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Chandigarh News: पीजीआई में दो मरीजों का रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट
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चंडीगढ़। पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग ने इस सप्ताह दो मरीजों का सफल रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट किया है। रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट पीजीआई में पहली बार किया गया और दोनों मरीज स्वस्थ हैं। यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. उत्तम ने बताया कि विभाग वर्ष 2015 से रोबोटिक सर्जरी कर रहा है, लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट का यह पहला केस था, जिसमें टीम सफल रही है।
डॉ. उत्तम ने बताया कि किडनी फेल होने पर आम तौर पर ओपन सर्जरी की जाती है, जिसमें कई समस्याएं आती हैं। ओपन सर्जरी के अलावा दो विकल्प लैपरोस्कोपिक और रोबोटिक असिस्ट सर्जरी का होता है। लैपरोस्कोपिक सर्जरी पेचीदा होने के कारण कम इस्तेमाल की जाती है। इसमें सबसे बेहतर विकल्प रोबोटिक असिस्ट सर्जरी है।
डॉ. उत्तम ने बताया कि 30 वर्षीय मरीज को उसकी बहन ने किडनी दान की थी और 50 वर्षीय मरीज को उसके पिता ने किडनी दान की थी। उन्होंने बताया कि मोटापे से पीड़ित मरीजों में ओपन सर्जरी (चीरा लगाकर) करने में अधिक परेशानी होती है, रोबोट के जरिए इसे आसान बनाया जा सकता है। ओपन सर्जरी में कई बार मरीज को बाद में हॉर्निया की परेशानी भी हो जाती है। वहीं अगर मरीज का पहले किडनी प्रत्यारोपण हो चुका है और वह असफल रहा हो तो रोबोट के जरिए उसकी सफलता से दोबारा किडनी प्रत्यारोपित की जा सकती है, इसमें खतरा कम होता है।
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डॉ. उत्तम ने बताया कि किडनी फेल होने पर आम तौर पर ओपन सर्जरी की जाती है, जिसमें कई समस्याएं आती हैं। ओपन सर्जरी के अलावा दो विकल्प लैपरोस्कोपिक और रोबोटिक असिस्ट सर्जरी का होता है। लैपरोस्कोपिक सर्जरी पेचीदा होने के कारण कम इस्तेमाल की जाती है। इसमें सबसे बेहतर विकल्प रोबोटिक असिस्ट सर्जरी है।
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डॉ. उत्तम ने बताया कि 30 वर्षीय मरीज को उसकी बहन ने किडनी दान की थी और 50 वर्षीय मरीज को उसके पिता ने किडनी दान की थी। उन्होंने बताया कि मोटापे से पीड़ित मरीजों में ओपन सर्जरी (चीरा लगाकर) करने में अधिक परेशानी होती है, रोबोट के जरिए इसे आसान बनाया जा सकता है। ओपन सर्जरी में कई बार मरीज को बाद में हॉर्निया की परेशानी भी हो जाती है। वहीं अगर मरीज का पहले किडनी प्रत्यारोपण हो चुका है और वह असफल रहा हो तो रोबोट के जरिए उसकी सफलता से दोबारा किडनी प्रत्यारोपित की जा सकती है, इसमें खतरा कम होता है।
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