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अमर उजाला एयू बेसः बदलनी होगी शिक्षा व्यवस्था, लानी होगी जागरूकता... नौकरी की कमी नहीं

Sun, 01 Mar 2020 05:18 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 01 Mar 2020 05:18 PM IST
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Research Scholar, Entrepreneur and student talk on Unemployment
- फोटो : अमर उजाला

बेरोजगारी आज एक बड़ी समस्या बन चुकी है। चार दशक में बेरोजगारी इस समय सबसे बड़ी दर बताई जा रही है। शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में एयू बेस डायलॉग के तहत इस विषय पर एक चर्चा का आयोजन किया गया। इसमें ट्राइसिटी के विद्यार्थी, रिसर्च स्कॉलर, एंटरप्रेन्योर समेत कई प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए।

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विचारों के मंथन से एक बात निकलकर सामने आई कि जॉब तो हैं लेकिन सही कैंडिडेट नहीं मिल रहे। डॉक्टर, इंजीनियर, सीए के अलावा भी कई और फील्ड हैं, जहां लोगों को रुझान बढ़ाना होगा। स्कूल की मौजूदा शिक्षा पद्धति भी इसके लिए जिम्मेदार है। वहीं, करिअर के प्रति जागरूकता की कमी भी है।
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गांवों की ओर ध्यान देने से दूर होगी बेरोजगारी 
आईएएस की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स विशाल निझावन का कहना है कि सरकार ने गांवों की ओर ध्यान देना बंद कर दिया है। रूरल एरिया में डिमांड की कमी आई है, इस वजह से देश की इकोनॉमी में स्लो डाउन है। एक रिपोर्ट के अनुसार, आजादी के वक्त देश की जीडीपी में 60 प्रतिशत हिस्सा एग्रीकल्चर से आता था, जो अब सिमटकर महज 17 प्रतिशत रह गया है। बेरोजगारी दूर करनी है तो ग्रामीण इलाकों के बारे में सोचना होगा।

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युवाओं को बदलना होगा अपना एटीट्यूड 

पीयू के लॉ डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर मुकेश कुमार ने कहा कि बेरोजगारी के पीछे दो बड़े कारण हैं। इसमें से एक सरकार के स्तर पर है और दूसरा लोगों के एटीट्यूड में है। युवाओं को अपना एटीट्यूड बदलने की जरूरत है। युवाओं को जो काम मिलता है, वह उसे करने के लिए तैयार नहीं हैं। गांव में यदि कुम्हार का बेटा बर्तन बनाता है तो सरकार को उसे प्रोत्साहित करना चाहिए।

एजुकेशन सिस्टम को बदलने की जरूरत
महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी बद्दी के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर सुमित आर्य ने कहा कि नौकरियां तो हैं, लेकिन उनके लिए सही कैंडिडेट नहीं मिल रहे। जॉब प्रोवाइडर के पास नौकरियों की लिस्ट है, लेकिन हमारी शिक्षा पद्धति उस नौकरी के लिए कैंडिडेट तैयार नहीं कर पा रही। हम में से कई ऐसे लोग हैं, जो अपने फील्ड से काम को जोड़ते हैं और उसी में आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं लेकिन उससे बाहर निकलने की कोशिश नहीं करते।

प्राइवेट क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा तभी बेरोजगारी घटेगी
समाजसेवी रेखा त्रिवेदी का कहना है कि बेरोजगारी का एक बड़ा कारण स्कूलों में मिलने वाली बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता भी है। सरकार को स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना चाहिए। हालांकि इसके लिए कई तरह के प्रयास किए भी गए हैं, लेकिन वह काफी नहीं हैं। सरकार प्राइवेट क्षेत्र को बढ़ावा देगी तो लोगों का रुझान उस और बढ़ेगा और सभी लोग सरकारी नौकरियों की तरफ नहीं भागेंगे।

अभिभावकों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए सरकार

एनजीओ संचालिका व स्टूडेंट्स शिप्रा ने बताया कि बेरोजगारी का एक बड़ा कारण यह भी है कि अभिभावक जागरूक नहीं हैं। सरकार को एक ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाना चाहिए जिसमें उन्हें बच्चों के लालन-पालन और उनकी पढ़ाई संबंधी प्रशिक्षण अभिभावकों को दिया जाए। बढ़ती आबादी भी बेरोजगारी का एक कारण है। इसके लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को एक साथ आकर कोई समाधान ढूंढना चाहिए।

बढ़ती जनसंख्या है बेरोजगारी की वजह 
सोशियोलाजिस्ट डॉ. सुमित अरोड़ा ने बताया कि सरकारी स्कूलों में मिलने वाली शिक्षा बहुत अच्छी नहीं है। हमारे देश में जॉब का कल्चर ही अलग है। मुझे लगता है कि सही व्यक्ति सही जगह पर नहीं है, क्योंकि एक चपरासी की नौकरी के लिए पीएचडी होल्डर आवेदन करते हैं। बेरोजगारी के पीछे तेजी से बढ़ती जनसंख्या भी एक बड़ा कारण है।

युवाओं के स्किल को पहचानना होगा
प्रोफेशनल ब्यूटीशियन हरलीन के मुताबिक शुरू से हमें बताया जाता है कि आपको इंजीनियर, डॉक्टर या फिर सीए ही बनना है, जबकि बहुत सी ऐसी फील्ड हैं, जहां करिअर की अपार संभावनाएं हैं। मेरा परिवार आर्मी बैकग्राउंड से है, लेकिन मैंने फूड और न्यूट्रिशन में एमएससी की। मेरा झुकाव ग्लैमर की ओर था इसलिए मैंने इस फील्ड को चुना। इसलिए करिअर चुनने में अधिक जागरूकता की आवश्यकता है।

स्कूली स्तर पर शिक्षा व्यवस्था बदली जाए 
पीयू की लॉ रिसर्च स्कॉलर वृंदा पसरीचा ने कहा कि बेरोजगारी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण हमारी शिक्षा व्यवस्था है। स्कूलों में स्किल पर बात करने की बजाय ज्यादा नंबर लाने की बात की जाती है। जब तक स्कूल के स्तर पर स्किल्स पर बात नहीं होगी, तब तक बेरोजगारी की समस्या रहेगी। हमें अपने स्कूलों को रोजगार के हिसाब से अपग्रेड करना होगा।

आरक्षण भी बेरोजगारी की एक बड़ी वजह 
पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ ऑफिसर शुभम वालिया ने कहा कि बेरोजगारी का एक  कारण आरक्षण भी है। कई सक्षम युवाओं को इसलिए नौकरी नहीं मिल पाती है क्योंकि आरक्षित वर्ग से बची सीटों पर ज्यादा कंपीटीशन रहता है। नौकरियों का लाभ कई अयोग्य ले जाते हैं। ऐसे में वह युवा सक्षम होते हुए भी नौकरी नहीं पाते, जो उसके लिए सही में हकदार हैं। हमें इस दिशा में भी सोचना होगा।

जीएसटी के कारण छिना रोजगार 
सामाजिक कार्यकर्ता धर्मपाल रावत ने कहा कि जीएसटी आने से प्राइवेट सेक्टर में रोजगार की काफी कमी आई है। कारोबार में घाटा हो रहा है, इसका खामियाजा प्राइवेट नौकरी करने वालों का उठाना पड़ा है। हम अपनी ओर से कुछ मदद कर रहे हैं। संस्था की ओर से सात दिव्यांगों को व्हील चेयर दी गई है, ताकि वह कुछ काम कर सकें। सरकारों को पॉलिसी बनाते समय इस तरफ खास ध्यान देना चाहिए।

योजनाएं लागू कराने के लिए सरकार गंभीर नहीं

पंचकूला के हरियाणा मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के डायरेक्टर शैलेश शर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से रोजगार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन सरकार उन्हें सही तरह से लागू नहीं कर पा रही। सरकार असंगठित क्षेत्र के रोजगार के लिए भी कुछ नहीं कर रही। जबकि रोजगार के क्षेत्र में इनका बहुत बड़ा हिस्सा है। सरकार की मेक इन इंडिया की योजना फ्लॉप रही है, इसलिए सिस्टम बदलना जरूरी है।

जॉब की नहीं जागरूकता की है कमी
जिला अदालत के वकील वनीत कुमार ने कहा कि समस्या बेरोजगारी की नहीं, बल्कि जागरूकता की है। कानून की पढ़ाई करने के बाद लोगों का रुझान सिर्फ सरकारी वकील, प्राइवेट प्रैक्टिस और ज्यूडिशियरी में जाना चाहते हैं, जबकि लीगल में कई जॉब हैं। आर्मी, एयरफोर्स, नेवी और पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्टें खाली हैं। जागरूकता होगी तो लोग इस ओर भी आएंगे।

बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार करें तैयार
सेक्टर- 42 के प्रोप्राइटर अवीश लोंगिया ने कहा कि रोजगार की कोई समस्या नहीं है, बल्कि सही कैंडिडेट नहीं मिल पा रहे हैं। कॉलेज में पढ़ने वाले स्टूडेंट को पता नहीं होता कि उसे कौन सी फील्ड लेनी चाहिए। स्टूडेंट को उनकी रुचि के मुताबिक ही तैयार किया जाना जरूरी है। हमें बच्चों पर अपनी सोच थोपने की जगह उन्हें उनके मन मुताबिक करिअर चुनने देना चाहिए।

दिन प्रतिदिन गिर रही रोजगार की दर
सामाजिक कार्यकर्ता इमरान मंसूरी ने कहा कि युवाओं के लिए सरकारी जॉब होनी चाहिए। देश की गिरती अर्थव्यवस्था को देखते हुए हसीन सपनों से बाहर आना चाहिए। दिन प्रतिदिन रोजगार की दर गिरती जा रही है। गरीब लोगों के लिए फॉर्म फीस कम होनी चाहिए ताकि हर बच्चा नौकरी के लिए आवेदन कर सके। जब तक सरकार रोजगार की व्यवस्था नहीं करती, देश का सही विकास नहीं हो सकता।

चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स को नहीं मिलता लाभ
सेक्टर-29 के व्यापारी वसीम आमीर ने कहा कि चंडीगढ़ के आर्थिक रूप से कमजोर स्टूडेंट्स को सहायता नहीं मिल पाती। यहां पर जो भी नौकरियां निकलती हैं, उसमें हरियाणा व पंजाब के लोग बाजी मार ले जाते हैं। स्थानीय युवाओं को नौकरियों के लिए बाहर जाना पड़ता है। इस बारे में सरकार को सोचना होगा।

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