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पंजाब के किसानों ने किया रुख तो मध्य प्रदेश में हुई रिकॉर्ड खरीदारी, नए कानून ने बढ़ाया असमंजस
Wed, 30 Sep 2020 11:24 AM IST
खुशबू गोयल
सुरिंदर पाल, जालंधर
सुरिंदर पाल, जालंधर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 30 Sep 2020 11:24 AM IST
सार
- तुरंत सरकारी खरीद, तेज भुगतान के कारण पंजाब के किसानों ने किया मध्य प्रदेश का रुख
- रिकॉर्ड खरीद के साथ मध्य प्रदेश ने इस साल गेहूं उत्पादन में यूपी और पंजाब को पीछे छोड़ा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इस बार मध्य प्रदेश ने गेहूं उत्पादन में यूपी और पंजाब को पीछे छोड़ दिया है। इसके पीछे पंजाब के किसानों को ही बड़ा कारण माना जा रहा है। तीन साल पहले बड़ी संख्या में पंजाब के किसानों ने मध्य प्रदेश में जमीन खरीदकर गेहूं की खेती शुरू की थी। इस साल एमपी में पिछले साल की तुलना में गेहूं उत्पादन में 60 फीसदी बढ़ोतरी हुई।
अच्छी सरकारी खरीद, तेज भुगतान और उपजाऊ जमीन के कारण पंजाब का किसान मध्य प्रदेश गया है। हालांकि नए कानून से वहां गए किसान अब असमंजस में हैं। मध्य प्रदेश में जमीन खरीदकर खेती करने वाले शाहकोट के किसान तजिंदर सिंह का कहना है कि वहां पर सरकारी खरीद काफी अच्छी है, लेकिन अब नए कानून बनने से किसानों को अधिक नुकसान होगा।
हम किसानों ने गेहूं की अच्छी पैदावार कर मध्य प्रदेश को ऊंचाई पर खड़ा कर दिया गया क्योंकि हमारी फसल की खरीद सुरक्षित थी। हमें पता था कि मंडी में आते ही हमारी फसल सरकार खरीद लेगी। मध्य प्रदेश में हमें अच्छा रिस्पांस मिल रहा था लेकिन नए कानून से असमंजस की स्थिति है।
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अच्छी सरकारी खरीद, तेज भुगतान और उपजाऊ जमीन के कारण पंजाब का किसान मध्य प्रदेश गया है। हालांकि नए कानून से वहां गए किसान अब असमंजस में हैं। मध्य प्रदेश में जमीन खरीदकर खेती करने वाले शाहकोट के किसान तजिंदर सिंह का कहना है कि वहां पर सरकारी खरीद काफी अच्छी है, लेकिन अब नए कानून बनने से किसानों को अधिक नुकसान होगा।
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हम किसानों ने गेहूं की अच्छी पैदावार कर मध्य प्रदेश को ऊंचाई पर खड़ा कर दिया गया क्योंकि हमारी फसल की खरीद सुरक्षित थी। हमें पता था कि मंडी में आते ही हमारी फसल सरकार खरीद लेगी। मध्य प्रदेश में हमें अच्छा रिस्पांस मिल रहा था लेकिन नए कानून से असमंजस की स्थिति है।
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मध्य प्रदेश में इस बार रिकॉर्ड 1,27,67,628 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा
मध्य प्रदेश में 10 लाख किसान हर साल सरकार को गेहूं बेचते हैं, लेकिन इस साल यह संख्या 60 प्रतिशत बढ़ गई है। मध्य प्रदेश में इस बार रिकॉर्ड एक करोड़ 27 लाख 67 हजार 628 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। पंजाब में एक करोड़ 27 लाख 67 हजार 473 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। इस साल केंद्र सरकार द्वारा खरीदे गए कुल 386.54 लाख मीट्रिक टन गेहूं में 33 फीसदी हिस्सेदारी अकेले मध्य प्रदेश की रही, जो अब तक की सबसे ज्यादा है।
गेहूं की खेती पंजाब से चार गुना ज्यादा
मध्य प्रदेश में 172.52 हेक्टेयर में गेहूं की खेती की जाती है जो पंजाब से 4 गुना ज्यादा है। हालांकि पंजाब में एक हेक्टेयर जमीन में 5 टन (50 क्विंटल) गेहूं होता है जबकि मध्य प्रदेश में इतने ही क्षेत्रफल में 3 टन (30 क्विंटल) गेहूं पैदा होता है। दरअसल, मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद काफी अच्छी है। किसानों को भुगतान काफी जल्दी किया जाता है। इसी बात से प्रभावित होकर पंजाब व हरियाणा से किसान यहां आए।
बिना उर्वरक के अच्छी पैदावार
इसके अलावा मध्य प्रदेश की शरबती काली मिट्टी में बिना रासायनिक उर्वरक के गेहूं की अच्छी पैदावार होती है। जबकि पंजाब में उर्वरक का बहुत उपयोग होता है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश के नर्मदा इलाके के गेहूं की पंजाब तक में मांग है।
गेहूं की खेती पंजाब से चार गुना ज्यादा
मध्य प्रदेश में 172.52 हेक्टेयर में गेहूं की खेती की जाती है जो पंजाब से 4 गुना ज्यादा है। हालांकि पंजाब में एक हेक्टेयर जमीन में 5 टन (50 क्विंटल) गेहूं होता है जबकि मध्य प्रदेश में इतने ही क्षेत्रफल में 3 टन (30 क्विंटल) गेहूं पैदा होता है। दरअसल, मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद काफी अच्छी है। किसानों को भुगतान काफी जल्दी किया जाता है। इसी बात से प्रभावित होकर पंजाब व हरियाणा से किसान यहां आए।
बिना उर्वरक के अच्छी पैदावार
इसके अलावा मध्य प्रदेश की शरबती काली मिट्टी में बिना रासायनिक उर्वरक के गेहूं की अच्छी पैदावार होती है। जबकि पंजाब में उर्वरक का बहुत उपयोग होता है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश के नर्मदा इलाके के गेहूं की पंजाब तक में मांग है।