अमर उजाला पड़ताल: हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के नाम पर जनता को थमाया झुंझुना, सरकार से भी लूटी वाहवाही
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में प्रसव, नवजात बच्चों का इलाज, संक्रामक रोगों की जांच-इलाज, गैर संक्रामक रोगों की स्क्रीनिंग के अलावा आंख, नाक, कान और गले के इलाज और पैथोलॉजी लैब की भी सुविधा होनी चाहिए। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर 12 तरह की स्वास्थ्य सुविधाओं को शामिल किया गया है।
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विस्तार
चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार द्वारा शहर के जिन 34 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को चमकाकर अत्याधुनिक बनाने की बात की जा रही है, उसकी हकीकत कुछ और ही है। उन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में से कई उसके मानक पर ही खरे नहीं उतर रहे हैं। इतना ही नहीं ये मानकों की अनदेखी कर संचालित किए जा रहे हैं। इन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के बल पर चंडीगढ़ ने स्वास्थ्य मंत्रालय से देश में दूसरा स्थान भी प्राप्त कर लिया है जबकि इन सेंटरों पर ना तो क्षेत्रीय जनता का इलाज करने वाला कोई डॉक्टर तैनात है और ना ही जांच के उपकरण व टेक्नीशियन। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि किन सेंटरों पर डॉक्टर है और किन पर नहीं।
ये भी खूब रही
चंडीगढ़ के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में लोगों को मुहैया कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसे इसी वर्ष सम्मानित भी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट में चंडीगढ़ के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में मरीजों को बेहतर तरीके से चिकित्सकीय सुविधाएं मुहैया कराने का दावा किया गया है जिसकी बिनाह पर मंत्रालय ने चंडीगढ़ को देशभर में दूसरा स्थान प्रदान किया है जबकि शहर में संचालित आधा दर्जन से ज्यादा सेंटरों पर डॉक्टर ही मौजूद नहीं है। इनमें खुड्डा जस्सू, खुड्डा लाहौरा, खुड्डा अली शेर, बड़हेरी, पलसोरा, बहलाना और रायपुर खुर्द शामिल हैं।
एक नहीं दो डॉक्टर की तैनाती है जरूरी
वेलनेस सेंटर पर दो चिकित्सा अधिकारी, दो स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, लेडी हेल्थ विजिटर्स और आयुर्वेदिक प्रेक्टिशनर की तैनाती का मानक है लेकिन चंडीगढ़ के ज्यादातर सेंटरों में एक भी डॉक्टर तैनात नहीं हैं। फाइलों में ही बिना डॉक्टर के क्षेत्र की आबादी का इलाज किया जा रहा है।
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर होनी चाहिए ये सुविधाएं
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में प्रसव, नवजात बच्चों का इलाज, संक्रामक रोगों की जांच-इलाज, गैर संक्रामक रोगों की स्क्रीनिंग के अलावा आंख, नाक, कान और गले के इलाज और पैथोलॉजी लैब की भी सुविधा होनी चाहिए। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर 12 तरह की स्वास्थ्य सुविधाओं को शामिल किया गया है। यही नहीं जिला अस्पताल में मरीज को जो दवा लिखी जाती है वह दवा मरीज को अपने घर के पास के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में उपलब्ध होनी चाहिए।
ये भी होना जरूरी है
वेलनेस सेंटर में नियुक्त महिला स्टाफ उनके क्षेत्र के हर गांव में घर-घर जाकर परिवार के हर सदस्य की स्वास्थ्य जांच करवाएंगी और इनका डिजिटल और फिजिकल रिकार्ड रखेंगी। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए हर केंद्र पर दो टैबलेट होने चाहिए।
जांच के साथ परामर्श भी
वेलनेस सेंटर के आसपास के इलाके में रहने वाले तीस साल से अधिक उम्र के लोगों के बीपी, डायबिटीज व कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की फ्री जांच की जानी चाहिए। इसके साथ ही जरूरत के अनुसार उनको दवा और परामर्श दिया जाना चाहिए। इन लोगों की बीमारी के आधार पर तीन केटेगरी बनाई जानी चाहिए, जिसमें इलाज की जरूरत नहीं, परहेज की जरूरत और दवा की जरूरत के आधार पर इनकी बीमारियों का इलेक्ट्रानिक व फिजिकल रिकार्ड मेंटेन किया जाना चाहिए।
मानकों की अनदेखी में तो झंडे गाड़े
स्वास्थ्य विभाग ने हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर के मानकों की अनदेखी में तो झंडे गाड़ दिए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनकी झूठी रिपोर्टों के आधार पर मंत्रालय ने इन्हें देशभर में दूसरा स्थान कैसे प्रदान कर दिया। इससे साफ पता चलता है कि ऊपर से नीचे तक का सिस्टम पूरी तरह से भ्रष्ट हो गया है। -सनम सिंह, सेक्टर-46
इसलिए चिकित्सकीय सेवाओं से उठ रहा भरोसा
ऐसी हकीकत के कारण ही जनता का सरकारी चिकित्सकीय सेवाओं से भरोसा उठता जा रहा है। इससे साबित हो रहा है कि तमाम सरकारी योजनाएं तब तक सफल साबित नहीं हो सकती जब तक उसे संचालित करने वाले अधिकारी व कर्मचारी ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वाह न करें। - प्रवीण खत्री, हल्लोमाजरा
मेरी जानकारी के अनुसार सभी एचडब्ल्यूसी में डॉक्टर हैं। हालांकि दोबारा जांच करेंगे। पिछले एक सप्ताह में कई नए डॉक्टर प्रतिनियुक्ति पर आए हैं और किसी भी तरह की समस्या होने पर अगले कुछ दिनों में इसका समाधान कर दिया जाएगा। - यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव