रिश्वत के पैसे चेक के रूप में लिए गए जो विश्वास करने लायक नहीं है। इसके साथ ही इस मामले में चार साल बाद एफआईआर दर्ज की गई जिसके लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका मंजूर करते हुए उन्हें नियमित जमानत का लाभ दे दिया।

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Sacked IPS Ashish Kapoor got bail from the High Court
आशीष कपूर। - फोटो : फाइल

विस्तार

भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार व बर्खास्त आईपीएस आशीष कपूर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उनकी नियमित जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है। पंजाब विजिलेंस ने बर्खास्त एआईजी आशीष कपूर के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत एफआईआर दर्ज की थी। मामला 2016 का है जब वह सेंट्रल जेल अमृतसर में अधीक्षक थे। 

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आरोप के अनुसार एक महिला अपनी मां, भाई और भाभी के साथ जीरकपुर के एक थाने में पुलिस रिमांड में थी। तब आशीष कपूर वहां आए और महिला की मां को आश्वासन दिया कि वह अदालत से उनकी जमानत और बरी करने की व्यवस्था करेंगे। आशीष कपूर ने जीरकपुर के तत्कालीन एसएचओ पवन कुमार और एएसआई हरजिंदर सिंह की मिलीभगत से प्रीति को निर्दोष घोषित कर दिया।

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आरोप के अनुसार इसके बदले उन्हें एक करोड़ की रिश्वत मिली थी। इस राशि को विभन्नि चेकों के माध्यम से अलग-अलग खातों में जमा करवाया गया। इस मामले में विजिलेंस ने उनके साथ ही एसएचओ पवन और एएसआई हरजिंदर को भी गिरफ्तार किया था।

याची पक्ष की ओर से दलील दी गई कि रिश्वत के पैसे चेक के रूप में लिए गए जो विश्वास करने लायक नहीं है। इसके साथ ही इस मामले में चार साल बाद एफआईआर दर्ज की गई जिसके लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका मंजूर करते हुए उन्हें नियमित जमानत का लाभ दे दिया।

अभियोजन की मंजूरी न मिलना बड़ा कारण
याचिका को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता साढ़े सात माह से जेल में है और ट्रायल जल्द पूरा होने वाला प्रतीत नहीं होता। एक आरोपी के बारे में अभियोजन की मंजूरी न मिलने के चलते अभी तक चार्ज फ्रेम नहीं किए जा सके हैं। ऐसे में किसी को अनिश्चित काल के लिए हिरासत में रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे में हाईकोर्ट ने याची को जमानत दे दी है जिसमें अभियोजन की मंजूरी न मिलना बड़ा कारण रहा।

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