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अनपढ़ माता-पिता की बेटी बनी टॉपर, जानिए इनकी कहानी
ब्यूरो/अमर उजाला, नारनौंद(हरियाणा)
Updated Sun, 21 May 2017 09:17 AM IST
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हरियाणा ओपन स्कूल की 12वीं में सैकेंड रही रेखा
- फोटो : अमर उजाला
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अनपढ़ माता-पिता की बेटी ने अपनी मेहनत से टॉपरों की सूची में आ गई है। रेखा ने अपने मां- बाप का नाम रोशन कर दिया है। रेखा ने दूसरा स्थान हासिल किया है। पांच बहन और एक भाई होने की वजह से माता-पिता उसे स्कूल में पढ़ाने में असमर्थ थे, लेकिन बेटी ने अपने दम पर ओपन स्कूल से पढ़ाई को जारी रखने का संकल्प लिया। इस पर जब लोगों ने तंज कसा तो उसने जिद कर ली की प्रदेश में टॉपर बनकर दिखाऊंगी। अब हरियाणा ओपन स्कूल की 12वीं परीक्षा में पेटवाड़ की इस बेटी ने दूसरा स्थान प्राप्त करके इतिहास रच दिया है।
रेखा की सफलता पर गांव में खुशी का माहौल है। गांव पेटवाड़ निवासी जयभगवान की बेटी रेखा ने हरियाणा ओपन स्कूल में 500 में से 436 अंक हासिल किया है। रेखा का कहना है कि उसके माता-पिता उसे हमेशा पढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते थे।
रेखा बताती हैं कि जब घर पर रहकर पढ़ाई शुरू की तो गांव के कुछ लोगों ने तंज कसे। लोगों को जवाब देने के लिए रेखा ने टॉप करने की जिद कर ली। रेखा बताती हैं कि घर के काम में मां ओमपति का हाथ बंटाती और समय मिलते ही पढ़ना शुरू कर देती। इस तरह हर रोज दो-तीन घंटे पढ़ाई करने का समय मिल पाता था। लेकिन वह निराश नहीं हुई।
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बेटियों को बेटे की तरह पाला : पिता
रेखा के पिता जय भगवान ने बताया कि उन्होंने अपनी पांचों बेटियों को बेटों की तरह पाला है। वह बेटी को आईपीएस बनाना देखना चाहते हैं। बताया कि वे अनपढ़ हैं, लेकिन बेटी को पढ़ते हुए देखकर सुकून मिलता है। वे बेटी को खूब पढ़ाना चाहते हैं। जेपी इंस्टीट्यूट के संचालक संदीप अत्री ने बताया कि रेखा ने हमारे पास से फॉर्म भरा था। उनकी विशेष तरीके से तैयारी करवाई थी। छात्रा होनहार थी।
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रेखा की सफलता पर गांव में खुशी का माहौल है। गांव पेटवाड़ निवासी जयभगवान की बेटी रेखा ने हरियाणा ओपन स्कूल में 500 में से 436 अंक हासिल किया है। रेखा का कहना है कि उसके माता-पिता उसे हमेशा पढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते थे।
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रेखा बताती हैं कि जब घर पर रहकर पढ़ाई शुरू की तो गांव के कुछ लोगों ने तंज कसे। लोगों को जवाब देने के लिए रेखा ने टॉप करने की जिद कर ली। रेखा बताती हैं कि घर के काम में मां ओमपति का हाथ बंटाती और समय मिलते ही पढ़ना शुरू कर देती। इस तरह हर रोज दो-तीन घंटे पढ़ाई करने का समय मिल पाता था। लेकिन वह निराश नहीं हुई।
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बेटियों को बेटे की तरह पाला : पिता
रेखा के पिता जय भगवान ने बताया कि उन्होंने अपनी पांचों बेटियों को बेटों की तरह पाला है। वह बेटी को आईपीएस बनाना देखना चाहते हैं। बताया कि वे अनपढ़ हैं, लेकिन बेटी को पढ़ते हुए देखकर सुकून मिलता है। वे बेटी को खूब पढ़ाना चाहते हैं। जेपी इंस्टीट्यूट के संचालक संदीप अत्री ने बताया कि रेखा ने हमारे पास से फॉर्म भरा था। उनकी विशेष तरीके से तैयारी करवाई थी। छात्रा होनहार थी।