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Ludhiana: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पहुंचे लुधियाना, कहा-देश को नुकसान पहुंचा रहीं समाज को बांटने वाली ताकतें
Mon, 11 Sep 2023 10:16 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 11 Sep 2023 10:16 AM IST
सार
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत कड़ी सुरक्षा के बीच भैणी साहिब पहुंचे और उन्होंने सतगुरु उदय सिंह के साथ बंद कमरे में बैठक भी की। भागवत शनिवार शाम करीब 7 बजे दिल्ली से ट्रेन से लुधियाना पहुंचे थे और यहां फिरोजपुर रोड स्थित माधव भवन में रुके थे। भागवत ने अपने दौरे में भारतीय जनता पार्टी के किसी भी नेता से मुलाकात नहीं की।
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लुधियाना में श्री भैणी साहिब पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया के कई देश भारत की ओर देख रहे हैं, क्योंकि भारत सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखता है। वह लुधियाना से लगभग 30 किलोमीटर दूर नामधारी समुदाय के मुख्यालय भैणी साहिब में सतगुरु प्रताप सिंह और माता भूपिंदर कौर की स्मृति में नामधारी मिशन की ओर से आयोजित एक धर्मसभा में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि भारत का काम संतुलन बनाना है। यह अपनी भूमिका बहुत अच्छे से निभा रहा है। भारत सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास करता है।
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भागवत ने कहा कि समाज को बांटने वाली ताकतें न केवल देश को बल्कि दुनिया को भी नुकसान पहुंचा रहीं हैं और उनसे मिलकर लड़ना चाहिए। भारत को पूरी दुनिया को नई राह दिखानी है, साथ ही अपनी परंपराओं, संस्कृति और विरासत को भी आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि धर्म का अर्थ जोड़ना है, यह तोड़ने की बात नहीं करता। समाज में आज भी कई बुराइयां फैली हुई हैं। हमें देश की एकता और अखंडता को बरकरार रखना है। बुरी शक्तियों को आगे बढ़ने से रोकना होगा। नशे जैसी बुराई को भी दूर करना होगा।
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सतगुरु उदय सिंह से की चर्चा
इस अवसर पर नामधारी समुदाय के सतगुरु उदय सिंह भी उपस्थित थे। इससे पहले आरएसएस प्रमुख कड़ी सुरक्षा के बीच भैणी साहिब पहुंचे और उन्होंने सतगुरु उदय सिंह के साथ बंद कमरे में बैठक भी की। भागवत शनिवार शाम करीब 7 बजे दिल्ली से ट्रेन से लुधियाना पहुंचे थे और यहां फिरोजपुर रोड स्थित माधव भवन में रुके थे।
कूका आंदोलन का देश की आजादी में बड़ा योगदान
श्री भैणी साहिब में भागवत ने कीर्तन का श्रवण भी किया। इसके बाद उन्होंने देश की आजादी में कूका आंदोलन के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कूका आंदोलन ने देश आजादी में बड़ी भूमिका अदा की। सतगुरु राम सिंह जी की प्रेरणा से लोगों ने अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी। वहीं, नामधारी समुदाय ने सामाजिक बुराइयां दूर करने का काम किया।
भाजपा नेताओं से नहीं की मुलाकात
भागवत ने अपने दौरे में भारतीय जनता पार्टी के किसी भी नेता से मुलाकात नहीं की। लुधियाना के सिविल लाइंस नजदीक माधव सदन में वह सिर्फ राष्ट्रीय सेवक संघ के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों से मिले।
12 अप्रैल, 1857 को हुई थी कूका आंदोलन की शुरुआत
स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कूका आंदोलन का बड़ा महत्व है। इसकी कमान नामधारी समुदाय के सतगुरु राम सिंह के हाथों में थी। 12 अप्रैल, 1857 को लुधियाना के करीब भैणी साहिब में सफेद रंग का स्वतंत्रता का ध्वज फहराकर कूका आंदोलन की शुरुआत हुई। सतगुरु राम सिंह के अनुयायी नाम सिमरन में लीन रहते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाते थे। अंग्रेजों के खिलाफ हुंकार (कूक) के कारण उन्हें कूका के नाम से जाना जाने लगा। इस आंदोलन में सभी वर्गों के साधारण लोग शामिल थे। सतगुरु राम सिंह जी ने लोगों में न सिर्फ आत्म सम्मान, देशप्रेम और भक्ति को जगाया, बल्कि समाज में पनपी बुराइयों के खिलाफ एक जंग भी छेड़ी। लोगों में स्वाभिमान चेतना जागृत की। कूका में लोगों ने आजादी के लिए कुर्बानियां भी दीं। उनकी याद में श्री भैणी साहिब में गुरुद्वारा बनाया गया है। जहां दूर-दूर से लोग माथा टेकने आते हैं।