कोरोना का खौफ : दूसरी लहर में फिर आई रेमडेसिविर की याद, चंडीगढ़ में किल्लत तो नहीं लेकिन मांग बढ़ी
- पहले एक्सपायर होने की आ गई थी नौबत, अब ढूंढे नहीं मिल रहा रेमडेसिविर
- कोरोना की दूसरी लहर आने से फिर बढ़ी इंजेक्शन की मांग, सिर्फ वितरकों के पास मौजूद
- कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में काम आती है दवा, चंडीगढ़ में छह कंपनियां कर रही हैं आपूर्ति
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दो महीने पहले जिस दवा की अवधि समाप्ति होने की नौबत आ गई थी, कोरोना की दूसरी लहर ने उसकी मांग फिर बढ़ा दी है। हालत यह है कि कोरोना के गंभीर मरीजों की जान बचाने में काम आने वाली दवा रेमडेसिविर की मांग के मुताबिक आपूर्ति नहीं हो रही है। इससे मरीजों को भटकना पड़ रहा है।
चंडीगढ़ में रेमडेसिविर सिर्फ वितरकों और निजी अस्पताल की फार्मेसी में मौजूद है। दवा की दुकानों पर इसकी आपूर्ति फिलहाल बंद है। ऐसे में इंजेक्शन के लिए मरीजों को सीधे वितरक से ही संपर्क करना पड़ रहा है। कई डॉक्टर मरीज को सीधे ही वितरक के पास भेज रहे हैं, ताकि उन्हें भटकना न पड़े। वितरक भी डॉक्टर की लिखी पर्ची देखकर ही इंजेक्शन दे रहे हैं ताकि कालाबाजारी न हो सके। इंजेक्शन की प्राप्ति के लिए मरीज के पास कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट, आधार कार्ड और डॉक्टर का पर्ची होना जरूरी है।
कोरोना की पहली लहर खत्म होने के बाद रेमडेसिविर की मांग न के बराबर पहुंच गई थी। कई वितरकों के पास रेमडेसिविर रखे-रखे समाप्ति अवधि को भी पार करने लग गई थी। इंजेक्शन जिस दाम पर वितरक के पास पहुंचा था, उसी मूल्य पर मरीजों को बेचा गया। जैसे-तैसे स्टॉक निकाला गया लेकिन अब कोरोना की दूसरी लहर आते ही इसकी मांग फिर से बढ़ गई है।
अधिकतम मूल्य से कम में बिक रहा इंजेक्शन
कोरोना की पहली लहर में यह काफी महंगा बिक रहा था। जनवरी-फरवरी में इसके दाम काफी गिर गए थे। कुछ ने तो इस इंजेक्शन को हजार रुपये से कम दाम में बेचा था। हालांकि अब भी इसके दाम एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) से कम हैं। चंडीगढ़ में हीटरो (5400 एमआरपी), डॉ. रेड्डी (5400 एमआरपी), सिपला (4000), माइलिन, जूबिलैंट (4700), जायडस (899) कंपनी के इंजेक्शन मिल रहे हैं। हालांकि मांग होने की बावजूद जायडस के अलावा सभी इंजेक्शन 1500 से दो हजार रुपये के बीच उपलब्ध है।
मरीज को लगते हैं छह इंजेक्शन
पीजीआई के विशेषज्ञ के मुताबिक, ये दवा आवश्यक श्रेणी में नहीं आती। सिर्फ गंभीर मरीजों को लंग्स इंफेक्शन होने पर दी जाती है। एक मरीज को कुल छह इंजेक्शन देने होते हैं। पहले दिन 200 एमजी की खुराक फिर अगले चार दिन 100-100 एमजी की खुराक लगाई जाती है। यह वायरल के प्रभाव को कम करती है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इसकी भारी कमी चल रही है। इंजेक्शन के लिए मरीजों को पांच से सात दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।
आपूर्ति में कमी आई है लेकिन चंडीगढ़ में इतनी ज्यादा किल्लत नहीं है। मरीजों के दस्तावेज लेने के बाद उन्हें इंजेक्शन दे रहे हैं। - अंकुर गुप्ता, गुप्ता एजेंसी चंडीगढ़।
दूसरी लहर में रेमडेसिविर की डिमांड बढ़ गई है। हम लोग सिर्फ मरीजों को इंजेक्शन दे रहे हैं। इसके साथ ही मरीज का रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है। -कुलविंदरजीत सिंह, गुरु नानक मेडिकोज प्राइवेट लिमिटेड।
रेमडेसिविर जरूरी दवाओं में शामिल नहीं है। कुछ गंभीर मरीजों पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। यह एक एंटी वायरल ड्रग है, जो वायरल के प्रभाव को कम करने का काम करती है। -प्रो. पंकज मल्होत्रा, इंटरनल मेडिसिन पीजीआई।