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रामलाल चौधरी की जमानत याचिका खारिज
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चंडीगढ़। जिला अदालत ने हरियाणा के सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारी से छह करोड़ ठगने के मामले में आरोपी रामलाल की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी रामलाल पर करोड़ों के गबन के मामले से हरियाणा के राजस्व अधिकारी का नाम हटवाने के एवज में छह करोड़ रुपये ठगने का आरोप है।
पंचकूला निवासी नरेश कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि फरवरी 2015 में विजिलेंस को 250 करोड़ रुपये के गबन की शिकायत मिली थी। तब नरेश वहां बतौर जिला क्षेत्रीय अधिकारी के रूप में पदस्थ थे। पूछताछ के दौरान विजिलेंस ने नरेश कुमार का नाम भी एफआईआर में दर्ज करने की बात कही थी। नरेश ने इस मामले में अपने दोस्त वकील सतीश यादव बात की। उन्होंने नरेश को बताया कि इस मामले में चंडीगढ़ के रामलाल चौधरी से मदद ली जा सकती है।
रामलाल से फोन पर बात हुई। बाद में रामलाल ने उन्हें अपने घर बुलाया और कहा कि उसकी अधिकारियों से बात हो गई है। मामले से बाहर निकालने के लिए छह करोड़ रुपये लगेंगे। शिकायतकर्ता ने अपनी प्रॉपर्टी बेचकर पहली किस्त के तौर पर तीन करोड़ रुपये दे दिए। इसके बावजूद उनका नाम एफआईआर में दर्ज कर लिया गया। नरेश ने रामलाल से मिलकर बात की तो उसने एफआईआर से नाम हटवाने के लिए और तीन करोड़ रुपये मांगे। नरेश ने फिर संपत्ति बेचकर रामलाल को पैसे दे दिए लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उनका काम नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस को दी।
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पंचकूला निवासी नरेश कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि फरवरी 2015 में विजिलेंस को 250 करोड़ रुपये के गबन की शिकायत मिली थी। तब नरेश वहां बतौर जिला क्षेत्रीय अधिकारी के रूप में पदस्थ थे। पूछताछ के दौरान विजिलेंस ने नरेश कुमार का नाम भी एफआईआर में दर्ज करने की बात कही थी। नरेश ने इस मामले में अपने दोस्त वकील सतीश यादव बात की। उन्होंने नरेश को बताया कि इस मामले में चंडीगढ़ के रामलाल चौधरी से मदद ली जा सकती है।
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रामलाल से फोन पर बात हुई। बाद में रामलाल ने उन्हें अपने घर बुलाया और कहा कि उसकी अधिकारियों से बात हो गई है। मामले से बाहर निकालने के लिए छह करोड़ रुपये लगेंगे। शिकायतकर्ता ने अपनी प्रॉपर्टी बेचकर पहली किस्त के तौर पर तीन करोड़ रुपये दे दिए। इसके बावजूद उनका नाम एफआईआर में दर्ज कर लिया गया। नरेश ने रामलाल से मिलकर बात की तो उसने एफआईआर से नाम हटवाने के लिए और तीन करोड़ रुपये मांगे। नरेश ने फिर संपत्ति बेचकर रामलाल को पैसे दे दिए लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उनका काम नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस को दी।
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