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जाट आरक्षण मामलाः प्रोफेसर विरेंद्र, मान सिंह व जयदीप को बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती

Wed, 15 Jan 2020 01:35 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Wed, 15 Jan 2020 01:35 AM IST
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Rohtak police challenged the verdict of the local court in the High Court
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा के मामले में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रोफेसर विरेंद्र सिंह, दलाल खाप के तत्कालीन प्रवक्ता कैप्टन मान सिंह व कांग्रेस के पूर्व ग्रामीण जिला अध्यक्ष जयदीप धनखड़ को क्लीन चिट देने के स्थानीय अदालत के फैसले को रोहतक पुलिस ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसके लिए जिला प्रशासन के माध्यम से भेजी गई अर्जी मंगलवार को कोर्ट में दाखिल की गई। अब हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई की तिथि तय की जाएगी।  

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याद रहे कि फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें न केवल 30 लोग मारे गए, बल्कि करोड़ों की संपत्ति भी तोड़फोड़ व आगजनी की भेंट चढ़ गई थी। हिंसा से पहले एक ऑडियो वायरल हुआ था। इसमें पूर्व सीएम हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रोफेसर विरेंद्र सिंह व दलाल खाप के तत्कालीन प्रवक्ता कप्तान मान सिंह आपस में बातचीत कर रहे थे। 
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24 फरवरी 2016 को भिवानी निवासी कैप्टन पवन ने सिविल लाइन थाने में प्रोफेसर विरेंद्र सिंह व मान सिंह के खिलाफ देशद्रोह, हिंसा की साजिश रचने सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कराया था। मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई थी। इसके बाद आरोपी बनाए गए प्रोफेसर विरेंद्र ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सरेंडर कर दिया था। बाद में जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत ने प्रोफेसर विरेंद्र सिंह को जमानत पर रिहा कर दिया था।

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 जांच आगे बढ़ने पर कांग्रेस की ग्रामीण इकाई के पूर्व जिला अध्यक्ष जयदीप धनखड़ को भी आरोपी बनाया गया था। इतना ही नहीं, पुलिस ने मामले में कई लोगों से पूछताछ की। साथ ही 2016 से 2019 तक मामले की जांच पड़ताल चली। जांच के बाद पुलिस ने तीन साल बाद एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में करीब 500 पेज की चार्जशीट दाखिल की, लेकिन अदालत ने 6 दिसंबर 2019 को दोनों पक्षों की बहस के बाद प्रोफेसर विरेंद्र सिंह, मान सिंह दलाल व जयदीप धनखड़ के खिलाफ दाखिल पुलिस की चार्जशीट को रद्द कर दिया। 

साफ किया कि चार्जशीट के अंदर आरोपियों के खिलाफ केस चलाने लायक सबूत नहीं हैं। अदालत के फैसले के बाद पुलिस की तीन साल जांच चलने के बाद भी आरोपियों को क्लीन चिट मिलने पर पुलिस पर सवाल उठने लगे थे। अब पुलिस ने मामले में हाईकोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है। इसके लिए पुलिस ने जिला प्रशासन के माध्यम से चंडीगढ़ फाइल भेजी गई। फाइल के अध्ययन के बाद मंगलवार को हाईकोर्ट में स्थानीय अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई ।

अदालत के फैसले को लेकर जिला न्यायवादी की रिपोर्ट मिल चुकी है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद रोहतक पुलिस ने जिला प्रशासन के माध्यम से चंडीगढ़ फाइल भेजी थी। मंगलवार को रोहतक पुलिस की तरफ से हाईकोर्ट में प्रो. विरेंद्र, मान सिंह दलाल व जयदीप धनखड़ को क्लीन चिट देने के स्थानीय अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है।  - गोरखपाल राणा, डीएसपी मुख्यालय

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