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पीजीआई में इलाज करवाना है तो पढ़ें ये गुड न्यूज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 29 Apr 2014 08:24 AM IST
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अब आपको पीजीआई में इलाज के लिए घर बैठे ही रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। जैसे ही पेशेंट जांच के लिए पहुंचेगा तो उसकी सारी हिस्ट्री डाक्टरों के कंप्यूटर पर खुल सकेगी।
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पीजीआई में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर योगेश चावला ने बताया कि पीजीआई अब हाईटेक हो गया है। अब पीजीआई की इमरजेंसी में आने वाले पेशेंट की स्थिति की पूरी मेडिकल रिपोर्ट पीजीआई के डाक्टरों के लिए उपलब्ध है।
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पेशेंट चाहे कितना भी पुराना हो पर उसकी टेस्ट, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य संबंधित जानकारियों के लिए फाइल को खंगालना नहीं पड़ेगा। पेशेंट की यह जानकारी पीजीआई के हास्पिटल इन्फारमेशन सिस्टम में लाई जा रही हैं।
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पीजीआई में प्रतिवर्ष बीस लाख से ज्यादा पेशेंट आते हैं। प्रतिदिन आठ हजार से ज्यादा पेशेंट की जांच ओपीडी में होती है। इसी को देखते हुए पीजीआई ने हास्पिटल इन्फारमेशन सिस्टम डवलप किया है।
यह सिस्टम बीस माड्यूल को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें जनरल ओपीडी, स्पेशलिटी और अस्सी वार्ड भी शामिल हैं। पीजीआई में दो हजार बेड हैं। जिनमें भर्ती पेशेंट की हर जानकारी साफ्टवेयर में है। पेशेंट की जानकारी सिंगल क्लिक पर उपलब्ध है।
पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर योगेश चावला ने कहा कि प्री रजिस्ट्रेशन का सिस्टम डेवलप किया गया है। इसके अंतर्गत एक प्री रजिस्ट्रेशन काउंटर बनाया जाएगा।
इसमें कि आनलाइन प्री रजिस्ट्रेशन करवाने वाले मरीज आ सकेंगे। उनको यूनीक सेंट्रल रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा। पेशेंट का जैसे ही टेस्ट होगा उसकी जानकारी साफ्टवेयर के माध्यम से डाल दी जाएगी।
किसी ओपीडी में विजिट से पहले पेशेंट को वेब में डिटेल दे सकता है। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर दो कंप्यूटर होंगे। उन्होंने कहा कि मोबाइल रजिस्ट्रेशन भी जल्द शुरू होेगा। इसके संग ही पीजीआई जल्द ही एसएमएस सुविधा शुरू होगी। इसके लिए 77 वार्ड में मौजूद नर्स ट्रेंड की जाएंगी।
पीजीआई में होंगे कियोस्क
पीजीआई इन्फारमेशन कियोस्क हरेक जगह पर उपलब्ध हैं। आनलाइन इनवेंटरी और प्रोक्योरमेंट माडल वार्ड के माध्यम से आनलाइन ड्रग की जानकारी देंगे।
टेलीमेडिसिन पहुंची विदेश
पीजीआई ने अब टेलीमेडिसिन का ऐसा सिस्टम डेवलप किया है, जिसके माध्यम से सार्क कंट्री मसलन भूटान और श्रीलंका को भी दवाएं दी जा सकेंगी।
उन्होंने कहा कि अब रेडियोडायगोनिस्टिक मशीनों को आनलाइन कर दिया गया है। पीजीआई अब रेडियोडायगोनिस्टिक मशीनों मसलन एमआरआई, सीटी स्कैन को आनलाइन करेगा। अभी सिस्टम के माध्यम से सात सौ कंप्यूटर कनेक्ट हैं जल्द ही पंद्रह सौ कंप्यूटर इससे कनेक्ट होंगे।
ब्लड ट्रैकिंग आनलाइन
अब पीजीआई में आनलाइन ब्लड बैंक ट्रैकिंग होगी। जब कोई ब्लड डोनेट करता है तो पता नहीं चलता कि डोनर कौन है और रिसिपेंट कौन है। ऐसी स्थिति में यदि कोई गड़बड़ी होती है तो स्टोरेज और डोनर में गड़बड़ी का पता लगाना मुश्किल होता है। इस सिस्टम के माध्यम से सारी जानकारी मिल सकेगी।