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Chandigarh News: रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल, पंजीकरण के बावजूद हजारों मरीज बिना इलाज के लौटे

Tue, 13 Aug 2024 03:09 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 13 Aug 2024 03:09 AM IST
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Resident doctors strike, thousands of patients returned without treatment despite registration
चंडीगढ़। कोलकाता की घटना के विरोध में पीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों ने सोमवार सुबह 10.30 बजे हड़ताल शुरू कर दी। देखते ही देखते ओपीडी में बैठे सभी रेजिडेंट डॉक्टर कैरों ब्लॉक के बाहर एकत्र होकर नारेबाजी करने लगे। उसके बाद परिसर में मार्च निकाला और फिर भार्गव सभागार के बाहर धरने पर बैठ गए। रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से सबसे ज्यादा परेशानी ओपीडी में आए मरीजों को हुई। ओपीडी और विशेष क्लीनिक में 10271 मरीज पंजीकरण करवाकर ओपीडी में अपना नंबर आने का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल सका। फैकेल्टी ने सामान्य दिनों की तुलना में तो ज्यादा मरीज देखें लेकिन इससे रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी की भरपाई नहीं हो सकी। वहीं, मंगलवार से जीएमसीएच-32 के रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे।
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पीजीआई में एक के बाद एक हड़ताल से सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को झेलनी पड़ रही है। इससे पहले अनुबंध कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। अब रेजिडेंट डॉक्टरों के काम से हटने से इलाज ठप हो गया है। महज 20 से 25 प्रतिशत मरीजों को ही ओपीडी में देखा जा सका।
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केस- 1
लुधीयाना के देवेश कुमार ने अपने 80 साल के पिता को दिखाने के लिए सुबह 5 बजे पीजीआई पहुंचकर पंजीकरण कराया था। 6 घंटे बाद अचानक पता चला कि उन्हें आज डाक्टर नहीं देखेंगे। वे डॉक्टर के कमरे के बाहर बैठे अपना नंबर आने का इंतजार कर रहे थे। न देखे जाने की बात सुनकर उनकी आंखों में आंसू आ गए क्याेंकि उनके पिता को असहनीय दर्द हो रहा था। पूछने पर बताया गया कि जब तक हड़ताल खत्म नहीं होती डॉक्टर नहीं देखेंगे।
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केस-2
कैथल निवासी दीपिका को सीनियर डॉक्टर के पास ले जाने से पहले रेजिडेंट डॉक्टर केस हिस्ट्री नोट कर रहे थे। अचानक मोबाइल बजा और वे अपना बैग लेकर ओपीडी से निकल गए। दीपिका के पिता ने पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। वे हाथ में पंजीकरण कार्ड लेकर यहां-वहां चक्कर काटते रहे। सिक्योरिटी गार्ड ने बोला वापस लौट जाइए क्योंकि डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। न चाहते हुए भी दीपिका को उसके पिता निजी अस्पताल लेकर गए।
इमरजेंसी और ट्रॉमा में असर नहीं
रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के आह्वान पर पीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों ने वैकल्पिक सेवाएं ठप कर दी हैं, जिसमें ओपीडी, वार्ड और वैकल्पिक ओटी शामिल हैं। इसके अलावा अन्य सेवाएं जैसे ट्रॉमा और इमरजेंसी निर्बाध चलती रही। रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरिहरन का कहना है कि हमारा उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं है। हम न्याय के लिए एकजुट होकर लड़ रहे हैं।
डॉक्टरों की ये हैं मुख्य मांगें
- केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम (सीपीए) का कार्यान्वयन: देश भर में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश में सीपीए या इसी तरह के कानून के तत्काल कार्यान्वयन की मांग


- पारदर्शी जांच : मामले की उचित और पारदर्शी जांच पर जोर देते हैं, क्योंकि हाल की घटनाओं ने चल रही जांच की सत्यनिष्ठा पर संदेह पैदा कर दिया है
- जिम्मेदार अधिकारियों का इस्तीफा: ऑन-ड्यूटी महिला डॉक्टर की गरिमा और जीवन की रक्षा करने में विफलता के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों के इस्तीफे की मांग करते हैं।
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