{"_id":"0a928a7c62956e2670cab68317d84c13","slug":"risk-to-the-baby-or-child-in-old-age","type":"story","status":"publish","title_hn":"बढ़ती उम्र में बेबी यानी बच्चे को होता है खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बढ़ती उम्र में बेबी यानी बच्चे को होता है खतरा
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Thu, 02 Jan 2014 09:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैरियर बनाने की होड़ में बेबी प्लानिंग में देरी आने वाले बच्चों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि ज्यादा उम्र में बेबी प्लान करना आने वाले बच्चों में निशक्तता का कारण बन सकता है।
इसलिए जरूरी है कि ज्यादा उम्र में गर्भवती होने पर स्क्रीनिंग टेस्ट जरूर कराएं।
30 साल के बाद प्रेगनेंट होने पर डाउन सिंड्रोम का खतरा बढ़ता जाता है। यदि महिला की उम्र 35 साल से ज्यादा हो तो गर्भ में पल रहे बच्चे की अवश्य जांच करवा लेनी चाहिए कि बच्चे में डाउन सिंड्रोम तो नहीं है।
इसके लिए गर्भवती महिला को अल्ट्रासाउंड और स्क्रिीनिंग टेस्ट करवाना चाहिए। यदि स्क्रिीनिंग टेस्ट में गर्भ में पल रहे बच्चे में डाउन सिंड्रोम पाया जाता है तो गर्भपात करवा लेना चाहिए, लेकिन यह 20 सप्ताह से पहले ही सेफ है।
विज्ञापन
डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक बीमारी है, जिससे क्रोमोसोमस 21 ट्रिपलीकेट होता है। मां की उम्र ज्यादा होने पर डाउन सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भवती महिलाओं की ट्रिपल स्क्रिीनिंग टेस्ट के दौरान यदि बच्चा अशक्त पाया जाता है तो डाक्टर भी 20 सप्ताह के पहले गर्भपात की सलाह देते हैं, क्योंकि डाउन सिंड्रोम बच्चे में फिजीकल और मेंटल डेवलपमेंट दोनों को डिस्टर्ब करता है।
आंकड़ों पर एक नजर
हेल्थ स्पेशलिस्ट के अनुसार, 35-39 साल की उम्र में गर्भवती होने वाली महिलाओं के बीच हुए सर्वे के आधार पर 270 बच्चों में एक बच्चे को डाउन सिंड्रोम का खतरा रहता है। इसी प्रकार...
उम्र रिस्क
18-29 1550 में एक
30-34 800 में एक
35-39 270 में एक
40-45 100 में एक
45 50 में एक
डाउन सिंड्रोम से खतरा
मेंटल डिसआर्डर होना
थाइराइड की समस्या
हार्ट की समस्या
कम सुनाई देना
कम दिखाई देना
विज्ञापन
इसलिए जरूरी है कि ज्यादा उम्र में गर्भवती होने पर स्क्रीनिंग टेस्ट जरूर कराएं।
30 साल के बाद प्रेगनेंट होने पर डाउन सिंड्रोम का खतरा बढ़ता जाता है। यदि महिला की उम्र 35 साल से ज्यादा हो तो गर्भ में पल रहे बच्चे की अवश्य जांच करवा लेनी चाहिए कि बच्चे में डाउन सिंड्रोम तो नहीं है।
विज्ञापन
इसके लिए गर्भवती महिला को अल्ट्रासाउंड और स्क्रिीनिंग टेस्ट करवाना चाहिए। यदि स्क्रिीनिंग टेस्ट में गर्भ में पल रहे बच्चे में डाउन सिंड्रोम पाया जाता है तो गर्भपात करवा लेना चाहिए, लेकिन यह 20 सप्ताह से पहले ही सेफ है।
विज्ञापन
डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक बीमारी है, जिससे क्रोमोसोमस 21 ट्रिपलीकेट होता है। मां की उम्र ज्यादा होने पर डाउन सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भवती महिलाओं की ट्रिपल स्क्रिीनिंग टेस्ट के दौरान यदि बच्चा अशक्त पाया जाता है तो डाक्टर भी 20 सप्ताह के पहले गर्भपात की सलाह देते हैं, क्योंकि डाउन सिंड्रोम बच्चे में फिजीकल और मेंटल डेवलपमेंट दोनों को डिस्टर्ब करता है।
आंकड़ों पर एक नजर
हेल्थ स्पेशलिस्ट के अनुसार, 35-39 साल की उम्र में गर्भवती होने वाली महिलाओं के बीच हुए सर्वे के आधार पर 270 बच्चों में एक बच्चे को डाउन सिंड्रोम का खतरा रहता है। इसी प्रकार...
उम्र रिस्क
18-29 1550 में एक
30-34 800 में एक
35-39 270 में एक
40-45 100 में एक
45 50 में एक
डाउन सिंड्रोम से खतरा
मेंटल डिसआर्डर होना
थाइराइड की समस्या
हार्ट की समस्या
कम सुनाई देना
कम दिखाई देना