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चंडीगढ़: 22 करोड़ से बना रानी लक्ष्मीबाई महिला भवन हो रहा जर्जर, अब फिर 3 करोड़ खर्च हॉल को बना रहे हाईटेक
Thu, 21 Oct 2021 02:37 PM IST
प्रमोद कुमार
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: प्रमोद कुमार
Updated Thu, 21 Oct 2021 02:37 PM IST
सार
चंडीगढ़ नगर निगम कितना लापरवाह है, इसका ताजा उदाहरण सामने आया है। जी हां, पहले 22 करोड़ खर्च कर रानी लक्ष्मीबाई महिला भवन का निर्माण किया गया, जो आयोजनों के अभाव में निरंतर जर्जर हो रहा है। अब फिर 3 करोड़ खर्च करके भवन के हॉल हाईटेक बनाया जा रहा है। कांग्रेस और भाजपा नेताओं ने मामले में एक-दूसरे पर निशाना साधा है।
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महिला भवन के हॉल में चल रहा कार्य।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सेक्टर-38सी स्थित रानी लक्ष्मीबाई महिला भवन को बनाने पर नगर निगम ने 22 करोड़ रुपये खर्च कर अपने लिए सफेद हाथी तैयार किया था। छह साल तक कोई गतिविधि न होने पर अब जर्जर होते महिला भवन के एक हॉल को नगर निगम लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से हाईटेक बना रहा है। टैगोर थिएटर की तर्ज पर बनने वाले सभी सुविधाओं से युक्त इस हॉल का जल्द उद्घाटन होगा। इसमें लगभग 250 से 300 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। केंद्र की ओर से महिलाओं को एक नई दिशा देने और उनकी प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से वर्ष 2009 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी ने भवन की आधारशिला रखी थी, लेकिन सरकारी दफ्तरों में लगभग 6 साल तक फाइल घूमती रही।
ये भी पढ़ें-पीएम मोदी ने की मनोहर लाल की तारीफ: कहा- हरियाणा को मिली ईमानदार सरकार, उनके प्रयोगों से हम भी लेते हैं सीख
छह साल पहले बनकर हुआ था तैयार
वर्ष 2015 में 1.3 एकड़ में भवन बनकर तैयार हो गया। आधुनिक सुविधाओं से युक्त चंडीगढ़ का यह पहला भवन था, लेकिन उसमें महिलाओं के लिए कुछ भी योजना नहीं बन सकी। हालात यह हो गए कि भवन की छत से पानी टपकने लगा। उसमें रखे उपकरण भी धूल फांक रहे हैं। इस पर सदन में खूब हंगामा भी हुआ और योजना भी बनी, लेकिन हकीकत में किसी योजना का लाभ महिलाओं को नहीं मिला। अब एक हॉल को फिर से मरम्मत करवाकर आयोजन के योग्य बनवाया जा रहा है, जिसका जल्द उद्घाटन होगा।
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महिलाओं को ये सुविधाएं देने की थी योजना
भवन में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए एक पुलिस परामर्श केंद्र, एक स्त्री रोग परामर्श केंद्र, एक महिला पुस्तकालय, एक प्रदर्शनी केंद्र, एक जिम, एक छात्रावास, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की योजना और प्रदर्शनी के लिए एक हॉल बना था। लेकिन बेहतर योजना न बनने से यह बिल्डिंग महज एक राजनीति का मुद्दा बनकर रह गई। वर्ष 2017 में जिम को शुरू भी कराया गया। इसमें काफी संख्या में महिलाएं भी आईं। लेकिन निगम में जिम ट्रेन की नीति न होने से यह बंद हो गई।
ये भी पढ़ें-चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव: नामांकन से कुछ दिन पहले उम्मीदवार घोषित करेगी भाजपा
कोविड के बाद अधिकारियों के खुल गए दफ्तर
कोविड के बाद महिला भवन में नगर निगम के एसडीओ ने दफ्तर बना लिए हैं। जबकि इस भवन में सिर्फ महिलाओं से जुड़े कार्य और उनके लिए ही दफ्तर बनने थे। इसके लिए कई बार सदन में बहस भी हो चुकी है।
विपक्ष का आरोप, भाजपा पार्षद और अधिकारियों में तालमेल के अभाव में भवन खंडहर बना
नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र सिंह बबला ने बताया कि कांग्रेस के कार्यकाल में भवन की योजना बनी थी। इसमें परीक्षा देने के लिए आने वाली बाहरी महिलाओं के लिए रुकने की व्यवस्था, एक छात्रावास खोलने की योजना, कंप्यूटर, सिलाई मशीन, ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण कार्यक्रम और एक संगीत केंद्र बनाने की योजना थी। भाजपा के पार्षद और अधिकारियों के तालमेल की कमी से भवन खंडहर में बदल गया।
ये भी पढ़ें-चंडीगढ़: 1857 की क्रांति में मारे गए सैनिकों के अवशेषों की जांच के लिए अमेरिका और इंग्लैंड तैयार
मेयर का जवाब-कांग्रेस सिर्फ राजनीति करती है
मेयर रविकांत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ राजनीति करना जानती है। महिला भवन के हॉल में ऑडिटोरियम का प्रस्ताव पास था। उसी का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें कोई नया काम नहीं है। शहर में महिलाओं के कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं। टैगोर थियेटर की तरह ही यहां सभी सुविधाएं होंगी।
यह हॉल सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति आयोजन कर सकेगा। महिला भवन होने के कारण उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। हमारा उद्देश्य है कि निगम की संपत्ति का बेहतर से बेहतर उपयोग हो सके।
-आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम चंडीगढ़
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छह साल पहले बनकर हुआ था तैयार
वर्ष 2015 में 1.3 एकड़ में भवन बनकर तैयार हो गया। आधुनिक सुविधाओं से युक्त चंडीगढ़ का यह पहला भवन था, लेकिन उसमें महिलाओं के लिए कुछ भी योजना नहीं बन सकी। हालात यह हो गए कि भवन की छत से पानी टपकने लगा। उसमें रखे उपकरण भी धूल फांक रहे हैं। इस पर सदन में खूब हंगामा भी हुआ और योजना भी बनी, लेकिन हकीकत में किसी योजना का लाभ महिलाओं को नहीं मिला। अब एक हॉल को फिर से मरम्मत करवाकर आयोजन के योग्य बनवाया जा रहा है, जिसका जल्द उद्घाटन होगा।
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महिलाओं को ये सुविधाएं देने की थी योजना
भवन में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए एक पुलिस परामर्श केंद्र, एक स्त्री रोग परामर्श केंद्र, एक महिला पुस्तकालय, एक प्रदर्शनी केंद्र, एक जिम, एक छात्रावास, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की योजना और प्रदर्शनी के लिए एक हॉल बना था। लेकिन बेहतर योजना न बनने से यह बिल्डिंग महज एक राजनीति का मुद्दा बनकर रह गई। वर्ष 2017 में जिम को शुरू भी कराया गया। इसमें काफी संख्या में महिलाएं भी आईं। लेकिन निगम में जिम ट्रेन की नीति न होने से यह बंद हो गई।
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कोविड के बाद अधिकारियों के खुल गए दफ्तर
कोविड के बाद महिला भवन में नगर निगम के एसडीओ ने दफ्तर बना लिए हैं। जबकि इस भवन में सिर्फ महिलाओं से जुड़े कार्य और उनके लिए ही दफ्तर बनने थे। इसके लिए कई बार सदन में बहस भी हो चुकी है।
विपक्ष का आरोप, भाजपा पार्षद और अधिकारियों में तालमेल के अभाव में भवन खंडहर बना
नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र सिंह बबला ने बताया कि कांग्रेस के कार्यकाल में भवन की योजना बनी थी। इसमें परीक्षा देने के लिए आने वाली बाहरी महिलाओं के लिए रुकने की व्यवस्था, एक छात्रावास खोलने की योजना, कंप्यूटर, सिलाई मशीन, ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण कार्यक्रम और एक संगीत केंद्र बनाने की योजना थी। भाजपा के पार्षद और अधिकारियों के तालमेल की कमी से भवन खंडहर में बदल गया।
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मेयर का जवाब-कांग्रेस सिर्फ राजनीति करती है
मेयर रविकांत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ राजनीति करना जानती है। महिला भवन के हॉल में ऑडिटोरियम का प्रस्ताव पास था। उसी का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें कोई नया काम नहीं है। शहर में महिलाओं के कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं। टैगोर थियेटर की तरह ही यहां सभी सुविधाएं होंगी।
यह हॉल सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति आयोजन कर सकेगा। महिला भवन होने के कारण उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। हमारा उद्देश्य है कि निगम की संपत्ति का बेहतर से बेहतर उपयोग हो सके।
-आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम चंडीगढ़