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पीजीआई: मरीजों के लिए बनाए कमरों में 'खेल'

Wed, 15 Jan 2014 12:29 PM IST
आशीष वर्मा
आशीष वर्मा Updated Wed, 15 Jan 2014 12:29 PM IST
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Rooms were for patients, but gave to contractors
पीजीआई के मरीजों को नेहरू सराय में कमरे नहीं मिल रहे। मरीजों की लंबी वेटिंग है। मजबूरन मरीजों को खुले आसमान के नीचे सोना पड़ रहा है। जांच में पता चला है कि नेहरू सराय में कुल 48 कमरे हैं, लेकिन इनमें से 25 कमरे ही मरीजों को दिए जा रहे हैं। बाकी बचे 21 कमरों के लिए खेल चल रहा है।
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इनमें से कुछ कमरे समाजसेवी संस्था को दिए तो कुछ कमरे संस्थान के ठेकेदारों को। मरम्मत के नाम पर भी कुछ कमरों पर ताले लगा दिए गए हैं। कुल मिलाकर इन कमरों का भी उपयोग मरीजों के लिए किया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
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इसका सबसे ज्यादा खामियाजा उन मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जो इस सर्दी में खुले आसमान के नीचे सोने पर मजबूर हैं। यदि ये कमरे मरीजों को मिल जाते तो उन्हें बाहर नहीं सोना पड़ता। फिलहाल इस बारे में पीजीआई प्रशासन के पास कोई जवाब नहीं है। इस पर चुप्पी साध ली गई है।
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मरीजों की लंबी वेटिंग
बताया जा रहा है कि पीजीआई में नेहरू सराय के कमरे को लेने के लिए भी मरीजों की लंबी वेटिंग है। यहां पर हरियाणा-पंजाब के अलावा उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और बिहार से भी काफी मरीज आते हैं। इनमें से कई मरीजों का इलाज रेगुलर चलता है।

ऐसे में वहां से बार-बार आ पाना संभव नहीं होता। इतने ज्यादा रुपये भी नहीं होते कि वे चंडीगढ़ में धर्मशाला या होटल में रुके सके। ऐसे में उनके लिए नेहरू सराय के कमरे सबसे बेहतर होते हैं, लेकिन यहां पर पूरे साल कमरे बुक रहते हैं। लोगों को सिर्फ वेटिंग ही मिलती है, क्योंकि आधे से ज्यादा कमरे अन्य कामों के लिए बुक रहते हैं।

ठेकेदारों को किराए पर चढ़ा दिए कमरे
पीजीआई में कांट्रैक्ट कर्मचारियों के ठेकेदारों को कमरे देने की प्रथा पिछले कई दिनों से चल रही है। बताया जा रहा है कि इन ठेकेदारों को किराए पर कमरे दिए गए हैं। उनसे महीने के हिसाब से रुपये वूसले जा रहे हैं।


हालांकि, मरीजों से भी रुपये लिए जाते हैं। ठेकेदारों को कमरे देने विरोध किया जा रहा है। पीजीआई के कांट्रैक्ट कर्मचारियों का कहना है कि मरीजों को परेशानी आ रही है, लेकिन उन्हें कमरा देने के बजाए प्राइवेट ठेकेदारों को दे दिया गया है, जो सही नहीं। कांट्रैक्ट कर्मचारियों को भी कमरा चाहिए था, लेकिन उन्हें न देकर प्राइवेट कर्मचारियों को दे दिया गया।
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