स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाए जाएंगे गीता के उपदेश
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शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री प्रोफेसर रामबिलास शर्मा ने कहा कि विश्वव्यापी पवित्र ग्रंथ गीता के अध्यायों को प्राइमरी से यूनिवर्सिटी स्तर तक की कक्षाओं के पाठयक्रम में शामिल किया जाएगा।
प्राइमरी कक्षा में छोटे अध्यायों और यूनिवर्सिटी स्तर की कक्षाओं में बड़े अध्यायों को पढ़ाया जाएगा। आज समाज में संस्कार और संस्कृति का ज्ञान देने के लिए पवित्र ग्रंथ गीता ही सर्वोच्च माध्यम है।
गीता ज्ञान बिना जीवन को सफल नहीं बनाया जा सकता। शिक्षा मंत्री प्रोफेसर रामबिलास शर्मा सोमवार देर सायं ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर श्री कृष्ण कृपा गोशाला समिति एवं श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय दिव्य गीता सत्संग के दूसरे दिन का शुभारंभ करते समय बोल रहे थे।
इससे पहले शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, थानेसर के विधायक सुभाष सुधा, लाडवा के विधायक डा. पवन सैनी, भाजपा प्रवक्ता प्रोफेसर विरेन्द्र चौहान, कृष्ण पांचाल ने दीप प्रज्वलित कर दिव्य गीता सत्संग का शुभारंभ किया और आरती में भाग लिया।
शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि गीता से ही मानव को नई ऊर्जा मिल सकती हैं। समाज के सभी लोगों को पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों का अनुसरण करना चाहिए और प्रेरणा लेकर एक अच्छे समाज का निर्माण करने में अपना सहयोग देना चाहिए।
'प्रधानमंत्री ने भी गीता के अनुसरण का संदेश दिया'
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी विदेशों में जाकर महान ग्रंथ गीता का अनुसरण करने का संदेश दिया। इससे सहजता से आकलन किया जा सकता हैं कि आज पूरे विश्व में लोग गीता का अनुसरण करना चाहते हैं।
बेशक आज हम गीता की 5151 जयंती मना रहे हों। यह ग्रंथ आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है। विश्व में आज चर्चा की जा रही है कि आतंकवाद, भ्रष्टाचार, मानव शोषण व अन्याय आदि समस्याओं से कैसे निजात पाई जाए। कानून से ही इन तमाम बुराइयों पर काबू नहीं पाया जा सकता है, इसके लिए मानव की मानसिकता को बदलने की जरूरत है। मानव की मानसिकता तभी बदलेगी जब मानव को गीता का ज्ञान होगा।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने पवित्र ग्रन्थ गीता के उपदेशों को सबके सामने रखते हुए कहा कि आज समाज के हर नागरिक को गीता का ज्ञान लेना बहुत जरुरी हैं। सभी समस्याओं का समाधान, मानवता की मुस्कान और जीवन का आधार तथा देश की पहचान भी गीता है। समाज में तनाव, दबाव, अशांति, अराजकता, आतंकवाद आदि समस्याओं से बचने के लिए गीता के ज्ञान का अनुसरण करना चाहिए।