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पंजाब के बाद अब चंडीगढ़ कांग्रेस में खुली बगावत

Tue, 20 Jan 2015 03:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 20 Jan 2015 03:50 PM IST
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Rebellion in Chandigarh Congress

प्रदीप छाबड़ा ने चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला ही था कि पार्टी में खुली बगावत शुरू हो गई। सोमवार को इसकी बानगी दिखी।

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पार्टी के फैसले के खिलाफ जाकर सोमवार को पार्षद सतीश कैंथ ने एफएंडसीसी कमेटी चुनाव के लिए नामांकन भर दिया। पार्टी ने इस साल पार्षद सुभाष चावला को वित्त एवं अनुबंध (एफएंडसीसी) कमेटी का सदस्य बनाने का फैसला लिया था।

चावला ने दोपहर को नगर निगम ज्वाइंट कमिश्नर के पास नामांकन भी भरा और शाम होते-होते पार्षद सतीश कैंथ भी नामांकन भरने पहुंच गए। हालांकि, छाबड़ा की ताजपोशी के बाद खुली गुटबाजी का यह पहला उदाहरण नहीं है।
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रविवार को छाबड़ा की ताजपोशी में भी कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शामिल नहीं होकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी थी। वहीं, पूर्व मेयर रविंदरपाल सिंह पाली ने तो उनकी नियुक्ति को ही गलत बताते हुए पार्टी हाईकमान को पत्र भी भेज दिया है।

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छह ने भरे नामांकन, 23 को चुनाव

Rebellion in Chandigarh Congress

इस साल एफएंडसीसी कमेटी के लिए 23 जनवरी को चुनाव होगा। सोमवार को नामांकन भरने का आखिरी दिन था और 21 तक नामांकन वापस लिए जा सकते हैं। छह पार्षदों ने नामांकन भरे हैं, जिनमें कांग्रेस से सुभाष चावला, सतीश कैंथ, भाजपा से आशा जसवाल, राजिंदर कौर रत्तू, मनोनीत पार्षद बाबूलाल और सुरिंदर बाहगा शामिल हैं।

पांच सदस्य होते हैं कमेटी में
 
वित्त एवं अनुबंध कमेटी नगर निगम की सबसे अहम कमेटी होती है। इस कमेटी की फाइनेंशियल पावर 50 लाख रुपये होती है। इसमें पांच पार्षद सदस्य होते हैं। यदि पांच से ज्यादा पार्षद नामांकन भरते हैं तो मतदान होता है।

भाजपा में भी मतभेद
नामांकन भरने को लेकर भाजपा-अकाली दल में भी खूब हंगामा हुआ। पार्टी की ओर से चार महिला पार्षदों ने नामांकन भरने की इच्छा जाहिर की थी। आशा जसवाल और राजिंदर कौर रत्तू के अलावा हरजिंदर कौर और हीरा नेगी भी दौड़ में थीं, लेकिन नाम पर सहमति नहीं बनने पर हरजिंदर कौर ने मीटिंग में खूब हंगामा किया।

एफएंडसीसी के लिए छाबड़ा के साथ हुए चावला

Rebellion in Chandigarh Congress

सूत्रों का कहना है कि पूर्व मेयर सुभाष चावला एफएंडसीसी कमेटी का सदस्य बनने के लिए प्रदीप छाबड़ा के समर्थन में आ गए हैं। इसी वजह से वह छाबड़ा की ताजपोशी के वक्त भी मौजूद रहे, जबकि छाबड़ा को अध्यक्ष बनाए जाने से चावला भी नाराज चल रहे थे, क्योंकि वह खुद भी इस पद की दौड़ में थे।

सतीश कैंथ को हमने हर मौके पर पूरा सम्मान दिया है। हमने उन्हें दो बार डिप्टी मेयर बनाया। इस साल सीनियर डिप्टी मेयर का उम्मीदवार भी बनाया। हालांकि, वह महज दो वोट से हार गए। उन्हें इस साल प्राइमरी हेल्थ कमेटी का चेयरमैन भी बनाया। हम उन्हें समझाएंगे और कोशिश करेंगे कि वे अपना नामांकन वापस लें।
- प्रदीप छाबड़ा, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

बतौर पार्षद मुझे कमेटी के चुनाव में नामांकन भरने का अधिकार है। कमेटी के सदस्य का फैसला मेयर का होता है, न कि पार्टी अध्यक्ष का।
- सतीश कैंथ, कांग्रेस पार्षद

पार्टी हाईकमान को दी शिकायत में मैंने यही जिक्र किया था कि छाबड़ा के अध्यक्ष बनने से पार्टी बिखर जाएगी। कैंथ की बगावत से इसकी शुरुआत हो गई है। वो बहल ही थे जो सबको साथ लेकर चल सकते थे।
-रविंदरपाल सिंह पाली, पूर्व मेयर और कांग्रेस नेता

कांग्रेस ने सतीश कैंथ को नजरंदाज कर दलितों का अपमान किया है, जबकि भाजपा ने राजिंदर कौर रत्तू को नामांकन भरवाकर इस वर्ग का सम्मान किया है। कांग्रेस हमेशा से दलितों को सिर्फ वोट बैंक समझती आई है।
- अरुण सूद, भाजपा पार्षद

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