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नृत्य से दिखाया रानी झांसी का मातृत्व भाव

Mon, 11 Jan 2021 02:32 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 11 Jan 2021 02:32 AM IST
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Rani Jhansi's maternal expressions showed through dance
टैगोर‌ थिएटर में प्रस्तुति देतीं समीरा कौसर। - फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। शहर की कथक नृत्यांगना समीरा कौसर ने रविवार को टैगोर थिएटर में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के ममतामयी रूप को नृत्य के माध्यम से दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया। समीरा की भावमयी प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
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समीरा ने बताया कि रानी झांसी के वीरांगना रूप से सब परिचित हैं, लेकिन उनके मातृत्व पक्ष के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इस नृत्य नाटिका में रानी लक्ष्मीबाई के अपने पुत्र के प्रति ममतामयी रूप को पेश करने की कोशिश की। यह प्रस्तुति समीरा ने रविवार को टैगोर थिएटर में चल रहे उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के शास्त्रीय नृत्य महोत्सव के समापन समारोह पर दी।
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कविता तिवारी की लिखी कविता के माध्यम से समीरा ने लक्ष्मीबाई के मां के रूप में भीतर की उथल-पुथल को चित्रित किया था। उनकी पीड़ा को ‘हे पुत्र कर क्षमा इस प्रतिज्ञाबद्ध मां को’ पंक्ति के माध्यम से दर्शकों के सामने पेश किया। समीरा ने नृत्य के माध्यम से नायिका की व्यथा चित्रित की कि यद्यपि वह एक मां है, लेकिन इसके साथ ही वह झांसी की रानी भी है। उसे मातृभूमि के लिए खुद का बलिदान देना ही होगा, लेकिन वह अपने बेटे दामोदर के बारे में और उसके दर्द से चिंतित है। इस प्रस्तुति के लिए माधो प्रसाद ने संगीत तैयार किया और स्वर व हारमोनियम पर भी अपना योगदान दिया।
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जयपुरी घराने का कथक भी किया पेश
कार्यक्त्रस्म की अन्य प्रस्तुतियों में समीरा कौसर ने भक्तिमयी कृष्ण स्तुति को पेश किया। जिसके बोल ‘‘बलि बलि मोहिनी मूरत की बलि’’ थे। इस नृत्य के माध्यम से इन्होंने कृष्ण की महिमा का बखान नृत्य के माध्यम से किया । इसके साथ डॉ.समीरा ने जयपुर घराने के शुद्ध कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। इसमें उन्होंने नृत्य तोड़े, टुकड़े, परन चक्र, लड़ी, उपज उठान, चाले का खूबसूरत प्रदर्शन किया। इस अवसर पर एनजेडसीसी निदेशक डॉ सौभग्य वर्धन, गुरु शोभा कौसर, प्राचीन कला केंद्र के सचिव सजल कौसर और कथक नृत्यांगना व अभिनेत्री नंदिता पुरी भी उपस्थित रहे।
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