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'रॉक लेजेंड' नेकचंद के बेटे अनुज सैनी का संकल्प, बोले- पिता का है रॉक गार्डन, नष्ट नहीं होने दूंगा
Sun, 16 Dec 2018 10:24 AM IST
खुशबू गोयल
रूबी सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रूबी सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 16 Dec 2018 10:24 AM IST
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पद्मश्री नेकचंद
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चंडीगढ़ स्थित रॉक गार्डन में टूटे हुए फाउंटेन और अपने पिता की हाथों से संवारे कलाकृतियों में आई दरारें देख नेकचंद के बेटे अनुज सैनी का दिल दु:खी हो गया है। शनिवार को नेकंचद की 94वीं सालगिरह पर उन्होंने प्रण लिया कि वह अपने पिता की देवों की नगरी को किसी भी तरह नष्ट नहीं होने देंगे। चाहे उनको इसके लिए कुछ भी करना पड़े। वे एक एक चीजों को संवारेंगे, चाहे उनको प्रशासन की ओर से आर्थिक सहयोग भी नहीं मिले। उनकी सालगिराह पर नेकचंद के परिवार ने आर्ट पीस रॉक गार्डन में लगाकर उन्हें यह खूबसूरत तोहफा दिया। इस मौके पर स्वर्गीय नेकचंद की पत्नी कमला सैनी, बेटा अनुज सैनी एवं उनकी पत्नी मौजूद थीं। वहीं शाम चार बजे के करीब चंडीगढ़ प्रशासक की ओर से उनकी सालगिराह मनाई गई। इस मौके पर गृहसचिव अरुण कुमार मुख्य मेहमान के तौर पर पहुंचे।
सालगिरह पर नौ नए फाउंटेन दिए तोहफे में
स्वर्गीय पद्मश्री नेकचंद की सालगिरह पर उनके बेटे अनुज सैनी ने अपने पिता की कला को संवारते हुए रॉक गार्डन के टूटे नौ फाउंटेन, एक झोपड़ी और अन्य टूटे आर्ट पीस तोहफे में दिए हैं। उन्होंने कहा कि पिता के निधन को तकरीबन साढे़ तीन साल हो गए हैं। मगर इन साढ़े तीन सालों में हम भारत के उस महान कलाकार की अनोखी कला को संभाल नहीं सके। उन्होंने कहा कि रॉक गार्डन के हालात ठीक नहीं हैं। अगर यही हालात बरकरार रहे तो आने वाले 4-5 सालों में हमें रॉक गार्डन के सिर्फ रास्ते ही देखने को मिलेंगे। इसीलिए इस पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। अनुज सैनी ने कहा कि अपने पिता की सपनों की नगरी रॉक गार्डन में तीन सालों में जो भी कलाकृतियां टूटी हैं उसको फिर से संवारेंगे।
रॉक गार्डन की कलाकृतियां टूटी देख दिल रोता है
अनुज सैनी ने बेहद भावुक होकर कहा कि जब भी वे रॉक गार्डन में अपनी पिता की कला टूटी हुई देखते हैं तो उनका दिल रोता है। उन्होंने कहा कि उनके पास बहुत पैसे नहीं हैं, लेकिन वे अपने पिता की टूट रही विरासत को संवारेंगे। साथ ही उन्होंने कुछ लोगों के रॉक गार्डन की जमीन पर कब्जा करने के आरोप पर कहा कि यह गलत आरोप है। उनके पिता और उनके परिवार ने कभी ऐसा नहीं सोचा है। उन्होंने कहा कि वे रॉक गार्डन से खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
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सालों पुराने पत्थर को संवारा उनके बेटे ने
अनुज ने बताया कि फाउंटेन में लगे मार्बल पत्थर को तलाश करना बेहद मुश्किल था। उन्होंने काफी महीनों से इसकी तलाश की। ये नौ फाउंटेन उन्होंने उसी मार्बल से तैयार किए हैं। कुछ आर्ट पीस को तैयार करने के लिए उन्हें काफी महीने में भी लग गए।
मदद लेनी पड़ी तो लोगों से लेंगे मदद
उन्होंने कहा कि रॉक गार्डन की टूटी कलाकृतियों को संवारने के लिए यदि उनको शहर के लोगों से मदद लेनी पड़ी तो वे उनसे भी सहयोग मांगेंगे। हालांकि स्वयं लोगों की ओर से उनको मदद के लिए आग्रह आ रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन रॉक गार्डन मेंटेनेंस सोसायटी एंड डेवलपमेंट से भी सहयोग की भी उम्मीद करते हैं।
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सालगिरह पर नौ नए फाउंटेन दिए तोहफे में
स्वर्गीय पद्मश्री नेकचंद की सालगिरह पर उनके बेटे अनुज सैनी ने अपने पिता की कला को संवारते हुए रॉक गार्डन के टूटे नौ फाउंटेन, एक झोपड़ी और अन्य टूटे आर्ट पीस तोहफे में दिए हैं। उन्होंने कहा कि पिता के निधन को तकरीबन साढे़ तीन साल हो गए हैं। मगर इन साढ़े तीन सालों में हम भारत के उस महान कलाकार की अनोखी कला को संभाल नहीं सके। उन्होंने कहा कि रॉक गार्डन के हालात ठीक नहीं हैं। अगर यही हालात बरकरार रहे तो आने वाले 4-5 सालों में हमें रॉक गार्डन के सिर्फ रास्ते ही देखने को मिलेंगे। इसीलिए इस पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। अनुज सैनी ने कहा कि अपने पिता की सपनों की नगरी रॉक गार्डन में तीन सालों में जो भी कलाकृतियां टूटी हैं उसको फिर से संवारेंगे।
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रॉक गार्डन की कलाकृतियां टूटी देख दिल रोता है
अनुज सैनी ने बेहद भावुक होकर कहा कि जब भी वे रॉक गार्डन में अपनी पिता की कला टूटी हुई देखते हैं तो उनका दिल रोता है। उन्होंने कहा कि उनके पास बहुत पैसे नहीं हैं, लेकिन वे अपने पिता की टूट रही विरासत को संवारेंगे। साथ ही उन्होंने कुछ लोगों के रॉक गार्डन की जमीन पर कब्जा करने के आरोप पर कहा कि यह गलत आरोप है। उनके पिता और उनके परिवार ने कभी ऐसा नहीं सोचा है। उन्होंने कहा कि वे रॉक गार्डन से खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
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सालों पुराने पत्थर को संवारा उनके बेटे ने
अनुज ने बताया कि फाउंटेन में लगे मार्बल पत्थर को तलाश करना बेहद मुश्किल था। उन्होंने काफी महीनों से इसकी तलाश की। ये नौ फाउंटेन उन्होंने उसी मार्बल से तैयार किए हैं। कुछ आर्ट पीस को तैयार करने के लिए उन्हें काफी महीने में भी लग गए।
मदद लेनी पड़ी तो लोगों से लेंगे मदद
उन्होंने कहा कि रॉक गार्डन की टूटी कलाकृतियों को संवारने के लिए यदि उनको शहर के लोगों से मदद लेनी पड़ी तो वे उनसे भी सहयोग मांगेंगे। हालांकि स्वयं लोगों की ओर से उनको मदद के लिए आग्रह आ रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन रॉक गार्डन मेंटेनेंस सोसायटी एंड डेवलपमेंट से भी सहयोग की भी उम्मीद करते हैं।