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आरओ अपना पत्र वापस लें, सचिव से जारी करवाएं चुनाव स्थगित करने के आदेश

Mon, 28 Sep 2020 01:48 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2020 01:48 AM IST
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Ro withdraw your letter, get the secretary to issue orders to postpone the election
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) का चुनाव स्थगित होने के बावजूद घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। खालिद-सिद्धू ग्रुप ने चुनाव अधिकारी (आरओ) को चिट्ठी लिखकर कहा है कि पुटा का संविधान शिक्षकों के लिए ताज की तरह है। ऐसे में उसके नियमों का उल्लंघन होते नहीं देख सकते। चुनाव स्थगित करने का अधिकार सचिव के पास है। ऐसे में आरओ अपना स्थगन पत्र वापस लें और सचिव के जरिए आदेश जारी करवाएं ताकि संविधान की मर्यादा बनी रहे। यदि अधिकारों का प्रयोग गलत ढंग से होगा तो यह पुटा संविधान की तौहीन होगी जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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खालिद-सिद्धू ग्रुप ने पत्र में लिखा है कि पुटा चुनाव का कार्यक्रम तय करने का जिम्मा कार्यकारी सदस्यों के पास होता है, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया। पूर्व पदाधिकारियों ने अपने कार्यकाल के आखिरी समय में कार्यकारी सदस्यों की बैठक बुलाकर यह प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए थी, लेकिन पुटा के संविधान की धज्जियां उड़ाई गईं। बिना कार्यकारी सदस्यों की अनुमति के चुनाव अधिकारी लगाए गए। इन सभी बातों का उस दौरान विरोध दर्ज कराया गया, लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं की गई। उसके बाद चुनाव कार्यक्रम घोषणा हो गई।
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बोले- बेहद जरूरी था पुटा चुनाव
पुटा का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि शिक्षकों के तमाम मुद्दे मुंह बाएं् खड़े थे। कई वर्षों से शिक्षकों को पास्ट सर्विस का लाभ नहीं मिल सका। उनके साथ न्याय नहीं हो सका। सातवां वेतनमान लागू नहीं हो पाया। शिक्षकों के समय पर प्रमोशन नहीं हो पाए। ये मुद्दे बहुत महत्वपूर्ण थे। इसलिए सभी लोग पुटा के चुनाव में जुट गए। तैयारियां पूरी हो गई थीं, लेकिन चुनाव स्थगित कर दिए गए।
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पुटा संविधान की अनदेखी करना बेहद गलत
चुनाव स्थगित के आदेश जारी करने का अधिकार पुटा के सचिव के पास होता है, लेकिन यहां भी पुटा संविधान की अनदेखी की गई जो कि बेहत गलत है। इसलिए चुनाव अधिकारी से आग्रह है कि वह अपना स्थगन पत्र वापस लें और सचिव से चुनाव स्थगित करवाने के आदेश जारी करवाएं ताकि शिक्षकों को जानकारी हो सके।
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चुुनाव प्रक्रिया शुरू होने से लेकर आखिरी समय तक के अभिलेख दें
खालिद-सिद्धू ग्रुप ने यह भी लिखा है कि चुनाव की प्रक्रिया जब से शुरू हुई है तबसे लेकर आखिरी स्थगन आदेश तक कौन-कौन से पत्र किस अधिकारी को लिखे गए और उन पर क्या कार्रवाई हुई। ये सभी अभिलेख शिक्षकों को मेल के जरिए मुहैया कराए जाएं ताकि शिक्षक भी इस पूरे प्रकरण को जान सकें।
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डॉ. मृत्युंजय की टीम ने खालिद-सिद्धू ग्रुप को बताया सोशल मीडिया का बाघ, कहा- डबल गेम खेलने के माहिर
प्रो. राजेश गिल, प्रो. जेके गोस्वामी, प्रो. केशव मल्होत्रा, डॉ. मृत्युंजय कुमार ने एक पत्र जारी कर खालिद-सिद्धू ग्रुप को सोशल मीडिया का बाघ बताया है। कहा कि यह डबल गेम खेलते हैं। हमारी चुप्पी का इन्होंने फायदा उठाया, लेकिन अब जवाब देने का समय आ गया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर हर चीज पोस्ट की गई और पुटा को बदनाम करने की कोशिश की गई। जब पुटा ने ऑनलाइन सदस्यता शुल्क का प्रस्ताव रखा तो इसे फेल करने की कोशिश की गई। चुनाव अधिकारी का विरोध किया गया। सीनेट चुनाव स्थगित किया गया तो अधिकारियों को खुश करने के लिए उस निर्णय का स्वागत पत्र भेजकर किया गया। इसके अलावा कई अन्य आरोप लगाए हैं। कहा कि खालिद-सिद्धूू ग्रुप की ओर से नौटंकी की जा रही है लेकिन शिक्षक समझते हैं कि कौन कितने पानी में है।

खालिद-सिद्धु ग्रुप का पलटवार
खालिद-सिद्धू ग्रुप ने मृत्युंजय ग्रुप की ओर से उठाए गए एक-एक सवाल का जवाब दिया है। कहा है कि सोशल मीडिया का उपयोग किसने शुरू किया? कृपया अपने समर्थकों के साथ चर्चा करें यदि अभी भी कोई संदेह है तो संवाद में या आमने-सामने आकर जवाब मांगा जा सकता है। चुनाव की अनुमति जल्द मिलने के सवाल पर कहा है कि आपने क्या सुनिश्चित किया है कि आपको जल्द ही अनुमति मिल जाएगी? यानी आपको सभी बातों का पता है, लेकिन शिक्षक समाज को आपने अभी अंधेरे में रखा हुआ है। कहा कि पुटा संविधान का खुलेआम उल्लंघन किया। आपदा नियमों को नहीं समझा। यही कारण है कि आपके ग्रुप ने घरों और विभागों में व्यक्तिगत रूप से जाकर सहयोगियों के जीवन को खतरे में डाल दिया है। आपने शिक्षकों के जीवन से खेला है। पुटा सचिव से संविधान की उस कॉपी की मांग की गई थी, जिसमें आरओ को चुनाव स्थगन के आदेश दिए गए हैं, वह भी नहीं दी गई। पिछले पत्र में कहा था कि हमारे निर्देशों की आवश्यकता नहीं है। इसका जवाब यह है कि हम आपको समय-समय पर सुझाव भी देंगे और निर्देश भी।
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