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नोएडा में 3700 करोड़ की महाठगी, हरियाणा सरकार ने लोगों को दी नसीहत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 13 Feb 2017 09:26 AM IST
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अभिनव मित्तल
- फोटो : File Photo
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नोएडा में एबलेज कंपनी की 37 सौ करोड़ रुपये की ठगी के बाद हरियाणा सरकार सतर्क हो गई है। सरकार ने प्रदेश के लोगों को आगाह किया है कि वे लुभावने वाले करने वाली इस तरह की कंपनियों व संस्थाओं के झांसे में न आएं। हरियाणा वित्त एवं ऋण नियंत्रण विभाग ने इसे लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने के साथ ही वर्तमान कानूनों के तहत सजा के प्रावधान का भी हवाला दिया है।
विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि ऐसी योजनाओं के प्रोमोटर या तो अपने वादों को पूरा नहीं करते या एकत्र धन को लेकर फरार हो जाते हैं। कई मामलों में ऐसी योजना के प्रोमोटरों के विरुद्घ कानूनी कार्रवाई कर उन्हें सजा दिलाने में काफी समय लग जाता है।
केंद्र तथा राज्य सरकारों ने अनेक कानून बनाए हैं, जो लोगों से पैसा लेने को विनियमित करते हैं तथा जालसाज लोगों को जनता के साथ धोखाधड़ी करने से रोकते हैं। इनमें चिट फंड अधिनियम 1982, भारतीय रिर्जव बैंक अधिनियम 1934, एसएसईबीआई अधिनियम 1992, कंपनी अधिनियम 2013 और जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून शामिल हैं।
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धोखाधड़ी के मामले में दोषी प्रत्येक अधिकारी को सात साल कैद या 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसे दो करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। जानबूझकर की गई चूक के मामले में कानून के तहत उसे अधिक सजा दी जा सकती है। किसी भी जमा योजना में निवेश करने से पूर्व कंपनी की वित्तीय स्थिति की जांच जरूर करें।
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विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि ऐसी योजनाओं के प्रोमोटर या तो अपने वादों को पूरा नहीं करते या एकत्र धन को लेकर फरार हो जाते हैं। कई मामलों में ऐसी योजना के प्रोमोटरों के विरुद्घ कानूनी कार्रवाई कर उन्हें सजा दिलाने में काफी समय लग जाता है।
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केंद्र तथा राज्य सरकारों ने अनेक कानून बनाए हैं, जो लोगों से पैसा लेने को विनियमित करते हैं तथा जालसाज लोगों को जनता के साथ धोखाधड़ी करने से रोकते हैं। इनमें चिट फंड अधिनियम 1982, भारतीय रिर्जव बैंक अधिनियम 1934, एसएसईबीआई अधिनियम 1992, कंपनी अधिनियम 2013 और जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून शामिल हैं।
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धोखाधड़ी के मामले में दोषी प्रत्येक अधिकारी को सात साल कैद या 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसे दो करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। जानबूझकर की गई चूक के मामले में कानून के तहत उसे अधिक सजा दी जा सकती है। किसी भी जमा योजना में निवेश करने से पूर्व कंपनी की वित्तीय स्थिति की जांच जरूर करें।