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बिछड़ने का दर्दः पत्नी बोली, 'नहीं देख पाई आखिरी क्षणों में'

Sat, 13 Jun 2015 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 13 Jun 2015 09:23 AM IST
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rock garden creator nekchand wife kamla condition

आईसीयू में होने के कारण नेक चंद को अंतिम क्षणों में देख नहीं सकी, इसका हमेशा मलाल रहेगा। उम्मीद थी कि वह ठीक होकर वापस घर आएंगे। नहीं पता था कि इस तरह चले जाएंगे। रॉक गार्डन के क्रिएटर नेक चंद सैनी की पत्नी कमला सैनी ने पति से बिछड़ने का दर्द इन शब्दों के साथ बयां किया।

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पुरानी यादें ताजा करते हुए उन्होंने बताया कि नेक चंद को कबाड़ और पुरानी चीजों से लगाव था। हालात यह हो गए थे कि लोग कबाड़ बेचने घर आने लगे। सबसे हर तरह का कबाड़ खरीद लेते थे। नदियों से पत्थर ढूंढ कर लाते।
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साइकिल से ही सारे पत्थर रॉक गार्डन तक ढोए। एक दिन उनसे पूछा कि आखिर इनका करते क्या हैं, तो कहने लगे चल तुझे दिखाकर लाता हूं। वह मुझे पीडब्ल्यूडी स्टोर ले गए और अंदर बनी छोटी सी झोंपड़ी दिखाई। वहीं हमने पिकनिक मनाई और रोटी खाई।
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कैंसर की नहीं थी नेक चंद को जानकारी
कमला ने बताया कि नवंबर में ही कैंसर की जानकारी मिल गई थी। लेकिन नेक चंद को यह बताया नहीं गया। मुंबई में एक डॉ. के साथ अप्वाइंटमेंट फिक्स कर दिखाने जाना था। लेकिन नेक चंद ने ‘यहां क्या कम डॉक्टर हैं’ कहकर जाने से मना कर दिया। काफी दिनों से उन्होंने खाना पीना छोड़ रखा था। जब मैं अस्पताल में मिलने गई तो मुझसे पूछा तुम ठीक हो।

आर्किटेक्ट करते हैं तारीफ
कमला सैनी ने बताया कि उस जमाने में आर्किटेक्ट और नक्शे से संबंधित अन्य काम करने वाले लोग नेक चंद की जमकर तारीफ करते थे। आर्किटेक्ट नेक चंद को कहते कि आपने हमें रोजी-रोटी दिलाई है। जब भी कोई बाहरी लोग चंडीगढ़ आकर किसी से कुछ देखने लायक चीज पूछते तो सीधा रॉक गार्डन का जिक्र आता। इसे दिखाकर आर्किटेक्ट को भी अन्य शहरों के लिए काम मिल जाता था।

शहर के पहले चीफ आर्किटेक्ट ने साझा की यादें

rock garden creator nekchand wife kamla condition

जिंदगी एक सफर है, इसमें उतार चढ़ाव के साथ कई प्लेटफॉर्म आते हैं। नेक चंद सैनी का प्लेटफॉर्म आ गया और उनका यह सफर पूरा हो गया। शहर के पहले चीफ आर्किटेक्ट और पद्मश्री नेक चंद सैनी के अच्छे दोस्तों में शामिल एमएन शर्मा ने रुंधे कंठ और नम आंखों से ये बातें कहीं।

उन्होंने बताया कि नेक चंद के देहांत का समाचार मिलने पर उन्हें ऐसे लगा जैसे मानों उनके सफर का साथी बिछड़ गया। ये कहते ही वह कुछ पल के लिए शांत हो गए और यादों में खो से गए। कुछ पल की खामोशी के बाद एमएन शर्मा ने बताया कि 1965 में उन्होंने चंडीगढ़ में बतौर चीफ आर्किटेक्ट ज्वाइन किया था। उस वक्त यह शहर बहुत शांत और मौसम के लिहाज से समृद्ध था।

1966 की बात होगी एक दिन उनके ऑफिस में एक कर्मचारी ने बताया कि उनसे मिलने रोड इंस्पेक्टर आया है। उन्होंने उसके आने का कारण पूछा और मिलने से मना कर दिया। बाद में कर्मचारियों के यह कहने पर कि वह कुछ दिखाना चाहता है तो उन्होंने उसे रविवार को घर आने के लिए कहा।

रविवार को वह रोड इंस्पेक्टर घर आया और वहां से वह उन्हें एक जगह ले गया। वहां कुछ स्कल्पचर पड़े थे। उन्हें देखकर वह हैरान हो गए कि ये स्कल्पचर ऐसी चीजों से बने थे जो अक्सर कबाड़ में मिलती हैं। उन्होंने इसकी तारीफ की और इस काम को आगे भी जारी रखने को कहा। साथ ही इसे किसी और न दिखाने को कहा। यह रोड इंस्पेक्टर नेक चंद सैनी थे।

शर्मा एक-एक मूर्ति में शामिल नेक चंद के विजन को देख चुके थे। वह समझ गए थे कि यह कोई मामूली व्यक्तित्व वाला इंसान नहीं है। ये दूरदृष्टि है जो हर किसी के पास नहीं होती। बस फिर क्या था यहां से एक नए सफर की शुरुआत हुई।

इसमें सहयोग, दोस्ती, अपनापन सब कुछ था। हालांकि उन्होंने बताया कि करीब 50 साल की उनकी दोस्ती में वह उनके परिवार के सदस्यों से ज्यादा नहीं मिले। बहुत कम अवसर होते थे जब उनसे मिलना होता था।

जब-जब रॉक गार्डन देखेंगे, नेक चंद याद आएंगे

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मैंने अपना एक करीबी दोस्त खो दिया है। जब-जब देशवासी, शहरवासी या मैं खुद रॉक गार्डन को देखेंगे, हमेशा ही नेक चंद की याद आएगी। हम दोनों एक दूसरे से हर बात शेयर करते थे। हफ्ते में एक-दो बार उनसे मुलाकात हो जाया करती थी। नेक चंद ने जो देश और शहर को दिया है ऐसी धरोहर किसी ने न तो दी है और न ही दे पाएगा। वह दुनिया के लिए आदर्श हैं। उन्होंने कबाड़ का प्रयोग कर उसे सुंदरता में ढाला है। युवा पीढ़ी को उनका अनुसरण करना चाहिए।
-मिल्खा सिंह

मेरा नेक चंद के साथ पुराना संबंध रहा है। उन्होंने बेकार की वस्तुओं को सौंदर्य दिया। उनके बनाए रॉक गार्डन से प्रेरणा लेकर दुनिया भर में इस तरह के निर्माण किए गए।
- प्रो वीरेंद्र मेहंदीरत्ता, हिंदी के वयोवृद्ध साहित्यकार

नेक चंद चुपचाप काम करने वाले धुन के पक्के इंसान थे।
- मोहन भंडारी, पंजाबी के प्रसिद्ध कहानीकार

नेक चंद जमीन से जुड़े इंसान थे। दिखावे से कोसों दूर थे। उनके कला ने चंडीगढ़ को पहचान दी।
- प्रेम विज, कवि और संवाद साहित्य के अध्यक्ष

नेक चंद ने बेजान वस्तुओं में जान डाल दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार बेकार चीजों को खूबसूरत बनया जा सकता है।
- बीडी कालिया हमदम, उर्दू के मशहूर शायर

उनका जीवन आम आदमी की सृजनशीलता का सबसे बड़ा उदाहरण है।
- माधव कौशिक, गजलकार व चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के सचिव

नेक चंद रचनात्मक इंसान थे। उन्होंने अपना समय रचनात्मक कार्यों में बिताया। -
- शशि प्रभा, कवयित्री

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