Asian Games 2023: पढ़ें हरमनप्रीत के ड्रैग फ्लिकर बनने की कहानी, कैसे मनप्रीत सिंह ने अपनी प्रतिमा पहचानी
भारतीय हॉकी टीम में सोने का तगमा जीतने में अहम भूमिका अदा करने वाले मनप्रीत सिंह एक निर्धन परिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं। जन्म जालंधर के मिट्ठापुर में एक किसान के घर हुआ। इलाके के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से शिक्षा ग्रहण की।
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एशियाई खेलों में भारतीय हॉकी का परचम लहराने वाले कप्तान हरमनप्रीत सिंह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकर्स में से एक हैं। अमृतसर के जंडियाला गुरु में किसान परिवार में जन्मे हरमनप्रीत सिंह के ड्रैग फ्लिकर बनने की कहानी भी काफी रोचक है। वह बचपन में पिता के साथ खेती-बाड़ी में हाथ बंटाते थे। करीब दस साल की उम्र तक उन्हें खेतों में ट्रैक्टर चलाने का शौक लगा। वह पिता की देखरेख में ट्रैक्टर चलाया करते थे लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी समस्या इसके सख्त गियर लगाने में आती थी।
लगातार प्रयास करने से उनके हाथों में मजबूती आती चली गई। इस ताकत का इस्तेमाल उन्होंने ड्रैग फ्लिकर बनने में किया। खेत की कड़ी मेहनत ने उनके हाथों को और मजबूती दी। हरमनप्रीत सिंह 10 वर्ष के थे, तब उन्होंने पहली बार हॉकी खेलना शुरू किया। पिता ने उनके हॉकी के शौक को देखते हुए 15 साल की उम्र में उन्हें जालंधर स्थित सुरजीत हॉकी अकादमी में भर्ती करा दिया। उन्होंने फॉरवर्ड बनने के इरादे से यहां ट्रेनिंग शुरू की। यहां वह सामान्य से ज्यादा भारी गेंद से अभ्यास करते थे।
2016 में किया पहला अंतरराष्ट्रीय गोल
अप्रैल 2015 में हरमनप्रीत सिंह को पहली बार सीनियर टीम में जापान के खिलाफ तीन मैचों की द्विपक्षीय सीरीज के लिए चुना गया। जापानी टीम पर 2-1 की जीत में उन्होंने राष्ट्रीय टीम के लिए अपना पहला गोल किया। अगले मैच में भी कनाडा के खिलाफ 3-1 से जीत में भी उन्होंने एक गोल का योगदान किया।
2016 पुरुष हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी के लिए हरमनप्रीत को टीम में रखा गया। दो गोल करने के बाद हरमनप्रीत ने यंग प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट की ट्रॉफी अपने नाम कर ली थी। 2021-22 पुरुष एफआईएच प्रो. लीग गेम में इंग्लैंड के खिलाफ अपना 100वां गोल किया। इसके बाद उन्होंने उसी गेम में हैट्रिक बनाई और अपनी टीम को 4-3 से जीत दिलाई। जर्मनी के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने दो बार गोल करके अपनी टीम को 3-0 से जीत दिलाने में मदद की।
उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 गोल जमाकर भारत को रजत पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई और प्रो लीग में 16 मैचों में 18 गोल जमाकर पहले स्थान पर रहे। वह इकलौते भारतीय खिलाड़ी है, जिन्हें दो बार इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (एफआईएच) का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल है। एशियाई खेलों के फाइनल में भी हरमनप्रीत ने दो गोल दागे थे।
मनप्रीत सिंह: परगट सिंह से प्रेरित, रोनाल्डो की जीवनी ने भरा जोश
भारतीय हॉकी टीम में सोने का तगमा जीतने में अहम भूमिका अदा करने वाले मनप्रीत सिंह एक निर्धन परिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं। जन्म जालंधर के मिट्ठापुर में एक किसान के घर हुआ। इलाके के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से शिक्षा ग्रहण की।
मनप्रीत के भाई सुखराज सिंह बताते हैं कि युवावस्था में उन्होंने हॉकी खेलने वाले अपने भाइयों को कई टूर्नामेंटों से घरेलू स्तर पर पुरस्कार लाते देखकर इस खेल को अपनाने की इच्छा व्यक्त की। मनप्रीत बताते हैं कि इससे पहले उनकी प्रेरणा के स्रोत उनके पहले असली हीरो भारत के पूर्व कप्तान परगट सिंह थे, जिन्होंने 1992 बार्सिलोना ओलंपिक और 1996 अटलांटा ओलंपिक में टीम का नेतृत्व किया था।
रोनाल्डो की जीवनी से प्रेरित
मनप्रीत कहते हैं कि पुर्तगाल के फुटबॉल खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो की जीवन से भी प्रेरित हैं। उसको अक्सर पढ़ते हैं और अंदर जोश भरते हैं कि किस तरह से रोनाल्ड ने गरीब परिवार में जन्म लेकर मुकाम हासिल किया। रोनाल्डो कहते हैं कि जब आप सफल होते हैं, तब भी आपको अपने गरीबी में काटे पुराने दिनों को कभी नहीं भूलना चाहिए। मैं पूरी तरह से उस धारणा पर चलता हूं। यह किसी से छिपा नहीं है कि मनप्रीत सिंह का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था। पिता के निधन के बाद मनप्रीत सिंह व सुखराज ने कड़ी मेहनत की।
कई बार किया टीम का नेतृत्व
मनप्रीत ने 2013 पुरुष हॉकी जूनियर विश्व कप में भारत की जूनियर पुरुष हॉकी टीम की भी कप्तानी की थी। उन्हें 2014 में एशियाई हॉकी महासंघ द्वारा ‘जूनियर प्लेयर ऑफ द ईयर’ भी चुना गया था। इसके बाद उन्होंने, 2017 में सीनियर टीम की कमान संभाली। भारत ने 2017 पुरुष हॉकी एशिया कप जीता और बाद में उसी साल हॉकी वर्ल्ड लीग फाइनल में कांस्य पदक जीता। उनकी कप्तानी में भारत ने 2018 एशियाई खेलों में कांस्य पदक, 2018 चैंपियंस ट्रॉफी में रजत और 2018 एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में स्वर्ण पदक जीता।
इली उनकी सबसे अच्छी आलोचक
2013 में भारतीय टीम के सुल्तान ऑफ जोहोर कप जीतने के बाद मलेशियाई लड़की इली एक फोटो खिंचवाने के लिए मनप्रीत के पास पहुंची थीं। वहां से मनप्रीत सिंह और इली के बीच एक नई साझेदारी शुरू हुई। संयोग से उनकी सास भी हॉकी खेलती थीं। मां मंजीत कौर ने इली का नाम नवप्रीत कौर रखा है। मनप्रीत सिंह ने कुछ समय पहले अमर उजाला से अनौपचारिक बातचीत में जिक्र किया था कि इली उनकी सबसे अच्छी आलोचक हैं लेकिन वह उनके साथ पूरी तरह ईमानदार हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वो मुझे नीचा दिखाती हैं। बल्कि, मुझे प्रेरित करती हैं।
मां मंजीत कौर व भाई सुखराज सिंह कहते हैं कि मनप्रीत सिंह ही नहीं बल्कि सारी हॉकी टीम ने इस बार खासी मेहनत की थी। एशियन गेम्स का हरेक मैच देखने में साफ होता था कि टीम में तालमेल कितना जबरदस्त है। यह टीम की मेहनत है और मनप्रीत सिंह पर उनको गर्व है लेकिन अब आगे का समय काफी मेहनत वाला है, ओलंपिक के लिए तैयारी करनी है।