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Hindi News ›   Chandigarh ›   Rohru Jaana Meri Aamiye... Audience dances to Himachal Naati

Chandigarh News: रोहड़ू जाना मेरी आमिए...हिमाचल नाटी पर झूमे दर्शक

Wed, 03 Dec 2025 02:29 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Dec 2025 02:29 AM IST
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Rohru Jaana Meri Aamiye... Audience dances to Himachal Naati
मनीमाजरा। कलाग्राम में चल रहे 15वें चंडीगढ़ राष्ट्रीय क्राफ्ट मेले ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, संगीत और लोकधुनों के रंगों में डूबकर एक अविस्मरणीय शाम का साक्षी बनाया। हिमाचली संध्या के रूप में आयोजित इस खास प्रस्तुति में कुल्लवी लोकधुनों की स्वर कोकिला पंडित खुशबू भारद्वाज और इंडियन आइडल सीजन-2 के रनर-अप बॉलीवुड सिंगर अनुज शर्मा ने सुरों की ऐसी बरसात की कि पूरा कलाग्राम हिमाचली माहौल से सराबोर हो गया।
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शाम की शुरुआत खुशबू भारद्वाज की शिव-स्तुति से हुई जिसने उपस्थित दर्शकों को आध्यात्मिक सुकून से भर दिया। उन्होंने लोकप्रिय नाटी रोहड़ू जाना मेरी आमिए...पर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद उन्होंने कुल्लू रीऐ पौट्टू वालिया, लाल चिड़िया हो लाल चिड़िये, महासू गीत, इन्हा छोरूआं जो देया समझाई जैसे गीतों के माध्यम से श्रोताओं को कुल्लू, मनाली, शिमला और किन्नौर की बर्फीली सुंदरता और लोक संगीत की मिठास का अनुभव कराया।
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वहीं युवा सिंगर अनुज शर्मा ने देवा श्री गणेशा... से लेकर इक हसीना थी..., ए दिल है मुश्किल..., तेरी दीवानी... हवाएं... दिल ले गई कुड़ी..., ‘माए नि मेरिए शिमले दी राहें’ जैसे बॉलीवुड, पंजाबी और हिमाचली गीतों पर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। गोगी ऑर्केस्ट्रा बैंड और हिमाचली डांस ग्रुप की प्रस्तुतियों ने संध्या को और भी जीवंत बना दिया। कार्यक्रम का संचालन हिमाचल के वरिष्ठ एंकर कुलदीप गुलेरिया ने किया। यह संध्या उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एलजेडसीसी), पटियाला और चंडीगढ़ कला एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मेले का हिस्सा थी।
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दिनभर लोकनृत्यों का जलवा
मेले के दिन के सत्र में महाराष्ट्र के सोंगी मुखौटा, लावणी, राजस्थान के चरी, पश्चिम बंगाल के नटुआ, असम के बिहू, और यूपी के बरसाना होली नृत्य ने दर्शकों को विभिन्न राज्यों की संस्कृति से रूबरू कराया। दोपहर में पंजाब के सुम्मी (शाहमुखी), छत्तीसगढ़ के पंथी, त्रिपुरा के होजगिरी, राजस्थान के चकरी और जम्मू-कश्मीर के धमाली नृत्य ने माहौल में जोश भर दिया।


छत्तीसगढ़ी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पंडवानी (पांडव कथा) ने अपने अभिनय और लोक वाद्यों के संग दर्शकों को महाभारत की गाथाओं में डुबो दिया। वहीं राजस्थान का कच्छी घोड़ी, पंजाब का बाजीगर-नचार, हरियाणा के जोगी-बीन, और पारंपरिक नगाड़ों की थाप दिनभर मेलार्थियों का दिल जीतती रही।
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