'हरियाणा के मामले में पंजाब का दखल बर्दाश्त नहीं'
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पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को हरियाणा के अंदरूनी मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। उप मुख्यमंत्री सुखबीर का हरियाणा प्रदेश गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एचएसजीपीसी) के गठन के विरोध में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करना हरियाणा के मामलों में सीधा-सीधा हस्तक्षेप है।
यह कहना है कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं हरियाणा के लोक निर्माण एवं उद्योग मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला का। उन्होंने कहा कि हमारे देश में संविधान के अनुरूप संघीय ढांचा है और पंजाब सरकार की इस तरह की मांग करना संघीय ढांचे का उल्लंघन है, जिसे हरियाणा किसी भी शर्त पर सहन नहीं करेगा।
संघीय ढांचे का सम्मान करें गृहमंत्री
ढांड रोड स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुरजेवाला ने रविवार को होने जा रहे सिख सम्मेलन को लेकर कहा कि उन्होंने मीडिया के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से अनुरोध किया कि वे भारतीय जनता पार्टी के पक्षपाती रवैये को छोड़कर देश के गृह मंत्री के तौर पर संघीय ढांचे का सम्मान करें।
हरियाणा का अपने क्षेत्र में सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने का पूरा हक है। सुखबीर बादल का अलग कमेटी का विरोध करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि कानूनी रूप से भी तर्क संगत नहीं है। साथ ही इस मांग का राजनीतिक सामाजिक आधार भी नहीं है।
मक्कड़ का बयान राजनीतिक
सुरजेवाला ने सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ के बयान को राजनीतिक दुर्भावनाओं से ग्रस्त है और इसके लिए कानूनी विशेषज्ञों की राय नहीं ली गई है। हरियाणा में इनेलो और भाजपा दोनों का अकाली दल का पिछलग्गू होने का रवैया सामने आया है। जो शुरू से ही प्रदेश के सिखों के हितों की अनदेखी एवं विरोध कर रहे हैं। उन्हें इस बात के लिए लोगों को जवाब देना होगा।
‘सम्मेलन में अलग कमेटी मांगी तो सरकार सहमति देगी’
प्रदेश की सिख संगत यदि अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के गठन की मांग करेगी तो हरियाणा सरकार अवश्य सहमति प्रदान करेगी। जरूरत पड़ने पर अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने के लिए आवश्यक कानून बनाने के लिए इसे विधायिका में लाया जाएगा। एक प्रशभन के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी तक हरियाणा की अलग कमेटी के प्रारूप पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। प्रारूप को लेकर दी जा रही जानकारी अभी तक केवल अफवाहें हैं। ऐलान के बाद छह जुलाई को हरियाणा की सिख संगत की भावनाओं के अनुरूप इसका गठन किया जाएगा।
‘एक लाख परिवारों ने दिए हैं समर्थन में शपथ पत्र’
सुरजेवाला ने कहा कि प्रदेश के गुरुद्वारों की संपत्ति और आमदनी का संचालन हरियाणा की सिख संगत के पास होना चाहिए। पंजाब एवं हरियाणा के अलग होने के समय ही इस बात का प्रावधान किया गया था कि सिख संगत की मांग के अनुसार अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाई जाए।
कांग्रेस ने वर्ष 2005 के चुनाव में चुनावी घोषणापत्र में इसे अमलीजामा पहनाने की बात कही थी। इसके बाद 17 मार्च 2007 में कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया, जिसका इनेलो ने विरोध किया था। यह रिकॉर्ड में आज भी दर्ज है। इसके बाद सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया। कमेटी के समक्ष प्रदेश के एक लाख से अधिक सिख परिवारों ने अलग कमेटी बनाने के समर्थन में शपथ पत्र भी दिए। इस पर कानूनी मंत्रणा हुई। उन शपथ पत्रों के के बाद हरियाणा के सिख एक समागम कर रहे हैं।