फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Review of Education condition in Chandigarh Panjab University 

ईयर एंडर: चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के नहीं खुले दरवाजे, सीनेट चुनाव को लेकर हुआ घमासान, प्रोफेसर की पत्नी की मौत बनी राज

Thu, 30 Dec 2021 12:01 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 30 Dec 2021 12:01 PM IST
सार

चुनाव करवाने के लिए पूर्व सीनेटरों से लेकर छात्र तक सड़कों पर आ गए। लंबा प्रदर्शन चला। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और चरणवार तरीके से सीनेट चुनाव करवाए गए। आज तक के इतिहास में ऐसे चरणवार तरीके से चुनाव नहीं हुए थे। 

विज्ञापन
Review of Education condition in Chandigarh Panjab University 
पेक पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद। - फोटो : फाइल

विस्तार

कोरोना महामारी के चलते 2021 चंडीगढ़ में शिक्षा के लिए कुछ खास नहीं रहा। संक्रमण के खतरे को देखते हुए एक ओर जहां पंजाब विश्वविद्यालय के द्वार विद्यार्थियों के लिए नहीं खुले, वहीं स्कूली शिक्षा भी ऑनलाइन रही। परीक्षाएं भी ऑनलाइन ही हुईं। डिग्री कॉलेजों में भी सन्नाटा रहा। हालांकि शिक्षा को आगे ले जाने के लिए नए शोध जरूर हुए। कई संसाधन विकसित किए गए, जिसके जरिए शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश की गई। 

विज्ञापन


पंजाब विश्वविद्यालय इस साल के शुरुआती चरण में बंद था। पढ़ाई ऑनलाइन ही चल रही थी। दूसरी लहर आने के बाद सख्ती हो गई। प्रयोगशालाएं और पुस्तकालय बंद हो गए। हालांकि इससे पहले सीनेट चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गईं। चुनाव करवाने के लिए पूर्व सीनेटरों से लेकर छात्र तक सड़कों पर आ गए। लंबा प्रदर्शन चला। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और चरणवार तरीके से सीनेट चुनाव करवाए गए। आज तक के इतिहास में ऐसे चरणवार तरीके से चुनाव नहीं हुए थे। 
विज्ञापन


यही नहीं शिक्षकों ने 50 दिन से अधिक धरना-प्रदर्शन इसलिए किया कि उनके प्रमोशन स्थगित कर दिए गए थे। इस साल को पीयू के हितधारक इसलिए भी याद करेंगे कि यहां का संचालन करने वाली कमेटी सीनेट व सिंडिकेट नहीं रहीं। शासन सुधार के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी का भी खूब विरोध हुआ जो सीनेट की संख्या कम करने की सिफारिश कर रही थीं। विश्वविद्यालय में हाल ही में एक शिक्षक की पत्नी की मौत भी चर्चा का विषय बनी, जिसकी गुत्थी आज तक नहीं सुलझ सकी है। कुल मिलाकर पीयू का यह साल पिछले वर्ष की भांति ही रहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

ये रहीं उपलब्धियां

पीयू के शिक्षकों ने कोरोना काल में 100 से अधिक शोध पेपर प्रकाशित कर रिकॉर्ड बनाया। पेटेंट की संख्या भी 20 से अधिक पहुंची। इसमें यूआईपीएस विभाग का बड़ा योगदान रहा। यही नहीं पीयू के 22 वैज्ञानिकों को विश्व रैंकिंग में जगह मिली जो अपने में अलग थी। पीयू ने इस बार भी खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर माका ट्रॉफी अपने नाम की। संघर्ष के बाद 100 से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति हुई। इसके अलावा कुछ शिक्षकों को प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी दी गई। डिग्री कॉलेजों में भी खास काम नहीं हो पाया लेकिन शोध का काम चलता रहा। कॉलेजों के शिक्षकों ने भी कोरोना काल में 130 से अधिक शोध पेपर प्रकाशित किए। पीयू ने इस साल में आठ से अधिक देशों के साथ संयुक्त पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए समझौते किए। कुछ हॉस्टलों को छात्रों के लिए खोला गया और पीजी के छात्रों को कैंपस बुलाया गया लेकिन स्नातक छात्र दूर रहे। स्टूडेंट सेंटर की दुकानें खुलीं। कुछ इलाका कैंपस का गुलजार हुआ। 

पेक ने मनाया शताब्दी समारोह, पहुंचे थे राष्ट्रपति 

इस वर्ष पेक ने अपना शताब्दी समारोह बनाकर एक इतिहास रचा। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पहुंचे थे। पेक ने सेंटेनरी गेट से लेकर प्रयोगशालाओं का निर्माण किया, जो संस्थान को अपने में अलग करते हैं। पेक में 60 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हुए। नए निदेशक के मिलने से संस्थान को अधिक उम्मीदें जगीं। साथ ही शोध पर जोर दिया जाने लगा। इसी तरह सीसीईटी पढ़ाई का माहौल ऑनलाइन चलता रहा। अब जाकर प्रयोगशालाएं खुली हैं। 

स्कूली शिक्षा : पंजाब से पिछड़ा चंडीगढ़

शहर के स्कूल बुनियादी सुविधाओं, समान शिक्षा, सीखने के परिणाम और गुणवत्ता के पैमाने पर कभी देश में सर्वोच्च स्थान रखते थे लेकिन 2021 में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी निष्पादन ग्रेड सूचकांक (पीजीआई) में चंडीगढ़ के स्कूल पंजाब से पिछड़ गए। पंजाब ने इसमें 929 स्कोर किया, जबकि चंडीगढ़ का स्कोर 912 रहा। चंडीगढ़ को शासन प्रक्रियाओं में नौवां और समान शिक्षा में सातवां स्थान मिला था। 

चार नए स्कूलों की शुरुआत हुई

शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2021 में चार नए स्कूलों की शुरुआत की गई। इसमें मलोया, रायपुरकलां और सेक्टर-12 (पीजीआई) में नए सरकारी स्कूलों की शुरुआत की गई। वहीं, सेक्टर-45 के सरकारी स्कूल को सीनियर सेकेंडरी स्कूल में तब्दील किया गया। इससे आसपास के लोगों के बच्चों को इसका लाभ मिलेगा। 

मलोया के सरकारी स्कूल में कंप्यूटर लैब स्थापित

शिक्षा विभाग ने निजी कंपनी के सहयोग से गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल मलोया में आधुनिक सुविधाओं से लैस कंप्यूटर लैब की शुरुआत की। लैब को स्थापित करने में लगभग साढ़े चार लाख की लागत आई थी। इस प्रयोगशाला की काफी प्रशंसा हुई। 

धनास के स्कूल से खेल-खेल में शिक्षा की शुरुआत

गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल धनास से खेल-खेल में शिक्षा के प्रोजेक्ट किलकारी की शुरुआत की गई। स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से तैयार स्कूल में प्राइमरी के शिक्षकों की ट्रेनिंग करवाई जा रही है। इस स्कूल की तर्ज पर अन्य सरकारी स्कूलों की प्राइमरी कक्षाओं को खेल-खेल में शिक्षा के तहत तब्दील किया जाएगा। इसके जरिए सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा होगा और उन्हें भी फायदा मिलेगा। छात्र शिक्षा के नजदीक आ सकेंगे। ड्रॉपआउट विद्यार्थियों की संख्या में कमी आएगी। इस योजना की भी चारों ओर प्रशंसा हो रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed