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ऐसा था चंडीगढ़ में केजरीवाल का रोड शो
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 01 Apr 2014 01:29 PM IST
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अरविंद केजरीवाल के रविवार को हुए रोड शो ने आम आदमी पार्टी (आप) के वालंटियर्स में जोश के साथ विश्वास बढ़ा दिया है। लेकिन उनके सामने कई चुनौतियां भी हैं। आइए एक नजर डालते हैं रोड शो के बाद सामने आए नए दृश्य पर।
ताकत
साइलेंट वोटर: शो में कई ऐसे लोग शामिल थे, जो पार्टी से जुड़े नहीं थे। राजनीति से उनका दूर-दूर तक नाता नहीं था, लेकिन वे फिर भी रोड शो में शामिल हुए। इस तबके के आधे लोग वोट भी डालने नहीं जाते थे, लेकिन इस बार इस तबके के भी वोट डालने की उम्मीद है।
ऑटो वालों का सपोर्ट: चंडीगढ़ में थ्री व्हीलर चालकों की काफी संख्या है। रोड शो में कई ऑटो वालों ने पार्टी को सपोर्ट दिया और रोड शो में शामिल भी हुए। हालांकि इस बारे में यूनियन वालों का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। रैली में ऑटो चालकों के एक तबके के शामिल होना बताता है कि दिल्ली की तरह यहां भी ऑटो वाले आप के साथ जुड़ रहे हैं।
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यंगस्टर का जुड़ना: कारों के काफिले के साथ काफी संख्या में दोपहिया वाहन थे। इन पर सभी यंगस्टर थे। वे पूरे रोड शो में शामिल रहे। इनमें काफी संख्या में लड़कियां भी शामिल थीं।
सेक्टरों का सपोर्ट: जिस भी सेक्टर से केजरी का रोड शो निकला, उसमें उनके काफिले का स्वागत किया गया। केजरीवाल से मिलने व देखने के लिए पूरी की पूरी फैमिली जमा थी। माना जा रहा था कि सेक्टर में प्रचार धीमा है, लेकिन रोड शो ने मिथ्य भी तोड़ दिया।
चुनौतियां
शो की कामयाबी को बनाकर रखना: रोड शो की कामयाबी को दस अप्रैल तक बनाकर रखना आप के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी। अब आप का कोई भी बड़ा नेता चंडीगढ़ नहीं आएगा।
बूथ टीम तैयार करना: गुल कह चुकी हैं कि बूथ मैनेजमेंट ही जीत का आधार बनेंगी, लेकिन अब तक फिलहाल इस पर वर्कआउट नहीं हो पाया है। हर बूथ पर टीम तैयार करना और उसे एक्टिव करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
वालंटियर्स की कमी: पार्टी की ओर से डोर टू डोर कैंपेनिंग काफी अच्छी चल रही है, लेकिन इसके बावजूद वालंटियर्स की कमी है। कैंपेन मैनेजर भी मानते हैं कि वालंटियर्स की संख्या बढ़ानी होगी, जो लोगों से सीधा कनेक्ट कर पाएं।
महिलाओं को जोड़ना: पार्टी मानती है कि अब तक उसकी महिलाओं के तबके में पैठ नहीं बन पाई है। डोर टू डोर कैंपेनिंग में अब उनका मकसद महिलाओं को जोड़ना है। इसके लिए पार्टी काम भी कर रही है, लेकिन कम समय में उनके दिलों में जगह बनाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
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ताकत
साइलेंट वोटर: शो में कई ऐसे लोग शामिल थे, जो पार्टी से जुड़े नहीं थे। राजनीति से उनका दूर-दूर तक नाता नहीं था, लेकिन वे फिर भी रोड शो में शामिल हुए। इस तबके के आधे लोग वोट भी डालने नहीं जाते थे, लेकिन इस बार इस तबके के भी वोट डालने की उम्मीद है।
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ऑटो वालों का सपोर्ट: चंडीगढ़ में थ्री व्हीलर चालकों की काफी संख्या है। रोड शो में कई ऑटो वालों ने पार्टी को सपोर्ट दिया और रोड शो में शामिल भी हुए। हालांकि इस बारे में यूनियन वालों का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। रैली में ऑटो चालकों के एक तबके के शामिल होना बताता है कि दिल्ली की तरह यहां भी ऑटो वाले आप के साथ जुड़ रहे हैं।
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यंगस्टर का जुड़ना: कारों के काफिले के साथ काफी संख्या में दोपहिया वाहन थे। इन पर सभी यंगस्टर थे। वे पूरे रोड शो में शामिल रहे। इनमें काफी संख्या में लड़कियां भी शामिल थीं।
सेक्टरों का सपोर्ट: जिस भी सेक्टर से केजरी का रोड शो निकला, उसमें उनके काफिले का स्वागत किया गया। केजरीवाल से मिलने व देखने के लिए पूरी की पूरी फैमिली जमा थी। माना जा रहा था कि सेक्टर में प्रचार धीमा है, लेकिन रोड शो ने मिथ्य भी तोड़ दिया।
चुनौतियां
शो की कामयाबी को बनाकर रखना: रोड शो की कामयाबी को दस अप्रैल तक बनाकर रखना आप के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी। अब आप का कोई भी बड़ा नेता चंडीगढ़ नहीं आएगा।
बूथ टीम तैयार करना: गुल कह चुकी हैं कि बूथ मैनेजमेंट ही जीत का आधार बनेंगी, लेकिन अब तक फिलहाल इस पर वर्कआउट नहीं हो पाया है। हर बूथ पर टीम तैयार करना और उसे एक्टिव करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
वालंटियर्स की कमी: पार्टी की ओर से डोर टू डोर कैंपेनिंग काफी अच्छी चल रही है, लेकिन इसके बावजूद वालंटियर्स की कमी है। कैंपेन मैनेजर भी मानते हैं कि वालंटियर्स की संख्या बढ़ानी होगी, जो लोगों से सीधा कनेक्ट कर पाएं।
महिलाओं को जोड़ना: पार्टी मानती है कि अब तक उसकी महिलाओं के तबके में पैठ नहीं बन पाई है। डोर टू डोर कैंपेनिंग में अब उनका मकसद महिलाओं को जोड़ना है। इसके लिए पार्टी काम भी कर रही है, लेकिन कम समय में उनके दिलों में जगह बनाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।