पंजाब विधानसभा में हंगामा: सीएम ने मजीठिया को नशा कारोबारी कहा, अकाली-कांग्रेसी आमने-सामने, हाथापाई की नौबत
कांग्रेस की तरफ से मंत्री राजा वड़िंग, परगट सिंह, सुखजिंदर रंधावा, कुलजीत नागरा और अन्य सदस्य अकालियों से उलझे। वहीं अकाली दल की तरफ से बिक्रम मजीठिया सबसे आगे रहे।
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पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के आखिरी दिन सदन में उस समय जबरदस्त हंगामा हो गया जब मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अकाली दल के विक्रम सिंह मजीठिया के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। मुख्यमंत्री सदन में कृषि कानूनों संबंधी बिल पर जवाब दे रहे थे। एक घंटा 25 मिनट तक सदन में चले इस घटनाक्रम के दौरान स्पीकर ने आपत्तिजनक टिप्पणी को कार्यवाही से हटवा दिया, लेकिन अकाली सदस्य वेल में डटे रहे, जिसके चलते स्पीकर ने सभी अकाली सदस्यों को नेम कर दिया।
सदन में मुख्यमंत्री की मजीठिया पर टिप्पणी के तुरंत बाद अकाली सदस्य मुख्यमंत्री की कुर्सी की तरफ आए तो कांग्रेसी सदस्य भी अपनी सीटों से उठकर आगे आ गए। उन्होंने मुख्यमंत्री को उनकी सीट पर बैठा दिया और उनके चारों तरफ घेरा बनाकर अकाली सदस्यों को पीछे धकेलने लगे।
दोनों ओर से सदस्यों के बीच हाथापाई होती भी दिखाई दी। इस दौरान दोनों तरफ से अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी हुआ। मामले को शांत करने के लिए स्पीकर को पांच बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। एक घंटा 25 मिनट तक स्थगित रही कार्यवाही के दौरान स्पीकर ने अकाली सदस्यों को अपने चैंबर में बुलाकर मामले को शांत करना चाहा लेकिन सफलता नहीं मिली।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही अकाली दल के पवन टीनू ने कांग्रेस से माफी की मांग की, जिस पर कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा उन्हें धमकाते हुए वेल में पहुंच गए। उन्हें अन्य कांग्रेस सदस्यों ने समझाकर शांत किया लेकिन तब तक अकाली दल के सभी सदस्य फिर से वेल में पहुंच गए और सरकार से माफी की मांग करने लगे।
उन्हें सीटों पर जाने का किया बार-बार आग्रह भी जब बेअसर रहा तो स्पीकर राणा केपी सिंह ने कहा कि वह बड़े भारी मन से विधानसभा के इस अंतिम सत्र से सभी अकाली दल के सदस्यों को नेम करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने सदन की कार्यवाही एक बार फिर 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
इसके बाद अकाली सदस्यों ने पहले तो विधानसभा परिसर स्थित अपने कार्यालय में बैठक की और जोर-जबरदस्ती से दोबारा सदन में प्रवेश का प्रयास किया। दो गेटों पर अकालियों के प्रयास को मार्शल ने असफल कर दिया, जिसके बाद सभी अकाली दल विधानसभा परिसर से बाहर चले गए।
सिद्धू और मजीठिया में बहस
इससे पहले सदन में कृषि कानूनों संबंधी प्रस्ताव पर बहस में हिस्सा लेते हुए जब नवजोत सिंह सिद्धू ने अकाली दल पर केंद्र की सरकार के साथ मिलकर कानून पारित करने का आरोप लगाया तो अकाली दल के बिक्रम सिंह मजीठिया ने उनके आरोपों के जवाब में कांग्रेस द्वारा लाए गए कानूनों का हवाला दिया। इसे लेकर सिद्धू और मजीठिया के बीच बहस हो गई जो जल्दी ही हंगामे में बदल गई। शोर-शराबे के बीच सिद्धू ने बोलना जारी रखा, जबकि अकाली सदस्य अपनी सीटों पर खड़े होकर सिद्धू और कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
मुख्यमंत्री ने सदन में अकालियों को आड़े हाथ लिया
मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि शिअद ने राज्यों को और अधिक अधिकार देने, चंडीगढ़ को पंजाब के हवाले करने के अलावा श्री आनंदपुर साहिब के प्रस्ताव जैसे पंजाब के अहम मुद्दों को हमेशा राजनीति के संकुचित नजरिए से देखा है। मुख्यमंत्री ने अकालियों पर बरसते हुए कहा कि वह एक जरिया हैं, जिसके द्वारा आरएसएस, जो हमेशा ही पंजाब के हितों के साथ खेलता रहा है, राज्य में अपनी पकड़ बनाने में कामयाब हुआ।
चन्नी ने पंजाब पर ऐसे फैसले थोपने के लिए अकालियों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि जब आरएसएस और इसके राजनीतिक विंग भाजपा ने धारा-370 को रद्द कर देश के संघीय ढांचे को चोट पहुंचाई तो अकालियों ने न सिर्फ भाजपा का पक्ष लिया, बल्कि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल भी इस कदम के हक में बोले और यहां तक कि इस गैर-लोकतांत्रिक कदम के खिलाफ वोट भी नहीं डाली।
उन्होंने अकालियों को सत्ता के भूखे लोग करार दिया, जो लोगों के मसलों के नाम पर कोलाहल करते रहे लेकिन सत्ता में आने पर हमेशा आंखें बंद कर लेते हैं। अकाली दल को इस्तेमाल कर फेंकने की नीति अपनाने वाली पार्टी बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालियों ने सत्ता में आने के लिए बसपा के साथ हाथ मिलाया और केंद्र में भाजपा के सत्ता में आने पर बसपा को छोड़ दिया।